नई दिल्ली। हाई-टेंशन बिजली (Transmission towers)के मुआवजे को लेकर गुजरात में किसानों का संघर्ष अब बड़े किसान आंदोलन में बदल गया है। मोरबी से शुरू हुए प्रदर्शन अब दक्षिण गुजरात तक फैल गए हैं।किसान राज्य सरकार द्वारा निजी बिजली कंपनियों के लिए जारी की गई नई मुआवजा नीति को पूरी तरह अस्वीकार कर रहे हैं।
मुआवजा नीति में बदलाव की मांग
आंदोलन के तीसरे चरण को लेकर मंगलवार को लगभग 1,200 से 1,500 किसानों जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल थीं ने महेंद्रनगर चौकड़ी से मोरबी कलेक्टर कार्यालय तक मार्च निकाला। उन्होंने 4 जुलाई 2026 को जारी सरकारी मुआवजा नीति में बड़े बदलाव की मांग की।365 ग्राम पंचायतों द्वारा पारित प्रस्तावों को साथ लेकर प्रदर्शनकारियों ने कलेक्टर को विस्तृत मेमोरेंडम सौंपा। उन्होंने कहा कि मौजूदा मुआवजा फॉर्मूला खेती योग्य भूमि के स्थायी नुकसान और ट्रांसमिशन टावरों व कॉरिडोर के कारण कृषि उत्पादकता पर पड़ने वाले दीर्घकालिक प्रभाव को ध्यान में नहीं रखता।
हाल में ही घोषित हुई मुआवजा नीति
यह प्रदर्शन मोरबी के जेटपर गांव में शुरू हुए आंदोलन का नवीनतम चरण है, जहां किसानों ने निजी बिजली कंपनी द्वारा लगाए गए ट्रांसमिशन टावरों के लिए उचित और समय पर मुआवजे की मांग को लेकर शुरुआत की थी।इससे पहले आंदोलन में प्रतीकात्मक अनशन के बाद 19 दिनों का अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल हुआ, जिसके दबाव में सरकार को नई मुआवजा नीति घोषित करनी पड़ी।हालांकि नई अधिसूचना ने विवाद को खत्म करने के बजाय किसानों के और अधिक विरोध को जन्म दिया है, जो कहते हैं कि यह उनकी अपेक्षाओं से बहुत कम है।
400 फीसदी मुआवजे की मांग
किसान सरकारी सर्कुलर को अस्वीकार करते हुए तीन विकल्प देते हैं।आंदोलन के प्रमुख नेता नेहल अमरुतिया ने कहा कि कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में सरकारी अधिसूचना में संशोधन के लिए तीन वैकल्पिक प्रस्ताव हैं।पहला प्रस्ताव ट्रांसमिशन टावर बेस पर कब्जे वाली भूमि के लिए प्रचलित बाजार मूल्य का 400 फीसदी मुआवजा और ट्रांसमिशन कॉरिडोर के लिए 260 फीसदी मुआवजा के लिए है। किसानों का कहना है कि यह संरचना ग्रामीण, शहरी और नगरपालिका क्षेत्रों में एक समान लागू हो।
लाइसेंसिंग मॉडल अपनाने का प्रस्ताव
दूसरा प्रस्ताव 2013 के लैंड सेटलमेंट एक्ट के प्रावधानों के तहत मुआवजे की मांग है जिसमें टावर बेस और कॉरिडोर दोनों के लिए बाजार मूल्य का चार गुना मुआवजा मांगा जा रहा है।तीसरा प्रस्ताव एकमुश्त मुआवजे के बजाय लाइसेंसिंग मॉडल अपनाने का है।जिसमें किसान और बिजली कंपनी टावर स्थानों और कॉरिडोर के लिए लीज रेंट पर आपसी सहमति से फैसला करें और परियोजना की पूरी अवधि में मासिक या वार्षिक भुगतान किया जाए।
पूरे राज्य में आंदोलन की चेतावनी
अमरुतिया ने कहा कि ये तीनों विकल्प कलेक्टर के माध्यम से राज्य सरकार को भेज दिए गए हैं। अगर इनमें बदलाव नहीं किया गया तो किसान संगठनों से परामर्श कर पूरे गुजरात में आंदोलन फैलाया जाएगा।”नई नीति कृषि भूमि को हुए स्थायी नुकसान के लिए पर्याप्त मुआवजा नहीं देती। हमने सरकार को तीन व्यावहारिक विकल्प दिए हैं। अगर इन्हें नजरअंदाज किया गया तो आंदोलन जारी रहेगा और इसका आगे का रास्ता पूरे गुजरात के किसान सामूहिक रूप से तय करेंगे,” ।
मोरबी से आगे फैल रहा आंदोलन
मोरबी आंदोलन का केंद्र बिंदु बना हुआ है, लेकिन दक्षिण गुजरात में भी इसी तरह का आक्रोश उभर रहा है, खासकर सूरत जिले के ओलपड़ तालुका में, जहां कई हाई-टेंशन ट्रांसमिशन परियोजनाएं प्रस्तावित हैं।किसानों का आरोप है कि प्रस्तावित पावर ग्रिड नेटवर्क कई गांवों की उपजाऊ कृषि भूमि से गुजरेगा, जिससे खेती को अपूरणीय नुकसान होगा और उनकी भूमि की लंबी अवधि की कीमत घट जाएगी।
स्थानीय किसान संगठनों के अनुसार, पावर ग्रिड कंपनी की आठ प्रमुख ट्रांसमिशन लाइनें ओलपड़ तालुका से गुजरने वाली हैं, जिससे बड़े क्षेत्र की उत्पादक कृषि भूमि प्रभावित होने का भय है।इस बढ़ते आक्रोश ने कई गांवों में प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। प्रभावित भूमि मालिक सरकार पर औद्योगिक बुनियादी ढांचे को कृषि हितों से ऊपर रखने का आरोप लगा रहे हैं।सूरत के किसान मजबूत आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं
18 जुलाई को सूरत में बड़ा प्रदर्शन
प्रदर्शनरत किसानों को संबोधित करते हुए साउथ गुजरात किसान कम्युनिटी के अध्यक्ष रमेश पटेल ने राज्य भर के किसानों से एकजुट होकर आंदोलन की अपील की। उन्होंने कहा कि मौजूदा मुआवजा नीति निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाती है जबकि किसानों के अधिकारों की अनदेखी करती है।मौजूदा मुआवजा संरचना किसानों के लिए स्वीकार्य नहीं है।
कृषि भूमि को औद्योगिक बुनियादी ढांचे के लिए सस्ता संसाधन नहीं माना जा सकता। गुजरात के सभी किसानों को एकजुट होकर हर प्रभावित एकड़ के लिए उचित मुआवजा सुनिश्चित करना चाहिए।उन्होंने घोषणा की कि 18 जुलाई को सूरत जिले के कलेक्टर कार्यालय के बाहर बड़ा प्रदर्शन होगा, जिसमें Land Acquisition Act के अनुसार बाजार मूल्य का चार गुना मुआवजे की मांग की जाएगी।











