The Lens Expose : छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (CGMSCL) पर एक बार फिर सवाल उठे हैं। आरोप है कि बिलासपुर की IMAEC Limited को फायदा पहुंचाने के लिए टेंडर के नियमों में बदलाव किए गए। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इस कंपनी के पास राज्य में न तो अपनी मैन्युफैक्चरिंग फैक्ट्री है और न ही पर्याप्त टर्नओवर, फिर भी करोड़ों के ठेके की तैयारी चल रही है।
CGMSCL पूरे प्रदेश के सरकारी अस्पतालों के लिए दवाएं, री-एजेंट और मेडिकल सामान खरीदती है। पिछले साल इसी संस्था में 660 करोड़ रुपये के री-एजेंट घोटाले का मामला सामने आया था। आरोप था कि जरूरत से ज्यादा सामान खरीदा गया और कोल्ड स्टोरेज की कमी के कारण 161 करोड़ का माल खराब हो गया। उस मामले में मोक्षित कॉर्पोरेशन के डायरेक्टर शशांक चोपड़ा जेल गए थे। हाईकोर्ट ने इसे साजिश और भ्रष्टाचार करार दिया था।
अब नए मामले में IMAEC Limited पर दो बड़े आरोप हैं। पहला – कंपनी के पास छत्तीसगढ़ में अपनी फैक्ट्री नहीं है। यह दूसरे राज्यों की कंपनियों से लोन लाइसेंस पर सामान बनवाती है। दूसरा- टेंडर की टर्नओवर शर्त में बदलाव। पहले औसत टर्नओवर 10 करोड़ रुपये रखा गया था, जिसे बाद में घटाकर 4 करोड़ कर दिया गया। इससे कंपनी आसानी से शर्त पूरी कर सकती है। एक्स्पर्ट्स कह रहे हैं कि यह मोक्षित वाले पैटर्न की तरह लगता है, जहां नियमों में बदलाव कर चहेती कंपनी को फायदा पहुंचाया गया।
शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखकर तीन मांगें की हैं – IMAEC को दिए गए रेट कॉन्ट्रैक्ट और परचेज ऑर्डर रद्द किए जाएं, कंपनी के दावों की बिलासपुर में भौतिक जांच हो और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए। छत्तीसगढ़ की औद्योगिक नीति 2024-30 स्थानीय निर्माताओं को बढ़ावा देने की बात करती है, लेकिन फैक्ट्री और स्थानीय रोजगार के बिना छूट मिलने से असली उद्योगपतियों के साथ अन्याय होने का आरोप है।











