भ्रष्टाचार के आरोप के बाद कर्नाटक के मंत्री का इस्तीफा

नई दिल्ली। कर्नाटक(Karnataka) के मंत्री बी. नागेंद्र ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाले राज्य मंत्रिमंडल से और अपने विधायक पद से भी इस्तीफा देने की घोषणा की। यह महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में वित्तीय अनियमितताओं में उनकी संलिप्तता के आरोपों के बाद हुआ।बी. नागेंद्र का इस्तीफा कथित वाल्मीकि निगम घोटाले के मामले में उन पर और कांग्रेस सरकार पर बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच आया।

कॉन्फ्रेंस में आंसू बहाते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने “पार्टी को शर्मिंदगी से बचाने” के लिए “स्वेच्छा से पद छोड़ने” का फैसला किया है।उन्होंने कहा, “मैं अपनी मर्जी से इस्तीफा दे रहा हूं ताकि विपक्षी पार्टी द्वारा मेरे खिलाफ लगाए गए अनावश्यक आरोपों की वजह से मेरी पार्टी को होने वाली शर्मिंदगी से बचा जा सके।” उन्होंने यह भी कहा कि वे भाजपा की मनुवादी राजनीति के शिकार हैं।

नागेंद्र का इस्तीफा कथित वाल्मीकि निगम घोटाले को लेकर उन पर और कांग्रेस सरकार पर बढ़े राजनीतिक दबाव के बीच आया। भाजपा और जद(एस) 3 अगस्त को उनके मंत्रिमंडल में फिर से शामिल होने के बाद से ही मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। उनका आरोप है कि वे राज्य सरकार के इस निगम से धन के कथित डायवर्जन से जुड़े थे।

हाल के मानसून सत्र के दौरान विपक्ष ने विधानसभा के अंदर और बाहर बार-बार विरोध प्रदर्शन किए। यह सत्र तीन दिन छोटा कर दिया गया और 24 अगस्त को लगातार हो-हल्ले के बीच अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।दोनों पार्टियां 1 से 10 सितंबर तक रायचूर से बल्लारी तक पैदल यात्रा भी करने वाली हैं, जिसमें नागेंद्र के इस्तीफे की मांग की जाएगी।

बी नागेंद्र के आसपास का विवाद मई 2024 का है। तब महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम के अकाउंट्स सुपरिंटेंडेंट पी. चंद्रशेखरन ने आत्महत्या कर ली थी और छह पेज का नोट छोड़ गए थे, जिसमें निगम के फंड में अनियमितताओं और अनधिकृत ट्रांसफर का आरोप लगाया गया था।बाद की जांच में पता चला कि निगम के खाते से 89.63 करोड़ रुपये यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के एक खाते में ट्रांसफर किए गए और फिर कई अन्य खातों में भेज दिए गए।

इससे बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया।जब यह विवाद सामने आया तब बी. नागेंद्र जनजातीय कल्याण मंत्री थे। उन्होंने जून 2024 में मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था। उन्हें 3 अगस्त 2026 को प्लानिंग एंड स्टैटिस्टिक्स विभाग के साथ फिर से मंत्रिमंडल में शामिल किया गया, जिसके बाद विपक्ष ने उन्हें हटाने की मांग फिर से शुरू कर दी।

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