नेपाल (Nepal)में आई विनाशकारी बाढ़ के बीच बालेन शाह सरकार ने भारत और चीन समेत कई देशों की ओर से विदेशी रेस्क्यू टीम भेजने के प्रस्ताव को फिलहाल स्वीकार नहीं किया है। नेपाल सरकार का कहना है कि उसके सुरक्षा बल राहत और बचाव अभियान संभालने में सक्षम हैं और फिलहाल बाहरी रेस्क्यू टीमों की जरूरत नहीं है।
रसुवा जिले में आई भीषण फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचाई है। बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है और सैकड़ों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। ऐसे मुश्किल वक्त में भारत, चीन समेत कई देशों ने नेपाल को मदद की पेशकश की थी। हालांकि, नेपाल ने विदेशी बचाव दलों को भेजने के प्रस्ताव को ठुकराते हुए अपने ही संसाधनों और सुरक्षा बलों के जरिए अभियान जारी रखने का फैसला किया है।
नेपाल सरकार ने क्या कहा?
नेपाल के विदेश मंत्रालय के अनुसार, नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस राहत एवं बचाव अभियान में जुटे हुए हैं। सरकार का कहना है कि मौजूदा स्थिति में घरेलू सुरक्षा बल रेस्क्यू ऑपरेशन को संभालने में सक्षम हैं।
नेपाल का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब भारत, चीन, अमेरिका, ब्रिटेन, जापान और अन्य देशों ने अलग-अलग स्तर पर सहायता की पेशकश की है।
भारत और चीन की मदद को भी किया गया मना
नेपाल की ओर से विदेशी रेस्क्यू टीमों को लेकर अपनाए गए रुख में भारत और चीन दोनों शामिल हैं। हालांकि, नेपाल ने मानवीय सहायता और तकनीकी सहयोग के लिए पूरी तरह दरवाजा बंद नहीं किया है। रिपोर्टों के मुताबिक, फिलहाल काठमांडू की प्राथमिकता अपने सुरक्षा बलों के जरिए खोज और बचाव अभियान चलाने की है।
क्यों अहम है नेपाल का फैसला?
रसुवा चीन की सीमा के नजदीक स्थित है और मौजूदा आपदा ने इस पूरे इलाके में गंभीर संकट पैदा कर दिया है। ऐसे में विदेशी रेस्क्यू टीमों को लेकर नेपाल का फैसला रणनीतिक और प्रशासनिक, दोनों नजरिए से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, नेपाल सरकार ने इस फैसले को किसी भू-राजनीतिक कारण से जोड़ने से इनकार किया है और कहा है कि उसके अपने सुरक्षा बल अभियान को संभाल रहे हैं।
फिलहाल नेपाली एजेंसियां लापता लोगों की तलाश, घायलों को सुरक्षित निकालने और प्रभावित इलाकों में राहत पहुंचाने में जुटी हैं। सरकार का दावा है कि बचाव अभियान पूरी क्षमता के साथ जारी रखा जा रहा है।











