Petrol and diesel: होर्मुज स्ट्रेट संकट के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बड़े फैसले ने वैश्विक तेल बाजार में हलचल मचा दी है। ट्रंप प्रशासन ने रूसी कच्चे तेल पर दी गई अस्थायी छूट को समाप्त कर दिया है। इससे भारत समेत कई देशों में पेट्रोल, डीजल और अन्य ईंधन के दाम बढ़ने की आशंका गहरा गई है।
क्या है पूरा मामला?
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका और यूरोपीय देशों ने रूसी तेल पर सख्त प्रतिबंध लगा रखे थे। लेकिन मार्च 2026 में ईरान संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ने के कारण वैश्विक स्तर पर तेल की सप्लाई प्रभावित हुई। इस कमी को पूरा करने के लिए ट्रंप सरकार ने मार्च में रूसी तेल पर अस्थायी छूट दी थी, जिसे बाद में 16 मई तक बढ़ाया गया था।अब यूरोपीय देशों के दबाव के बाद ट्रंप प्रशासन ने शनिवार को यह छूट खत्म कर दी है।
भारत पर क्या असर पड़ेगा?
भारत रूस से सस्ता तेल खरीदकर अपनी जरूरतें पूरी कर रहा था। होर्मुज संकट के दौरान मध्य पूर्व से तेल सप्लाई घटने के कारण भारत ने रूसी तेल का आयात काफी बढ़ा दिया था।मार्च 2026 में भारत ने रोजाना औसतन 4.5 मिलियन बैरल कच्चा तेल आयात किया, जिसमें करीब 50% रूस से आया। अप्रैल 2026 में भी रूस भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर रहा।
विशेषज्ञों का कहना है कि अब रूसी तेल महंगा होने और सप्लाई प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं। इसका सीधा असर भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ सकता है। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम 3 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ाए गए थे। नई बढ़ोतरी से आम लोगों और ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
क्यों बढ़ रहा है संकट?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के बड़े तेल निर्यात मार्गों में से एक है। ईरान के नए सिस्टम और क्षेत्रीय तनाव के कारण मध्य पूर्व से तेल सप्लाई पहले ही प्रभावित है। अब रूसी तेल पर छूट खत्म होने से वैश्विक बाजार में दबाव और बढ़ गया है। अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रहीं तो महंगाई बढ़ेगी। आम आदमी की रोजमर्रा की खर्च में इजाफा होगा, खासकर परिवहन और घरेलू ईंधन पर। फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई तत्काल बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन आने वाले दिनों में स्थिति पर निर्भर करेगा।









