नई दिल्ली। दिल्ली के कनॉट प्लेस के आउटर सर्कल में रविवार को जाति-आधारित आरक्षण (Reservation) के खिलाफ और इस व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर लोग जमा हुए, जिनमें से 20 से अधिक लोगों को हिरासत में ले लिया गया। प्रदर्शनकारियों ने तख्तियां ले रखी थी। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि पुलिस ने हमें लाठियों से पीटा है।
प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा एवं सरकारी मदद के लिए पात्रता तय करते समय आर्थिक मानदंडों को महत्व देने की मांग करते हुए नारेबाजी की। उनकी दलील थी कि मदद जाति से परे, आर्थिक रूप से कमजोर लोगों तक पहुंचनी चाहिए।
पुलिस का कहना था कि बिना अनुमति कनॉट प्लेस पर जमा हुए 20 से अधिक लोगों को हिरासत में लेकर वहां से हटा दिया गया। प्रदर्शनकारियों को हटाने के वक्त मौके पर पुलिस बल की भारी मौजूदगी रही। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग ‘क्रीमी-लेयर’ का नियम लागू करने और मौजूदा आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा करने की है।
प्रदर्शनकारियों ने अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़ा वर्गों से संबंधित नीतियों में बदलाव की भी मांग की।
एक प्रदर्शनकारी ने कहा, ‘हम आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं। हम आरक्षण में सुधार चाहते हैं। सरकार को यह समझना चाहिए कि सभी समुदायों के गरीब लोगों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है और उनकी चिंताओं को सुना जाना चाहिए।’
दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आरक्षण के विरोध में प्रदर्शन की आंच अब उत्तर प्रदेश तक पहुंच गई है। राजधानी लखनऊ में रविवार को सवर्ण मोर्चा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया।
इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी रोलबैक के समर्थन में जोरदार नारेबाजी की और सवर्ण समाज के सांसदों और विधायकों के खिलाफ अपना आक्रोश जताते हुए उनकी सांकेतिक अर्थी निकाली।
सवर्ण मोर्चा के पदाधिकारियों का कहना है कि बड़ी संख्या में प्रदेशभर में अलग-अलग शहरों में ब्राह्मण, ठाकुर एकजुट होकर प्रदर्शन कर रहे है।
इसी क्रम में रविवार को लखनऊ में भी वीमेन पावर लाइन चौराहे पर मोर्चा के सदस्यों ने इकट्ठे होकर यूजीसी रोलबैक के नारे लगाए उनके हाथों में संवैधानिक अछूत लिखे प्लेकार्ड भी थी।










