CAG रिपोर्ट विधानसभा में पेश: छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन की पोल खुली, 33% नल कनेक्शन बंद, सरकार ने कांग्रेस पर फोड़ा ठीकरा

CAG

रायपुर। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट छत्तीसगढ़ विधानसभा में मानसून सत्र के दूसरे पेश की गई। रिपोर्ट में जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

विधानसभा में मंगलवार को पेश की गई ‘छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन का प्रदर्शन ऑडिट’ रिपोर्ट में योजना निर्माण से लेकर क्रियान्वयन, निगरानी, जल गुणवत्ता और वित्तीय प्रबंधन तक कई बड़ी खामियां उजागर हुई हैं।

रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि दिसंबर 2023 में भाजपा सरकार बनने के बाद जल जीवन मिशन के कार्यों में तेजी आई है। इस गड़बड़ी को कांग्रेस की सरकार ने अंजाम दिया था।

मार्च 2024 तक की अवधि पर आधारित इस रिपोर्ट को वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने विधानसभा में पेश किया। रिपोर्ट सामने आने के बाद राज्य सरकार ने इसकी जिम्मेदारी पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर डाली, जबकि उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने दावा किया कि भाजपा सरकार बनने के बाद मिशन के कार्यों में तेजी आई है।

CAG रिपोर्ट के मुताबिक, जल जीवन मिशन की शुरुआत ही तय मानकों के अनुरूप नहीं हुई। गांव स्तर की कार्ययोजना तैयार किए बिना जिला कार्ययोजनाएं बना दी गईं। राज्य स्तर की समग्र कार्ययोजना तैयार ही नहीं की गई। इसके अलावा जल सुरक्षा योजना नहीं बनने से जल स्रोतों की दीर्घकालिक उपलब्धता और रखरखाव की स्पष्ट रणनीति नहीं बन सकी।

रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2025 तक 50 लाख ग्रामीण परिवारों को नल कनेक्शन देने का लक्ष्य था।

जनवरी 2025 तक 40.10 लाख फंक्शनल हाउसहोल्ड टैप कनेक्शन (FHTC) लगाए गए, लेकिन इनमें से 13.31 लाख यानी लगभग 33 प्रतिशत कनेक्शन गैर-कार्यशील पाए गए। इसके प्रमुख कारण बताए गए हैं, जिनमें जल स्रोतों का सूख जाना, ओवरहेड टंकियों का अधूरा निर्माण, बिजली कनेक्शन का अभाव और सोलर पंपों का स्थापित नहीं होना शामिल हैं।

रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार मिशन को खराब स्थिति में छोड़कर गई थी, जिसके कारण योजनाएं समय पर पूरी नहीं हो सकीं।

साव ने बताया कि केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन की अवधि 2024 से बढ़ाकर 2028 तक कर दी है। अब मार्च 2026 में स्वीकृत दूसरे चरण को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, ताकि हर ग्रामीण परिवार तक सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल पहुंचाया जा सके।

‘हर घर जल’ का लक्ष्य भी अधूरा

मार्च 2024 तक राज्य के सभी 19,656 गांवों को ‘हर घर जल’ प्रमाणित किया जाना था, लेकिन केवल 716 गांव, यानी 3.64 प्रतिशत गांव ही प्रमाणित हो सके।

ऑडिट में ऐसे मामले भी सामने आए, जहां अधूरे कार्यों के बावजूद गांवों को ‘हर घर जल’ प्रमाणित कर दिया गया।

CAG रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2024 तक राज्य के किसी भी 33 जिलों में 100 प्रतिशत नल जल कवरेज नहीं था। किसी भी 146 विकासखंडों में भी पूर्ण कवरेज नहीं मिली। धमतरी जिले में सबसे अधिक 98 प्रतिशत कवरेज दर्ज हुई। बलौदाबाजार में 76 प्रतिशत कवरेज रही। शेष 15 जिलों में यह आंकड़ा 56 से 74 प्रतिशत के बीच रहा।

रिपोर्ट के मुताबिक, 29,153 सिंगल विलेज योजनाओं में से मार्च 2024 तक केवल 172 योजनाएं पूरी हो सकीं। इनमें भी सिर्फ 32 ग्राम पंचायतों को योजनाएं हस्तांतरित की गईं। 70 मल्टी विलेज योजनाओं में से मार्च 2025 तक एक भी योजना पूरी नहीं हुई।

इसका असर लगभग 9.85 लाख ग्रामीण परिवारों तक सतही जल स्रोतों से पेयजल पहुंचाने के लक्ष्य पर पड़ा।

सोलर योजनाओं में भी गड़बड़ी

CAG ने पाया कि कई सोलर आधारित पेयजल योजनाओं में निर्धारित क्षमता से अधिक नल कनेक्शन जोड़ दिए गए। इसके कारण 28,984 परिवारों को निर्धारित मानकों के अनुसार पानी नहीं मिल पा रहा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य सरकार जल जीवन मिशन के लिए आवश्यक 6,480.04 करोड़ रुपये की व्यवस्था करने में विफल रही। इसमें केंद्र का 3,285.38 करोड़ रुपये हिस्सा और राज्य 3,194.66 करोड़ रुपये हिस्सा था।

इसके अलावा मनरेगा, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), जिला खनिज न्यास (DMF), सांसद निधि और CSR जैसी योजनाओं के साथ समन्वय की भी प्रभावी व्यवस्था नहीं बनाई गई।

रिपोर्ट के अनुसार, राज्य की 75 जल परीक्षण प्रयोगशालाओं में से केवल 4 प्रयोगशालाएं ही सभी 13 मानकों की जांच करने में सक्षम थीं। 37 प्रतिशत लैब को NABL की मान्यता प्राप्त नहीं थी। स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में भी निर्धारित मानकों के अनुसार जल गुणवत्ता की नियमित जांच नहीं हो रही थी।

रिपोर्ट में CAG ने सुझाव दिया है कि लंबित योजनाएं समयबद्ध तरीके से पूरी की जाएं। विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए। इसके अलावा ‘हर घर जल’ प्रमाणन प्रक्रिया की समीक्षा होने, NABL मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं की संख्या बढ़ाने, जल स्रोतों की दीर्घकालिक योजना बनाने के साथ ही संचालन और रखरखाव में सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने का भी सुझाव दिया है।

दानिश अनवर

दानिश अनवर, द लेंस में जर्नलिस्‍ट के तौर पर काम कर रहे हैं। उन्हें पत्रकारिता में करीब 14 वर्षों का अनुभव है। द लेंस से पहले दैनिक भास्‍कर में इन्‍वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग टीम में सीनियर रिपोर्टर, नवभारत में क्राइम रिपोर्टर, नईदुनिया में स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट और पत्रिका अखबार में रिपोर्टर के तौर पर 10 साल काम किया। इन सभी अखबारों में दानिश अनवर ने विभिन्न विषयों जैसे- क्राइम, पॉलिटिकल, एजुकेशन, स्‍पोर्ट्स, कल्‍चरल और स्‍पेशल इन्‍वेस्टिगेशन स्‍टोरीज कवर की हैं। दानिश को प्रिंट का अच्‍छा अनुभव है। वह सेंट्रल इंडिया के कई शहरों में काम कर चुके हैं।

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