पैलेट गन के इस्तेमाल पर सीआरपीएफ ने शुरू की जांच, राहुल ने दोबारा लगाया आरोप

नई दिल्ली | दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारियों पर (Pellet gun) चलाए जाने के आरोपों पर सीआरपीएफ ने आंतरिक जांच शुरू कर दी है। गौरतलब है कि पुलिस द्वारा इस बात से इनकार करने के बीच कि उन्होंने 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी के संसद चलो मार्च में शामिल प्रदर्शनकारियों पर पेलेट गन का इस्तेमाल किया, लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने 24 जुलाई को 19 वर्षीय युवक को दिखाया जिसने पेलेट गन से चोटें झेलीं और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। राहुल ने आज भी प्रेस कांफ्रेंस करके आंदोलनकारियों पर पैलेट गन चलाए जाने का आरोप लगाया ।

राहुल गांधी ने इस आंदोलन में पैलेट गनके इस्तेमाल पर कहा,है कि मेरे भाई पर पेलेट गन चली जब वह तिरंगा हाथ में लेकर शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहा था।”फिर उन्होंने 19 वर्षीय साहिल लोचब की चोटें दिखाईं और कहा कि उनकी एक आंख की रोशनी चली गई है।

उन्होंने कहा, “ये हमारे भविष्य हैं। हजारों ऐसे प्रदर्शनकारियों पर उन्होंने पेलेट गन का इस्तेमाल किया है, उन्हें लाठियों से पीटा गया है। वे शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे थे क्योंकि उनके परीक्षा पेपर लीक हो गए थे। उसकी मां-बाप ने अपनी मेहनत की कमाई से उसे यह अवसर दिलाया था। सरकार को झूठ बोलना बंद करना होगा। सरकार ने हमारे भविष्य पर हमला किया है।”

राहुल गांधी ने कहा कि प्रदर्शनकारी छात्र केवल तीन चीजें मांग रहे हैं प्रधान का इस्तीफा, प्रदर्शनकारियों के साथ बर्बरता करने वालों के खिलाफ कार्रवाई और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की माफी।उन्होंने कहा, “धर्मेंद्र प्रधान आपराधिक शिक्षा मंत्री हैं। उन्हें हटना होगा। वे हमारी शिक्षा व्यवस्था के पतन का प्रतीक हैं।

उन्हें जाना होगा। मेरे भाई के गोली लगने का कारण वे हैं। वे (प्रधान) ही कारण हैं कि हजारों लोग सड़कों पर बाहर निकलकर प्रदर्शन कर रहे हैं।”दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया पर 20 जुलाई को अपने कर्मियों द्वारा पेलेट गन इस्तेमाल किए जाने के दावों का बार-बार ‘फैक्ट-चेक’ किया है और इस मामले पर रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों को भी जवाब दिया है।

हालांकि, इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान पेलेट गन इस्तेमाल का आरोप दिल्ली पुलिस पर नहीं बल्कि आरएएफ (रेपिड एक्शन फोर्स) पर लगाया जा रहा है—जो केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के अंतर्गत आती है और चल रहे प्रदर्शनों के दौरान बड़ी संख्या में तैनात की गई है।द हिंदू ने पहले रिपोर्ट किया था कि शुक्रवार को गांधी के साथ खड़े लोचब को पेलेट जैसी चोटें आईं। लोचब का 21 जुलाई को एम्स जयप्रकाश नारायण एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में ऑपरेशन हुआ और उनकी एक आंख की रोशनी जाने की संभावना है।डॉक्टरों ने उनके परिवार को बताया है कि उनकी दाहिनी आंख में दृष्टि लौटने की केवल “1% संभावना” है।यह सोमवार के प्रदर्शन में पेलेट गन जैसी चोटें झेलने वाला चौथा पुष्ट व्यक्ति है।

द वायर ने लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज (एलएचएमसी) में भर्ती एक अन्य मरीज शेख इरशाद मंसूरी के बारे में विस्तार से रिपोर्ट किया है, जिनके शरीर से पेलेट जैसे पदार्थों को निकालने के लिए सर्जरी हुई। द वायर ने पुष्टि की है कि इरशाद कहां घायल हुए—कनॉट प्लेस में अंडरग्राउंड पालिका बाजार के ऊपर—और उसी जगह और उसी समय आरएएफ जवान द्वारा पेलेट गन जैसी दिखने वाली बंदूक से उनके पेट पर फायरिंग का वीडियो भी मिला। सोशल मीडिया पर साझा किए जा रहे एक अन्य वीडियो में भी 20 जुलाई को उसी जगह पेलेट जैसी चोटों वाले दूसरे व्यक्ति को दिखाया गया है।

22 जुलाई को आउटलुक पत्रिका ने रिपोर्ट किया कि उसके एक रिपोर्टर पर ऐसी हथियार से फायरिंग की गई जो पेलेट फायर करने वाली बंदूक के विवरण से मेल खाती है। चोटें भी पेलेट लगने के बाद होने वाली चोटों से मेल खाती हैं।

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