कैबिनेट की बैठक के बाद PM मोदी से मिले गृह मंत्री अमित शाह, FCRA संशोधन बिल की तैयारी तेज, अगले हफ्ते शाह खुद पेश करेंगे बिल

FCRA

नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के तुरंत बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में संसद के आगामी सप्ताह की रणनीति और सरकार के महत्वपूर्ण विधायी एजेंडे पर चर्चा हुई। माना जा रहा है कि सरकार अगले सप्ताह लोकसभा में विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक (FCRA संशोधन विधेयक) पेश कर सकती है।

सूत्रों के अनुसार, इस विधेयक को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह स्वयं लोकसभा में पेश करेंगे। सरकार का कहना है कि संशोधन का उद्देश्य विदेशी चंदे के इस्तेमाल में अधिक पारदर्शिता लाना, निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को और प्रभावी बनाना है।

FCRA को लेकर प्रस्तावित संशोधन में एनजीओ, ट्रस्ट और अन्य संस्थाओं को मिलने वाले विदेशी चंदे की निगरानी को और कड़ा करने के प्रावधान शामिल किए जा सकते हैं। सरकार का मानना है कि विदेशी धन के उपयोग में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने की आवश्यकता है, ताकि किसी भी प्रकार के दुरुपयोग या राष्ट्रीय हितों के खिलाफ गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके।

सूत्रों के मुताबिक, प्रस्तावित संशोधन में एक महत्वपूर्ण प्रावधान यह भी है कि यदि किसी संस्था का एफसीआरए लाइसेंस रद्द हो जाता है या उसकी वैधता समाप्त हो जाती है, तो विदेशी चंदे से बनाई गई संपत्तियों के नियंत्रण, प्रबंधन और नियमन के लिए स्पष्ट कानूनी व्यवस्था की जाएगी। इससे ऐसी परिसंपत्तियों के भविष्य को लेकर बनी रहने वाली कानूनी अस्पष्टता दूर करने का प्रयास किया जाएगा।

सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की बैठक में संसद के आगामी सप्ताह की रणनीति पर भी विस्तार से चर्चा हुई। सरकार को उम्मीद है कि विपक्ष इस विधेयक को लेकर विरोध कर सकता है। ऐसे में संसद में संभावित गतिरोध और बहस से निपटने की रणनीति पर भी दोनों नेताओं के बीच विचार-विमर्श हुआ।

यदि सरकार अगले सप्ताह एफसीआरए संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश करती है, तो इसके राजनीतिक और कानूनी पहलुओं पर संसद में व्यापक चर्चा होने की संभावना है। विपक्ष जहां इस विधेयक के विभिन्न प्रावधानों पर सवाल उठा सकता है, वहीं सरकार इसे राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बता रही है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक विधेयक का अंतिम मसौदा सार्वजनिक नहीं किया गया है। ऐसे में इसकी विस्तृत धाराएं संसद में पेश किए जाने के बाद ही स्पष्ट होंगी।

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