रायपुर। पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणामों के बाद राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के बहुमत में आने के दावे के बीच तृणमूल कांग्रेस की ओर से ईवीएम और वीवीपैड मशीनों की विश्वसनीयता को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
तृणमूल कांग्रेस के अभिषेक बैनर्जी नेता ने आरोप लगाया है कि मतगणना के दौरान ईवीएम मशीनों के नंबरों में अंतर पाया गया, जिससे चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं।
इसी तरह के आरोपों को लेकर अब छत्तीसगढ़ का एक पुराना मामला भी दोबारा चर्चा में आ गया है, जहां 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान कांकेर सीट से कांग्रेस प्रत्याशी बिरेश ठाकुर ने भी ईवीएम और वीवीपैड मशीनों के नंबरों में गड़बड़ी का आरोप लगाया था। छत्तीसगढ़ के कांकेर लोकसभा सीट को लेकर चल रहे विवाद की पश्चिम बंगाल विवाद के साथ तुलना की जा रही है।
इस पर ‘द लेंस’ ने बिरेश ठाकुर से इस मामले में बात की और उनके लगाए आरोपों के तहत गड़बड़ी के पैटर्न को समझने की कोशिश की।
2024 के लोकसभा चुनाव में कांकेर सीट से चुनाव लड़ने वाले कांग्रेस प्रत्याशी बिरेश ठाकुर ने आरोप लगाया कि मतगणना प्रक्रिया के दौरान ईवीएम और वीवीपैड मशीनों के सीरियल नंबरों में विसंगति पाई गई थी।
उनका कहना है कि मतदान के बाद तैयार किए गए 17C फॉर्म में दर्ज मशीनों के नंबर और मतगणना के दौरान सामने आई मशीनों के नंबर कई जगह मेल नहीं खा रहे थे। इतना ही नहीं कई मशीनों की जांच के लिए चुनाव आयोग को फीस भी जमा कर दी गई, लेकिन जांच नहीं हुई। बड़ी संख्या में डाक मतपत्र रिजेक्ट किए गए।
‘मशीन नंबरों में अंतर’, लेकिन हाई कोर्ट का गड़बड़ी से इंकार
बिरेश ठाकुर का सबसे बड़ा आरोप यह है कि कई विधानसभा क्षेत्रों में 15 से 35 ईवीएम मशीनों के सीरियल नंबर में अंतर पाया गया। उनका दावा है कि यह अंतर केवल एक-दो नहीं, बल्कि कई बूथों पर देखने को मिला। इसी की रिकाउंटिंग के लिए यह फीस जमा की गई थी।
बिरेश कहते हैं कि जब मशीनों की सूची और 17C फॉर्म का मिलान किया गया, तो कई जगहों पर असंगति सामने आई। इसकी शिकायत की गई। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में सुनवाई हुई, लेकिन हाई कोर्ट के जज ने इसे गड़बड़ी का साक्ष्य नहीं माना।
यह मामला बिलासपुर हाईकोर्ट में भी पहुंचा, जहां बिरेश ठाकुर ने पांच प्रमुख बिंदुओं पर याचिका दायर की थी। इनमें ईवीएम, वीवीपैड और 17C फॉर्म के मिलान से जुड़े मुद्दे शामिल थे।
याचिकाकर्ता का कहना है कि उनके पास दस्तावेजी प्रमाण मौजूद हैं, लेकिन उन्हें पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा है।
दरअसल, बिरेश ठाकुर ने जिन गड़बड़ियों की शिकायत की थी, उसी तरह की गड़बड़ी की शिकायत अभिषेक बैनर्जी ने पश्चिम बंगाल में की है।
दोनों मामलों पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ में विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि शिकायतों के बावजूद समय पर कार्रवाई नहीं हुई और मामलों का निपटारा लंबित है। हालांकि, चुनाव आयोग पहले भी ईवीएम प्रणाली को सुरक्षित और छेड़छाड़-रहित बताते हुए इन तरह के आरोपों को खारिज करता रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद भी अब तक जांच नहीं
बिरेश ठाकुर ने यह भी दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत उन्होंने चार बूथ की EVM मशीनों की जांच के लिए निर्धारित शुल्क लगभग 1 लाख 88 हजार रुपए जमा किया था। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया के तहत मशीनों की स्वतंत्र जांच की मांग की गई थी, लेकिन अब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं हुई।
वे बताते हैं कि निर्धारित नियमों के तहत एक महीने के भीतर जांच होनी चाहिए थी, लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद भी कोई जांच नहीं हुई।
बिरेश ठाकुर कहते हैं कि उन्हें 4 बूथ के मशीनों की जांच और दो मशीनों की गणना कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने शुल्क जमा कर जांच कराने के निर्देश दिए।
निर्देश के तहत उन्होंने गुंडरदेही में रानीतराई, बालोद के रेवती नवागांव, साल्हेटोला और सिहावा के दरगहन बूथ के बैलेट यूनिट, कंट्रोल यूनिट और वीवी पैट यूनिट की जांच कराने का आवेदन किया। आवेदन के बाद फीस जमा की, लेकिन अब तक जांच नहीं हुई।
13 सौ से ज्यादा डाकमत्र रिजेक्ट, फौरन आपत्ति लेकिन सुनवाई नहीं
बिरेश ठाकुर कहते हैं कि मतगणना के दौरान डाक मतपत्रों की गिनती में भी अनियमितता की गई।
कांग्रेस प्रत्याशी ने कहा कि करीब 13 सौ से ज्यादा डाकमत्र रिजेक्ट किए गए। बड़ी संख्या में डाक मतपत्र रिजेक्ट किए जाने और नोटा वोटों में गड़बड़ी करने की आपत्ति फौरन दर्ज की गई, सुनवाई नहीं हुई।
बिरेश ठाकुर ने इस पूरे मामले की शिकायत सबसे पहले रिटर्निंग ऑफिसर, फिर जिला निर्वाचन अधिकारी और फिर राज्य चुनाव आयोग तक की, लेकिन कहीं से उन्हें राहत नहीं मिली।
बिरेश सबसे ज्यादा हैरानी इस बात पर जता रहे हैं कि उनकी याचिका को गलत बताते हुए भाजपा प्रत्याशी और सांसद भोजराम नाग ने भी याचिका लगाई, लेकिन उनकी याचिका खारिज हो गई। इसके बाद एक महीने के भीतर उसकी अपील करनी थी, लेकिन उन्होंने अपील नहीं की। इसके बाद भी उनकी याचिका पर तेजी से कोई सुनवाई नहीं हुई।
उन्होंने कहा कि जब भाजपा प्रत्याशी की याचिका खारिज कर दी गई है, इसका मतलब है कि उनकी याचिका सही है।
बिरेश ठाकुर की पांच बिंदू की शिकायतों में एक बिंदू को हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है, जबकि शेष मामलों की सुनवाई आगामी 15 जून को निर्धारित की गई है।
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