पुणे। महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (MPSC) की परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हजारों अभ्यर्थियों के सामने अब सिर्फ नौकरी की चुनौती नहीं, बल्कि परीक्षा व्यवस्था पर भरोसे का सवाल भी खड़ा हो गया है। पेपर लीक के आरोपों के बाद एक परीक्षा रद्द कर दोबारा कराने की घोषणा से अभ्यर्थियों में नाराजगी है।
पुणे में महाराष्ट्र के अलग-अलग हिस्सों, खासकर मराठवाड़ा और विदर्भ से बड़ी संख्या में युवा सरकारी नौकरी की तैयारी करते हैं। छात्र संगठनों के अनुसार यहां करीब 70 हजार से एक लाख अभ्यर्थी MPSC परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। कई युवा वर्षों तक पढ़ाई करते हैं और किराए, भोजन व रीडिंग रूम पर हर महीने हजारों रुपये खर्च करते हैं।
एक 30 वर्षीय फार्मेसी स्नातक ने बताया कि ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा करीब 10 साल बाद आयोजित हुई थी। परीक्षा के बाद पेपर लीक की शिकायतें सामने आईं और अगस्त में आयोग ने परीक्षा रद्द कर दोबारा परीक्षा कराने का फैसला किया। उनका कहना है कि दोबारा परीक्षा का मतलब उनके लिए फिर महीनों की तैयारी है।
11 लाख आवेदन, करीब 6 हजार पद
आगामी ग्रुप-सी भर्ती में करीब 6 हजार पदों के लिए 11 लाख से ज्यादा आवेदन आए हैं। MPSC Students’ Rights संगठन के किरण निंभोरे के मुताबिक कई अभ्यर्थी सुबह से रात तक पढ़ाई करते हैं, लेकिन असफल होने के बाद उन्हें कैब चलाने, डिलीवरी या सुरक्षा जैसे काम करने पड़ते हैं।
Competitive Examination Students’ Association के अध्यक्ष महेश घरबुड़े के अनुसार एक अभ्यर्थी को किराए, भोजन और रीडिंग रूम समेत करीब 12 हजार रुपये महीने खर्च करने पड़ते हैं।
अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा में देरी, कम पद और पेपर लीक जैसी घटनाएं उनके वर्षों के समय और मेहनत पर असर डालती हैं। अब उनकी सबसे बड़ी मांग MPSC की विश्वसनीयता और परीक्षा व्यवस्था में भरोसा बहाल करने की है











