रायपुर| छत्तीसगढ़ भाजपा में जनप्रतिनिधियों की अफसरों के खिलाफ शिकायतों की सूची में एक नाम और शामिल हो गया है। रायपुर के सांसद बृजमोहन अग्रवाल के बाद अब दुर्ग के भाजपा सांसद विजय बघेल का अफसरों के खिलाफ गुस्सा सामने आया है। विजय बघेल ने दो अफसरों के खिलाफ लोकसभा अध्यक्ष से शिकायत की है।
अभी छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य सचिव IAS अमित कटारिया के खिलाफ बृजमोहन अग्रवाल की नाराजगी चर्चा में ही थी कि इस बीच विजय बघेल की शिकायत भी सामने आ गई। विजय बघेल ने भिलाई नगर निगम के तत्कालीन आयुक्त राजीव कुमार पांडे और भिलाई-चरोदा नगर निगम के आयुक्त डी.एस. राजपूत के खिलाफ लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष विशेषाधिकार हनन की शिकायत दर्ज कराई है।
श्री बघेल ने लोकसभा अध्यक्ष से आग्रह किया है कि उनकी शिकायत को विशेषाधिकार समिति के पास भेजा जाए।
सांसद विजय बघेल के करीबी सूत्रों ने इस शिकायत की पुष्टि द लेंस से की है।
प्रशासनिक सूत्रों से पता चला है कि विजय बघेल की शिकायत के बाद लोकसभा सचिवालय ने इस मामले में DOPT तथा राज्य सरकार से जानकारी मांगी है। बताया जा रहा है कि सांसद की शिकायत यह है कि ये दोनों अफसर केंद्रीय योजनाओं के तहत प्राप्त राशि से होने वाले विकास कार्यों में रुचि नहीं ले रहे थे। ये सांसद का फोन तक नहीं उठाते थे और कई बार टेंडर भी निरस्त किए गए हैं। इन मामलों में अनियमितता की भी शिकायतें हैं।
दुर्ग सांसद की दिक्कत यह है कि ये नगर निगम उनके संसदीय क्षेत्र में ही आते हैं और विकास के कार्य नहीं होने पर उन्हें ही जनता का सामना करना पड़ेगा। विजय बघेल ने काफी परेशान होकर 18 मई को लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखा था।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ से सबसे पहले बृजमोहन अग्रवाल ने स्वास्थ्य सचिव IAS अमित कटारिया के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की शिकायत लोकसभा अध्यक्ष से की थी। बृजमोहन अग्रवाल स्वयं लोकसभा की विशेषाधिकार समिति के सदस्य हैं। उन्हें शिकायत थी कि अमित कटारिया उनके क्षेत्र से जुड़े जनहित के मुद्दों पर भेजे गए पत्रों का जवाब नहीं दे रहे थे। आरोप है कि जब एक बार दोनों के बीच बातचीत हुई तो अमित कटारिया ने उनसे कहा, “जो करना है कर लो।”

IAS अधिकारी के इस कथित जवाब से नाराज बृजमोहन अग्रवाल ने सीधे लोकसभा अध्यक्ष से शिकायत कर दी थी।
बृजमोहन अग्रवाल और विजय बघेल दोनों ही भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं। बृजमोहन अग्रवाल कई बार मंत्री रह चुके हैं और उन्हें भाजपा में संकटमोचक के रूप में भी जाना जाता है। लेकिन छत्तीसगढ़ की नौकरशाही के खिलाफ इन दोनों सांसदों की नाराजगी से यह सवाल उठ रहा है कि क्या प्रदेश सरकार ने नौकरशाहों के ऐसे कथित व्यवहार को लेकर कोई हिदायत नहीं दी है? हालांकि, इस संबंध में कई सरकारी सर्कुलर पहले से मौजूद हैं।










