लोकसभा से पास हुआ पेपर लीक संशोधन विधेयक, अपराधियों को 10 साल तक की कैद और 10 करोड़ रुपए तक जुर्माने का प्रावधान

Lok Sabha

नई दिल्ली। सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और परीक्षा माफिया पर शिकंजा कसने के उद्देश्य से लाया गया ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ बुधवार को Lok Sabha में ध्वनिमत से पारित हो गया।

मंगलवार को इस विधेयक पर करीब नौ घंटे तक चर्चा हुई थी, जबकि बुधवार को विपक्ष के नेता राहुल गांधी समेत कई सांसदों ने बहस में हिस्सा लिया। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक के बीच आखिरकार सदन ने विधेयक को मंजूरी दे दी।

केंद्र सरकार का कहना है कि संशोधित कानून का उद्देश्य परीक्षा माफिया पर प्रभावी कार्रवाई करना, जांच और ट्रायल की प्रक्रिया को समयबद्ध बनाना तथा छात्रों के भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

जितेंद्र सिंह बोले- छात्रों के भविष्य से कोई समझौता नहीं

विधेयक पेश करते हुए केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि हाल के घटनाक्रमों को देखते हुए सरकार ने 2024 के कानून को और प्रभावी बनाने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि 1992 और 2010 में परीक्षा सुधारों को लेकर कई सिफारिशें की गई थीं, लेकिन उन पर अमल नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि 2024 में पहली बार केंद्र सरकार ने सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों को रोकने के लिए व्यापक कानून बनाया था और अब उसे और मजबूत किया जा रहा है।

जितेंद्र सिंह ने कहा, ‘यह संशोधन छात्रों और युवाओं के हितों की रक्षा के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्पष्ट संकल्प है कि भारत के बच्चों के भविष्य से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।’ उन्होंने यह भी बताया कि राधाकृष्णन समिति की 40 सिफारिशों में से 35 पहले ही लागू की जा चुकी हैं।

क्या-क्या बदलेगा नए कानून में?

इस नए कानून से पेपर लीक और अनुचित साधनों के मामलों में अब कम से कम 5 वर्ष और अधिकतम 10 वर्ष तक की जेल तथा ₹50 लाख तक जुर्माने का प्रावधान होगा। संगठित अपराध (पेपर लीक माफिया, संगठित गिरोह आदि) में कम से कम 7 वर्ष और अधिकतम 10 वर्ष तक की जेल तथा 10 करोड़ रुपए तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है। जांच दो महीने के भीतर पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।

इसके अलावा चार्जशीट दाखिल होने के तीन महीने के भीतर ट्रायल पूरा करने का प्रावधान किया गया है और रोजाना सुनवाई पर जोर दिया गया है। राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित कर सकेंगे। जरूरत पड़ने पर केंद्र सरकार विशेष एसटीएफ (STF) गठित कर जांच करा सकेगी।

कानून में 15 प्रकार के अपराधों को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है, जिनमें पेपर लीक, OMR शीट से छेड़छाड़, फर्जी वेबसाइट, फर्जी एडमिट कार्ड और अन्य परीक्षा संबंधी धोखाधड़ी शामिल हैं। परीक्षा सुरक्षा के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन, परीक्षा केंद्रों का प्री-ऑडिट, स्क्रीनिंग, सुरक्षित प्रश्नपत्र प्रबंधन, इनविजिलेशन और परीक्षा के बाद की प्रक्रिया के लिए विस्तृत मानक तय किए जाएंगे।

सरकार का दावा है कि इन बदलावों से परीक्षा प्रणाली अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनेगी तथा संगठित परीक्षा माफिया पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा। विपक्ष ने हालांकि बहस के दौरान केवल कानून को सख्त बनाने के बजाय उसके प्रभावी क्रियान्वयन और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की जरूरत पर भी जोर दिया।

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