मुंबई। शेयर बाजार में निवेशकों के लिए बड़ी खबर है। रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स का बहुप्रतीक्षित आईपीओ जल्द आने वाला है। बाजार नियामक सेबी ने इस आईपीओ को मंजूरी दे दी है। यह भारतीय शेयर बाजार का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ बन सकता है।
कितना बड़ा है यह आईपीओ?
जियो प्लेटफॉर्म्स इस आईपीओ के जरिए करीब 4 अरब डॉलर यानी लगभग 37,700 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी में है। कंपनी ने जून में सेबी के पास ड्राफ्ट पेपर (डीआरएचपी) जमा किए थे। 28 अगस्त को सेबी ने अंतिम मंजूरी दे दी। कंपनी इस आईपीओ में 27 करोड़ तक नए इक्विटी शेयर जारी करेगी। ये शेयर कंपनी की कुल इक्विटी का महज 2.9 प्रतिशत हिस्सा होंगे।
वैल्यूएशन कितना?
अब तक मिली जानकारी के अनुसार जियो प्लेटफॉर्म्स का वैल्यूएशन करीब 137 अरब डॉलर आंका गया है। इससे पहले नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के आईपीओ को सबसे बड़ा माना जा रहा था, लेकिन जियो का इश्यू उससे भी बड़ा होने वाला है।
पैसा कहां लगेगा?
आईपीओ से जुटाए गए पैसे का इस्तेमाल मुख्य रूप से कर्ज चुकाने में किया जाएगा। रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड (आरजेआईएल) के बचे हुए कर्ज का पूरा या आंशिक भुगतान इसी फंड से होगा। कुछ राशि कंपनी के सामान्य कामकाज पर भी खर्च की जाएगी।
जियो प्लेटफॉर्म्स में पहले से ही बड़े वैश्विक निवेशक पैसा लगा चुके हैं।
फेसबुक (मेटा) ने 2020 में 9.99 प्रतिशत हिस्सेदारी 43,574 करोड़ रुपये में खरीदी थी।
गूगल ने 7.73 प्रतिशत हिस्सेदारी 33,737 करोड़ रुपये में ली।
सिल्वर लेक, केकेआर, मुबाडाला, इंटेल और क्वालकॉम जैसे निवेशकों ने मिलकर 15.2 प्रतिशत हिस्सेदारी 74,745 करोड़ रुपये में खरीदी।
वर्तमान में रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास 66.43 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि मेटा और गूगल के पास कुल 17.71 प्रतिशत शेयर हैं। अब निवेशक इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि कंपनी प्राइस बैंड और आईपीओ खुलने की तारीख कब घोषित करती है।










