नई दिल्ली। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को एक वीडियो जारी कर कहा कि चाहे उनके खिलाफ एफआईआर हो, मुकदमा चलाया जाए या विशेषाधिकार प्रस्ताव लाया जाए, वे किसानों के हक के लिए संघर्ष जारी रखेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि उन्होंने संसद में सच्चाई ही रखी है। राहुल गांधी का यह वीडियो तब आया है जब भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने उनकी सदस्यता और आजीवन चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराए जाने का नोटिस लोकसभा स्पीकर को सौंपा है।
जारी वीडियो संदेश में राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश और खासकर किसानों को धोखा दिया है। वे बोले, “आप मेरे खिलाफ मुकदमे कर सकते हैं, गालियां दे सकते हैं, जो मन करे वो कर सकते हैं। विशेषाधिकार प्रस्ताव भी ला सकते हैं, लेकिन इससे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। मैंने संसद में सच बोला है। अगर आपको यह बात बुरी लगती है तो वह आपकी समस्या है, लेकिन देश सच को अच्छी तरह समझ सकता है। चाहे जो करें, मैं किसानों के कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा हूं और एक कदम भी पीछे नहीं हटूंगा। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पूरी कांग्रेस और मैं हम सब किसानों के साथ हैं। हम इस अन्याय को बर्दाश्त नहीं करेंगे।”
‘किसान भारत की रीढ़ हैं’
वीडियो में उन्होंने आगे कहा कि किसान भारत की रीढ़ हैं और देश की खाद्य सुरक्षा इन्हीं पर टिकी हुई है। कांग्रेस ने हमेशा खाद्य सुरक्षा के लिए लड़ाई लड़ी है, लेकिन मोदी सरकार ने किसानों और खाद्य सुरक्षा को ठेंगा दिखाया है। अमेरिका के साथ हुए समझौते से कपास, सोयाबीन, सेब और अन्य फलों के किसानों को नुकसान पहुंचाया गया है। सालों से विदेशी ताकतें भारत के कृषि बाजार पर कब्जा करने की फिराक में थीं, और मोदी ने उनके लिए रास्ता साफ कर दिया। यह हकीकत है, जिसे वे भी जानते हैं और मैं भी। ऐसा उन्होंने इसलिए किया क्योंकि उन पर दबाव है डोनाल्ड ट्रंप ने उनकी कमान संभाल रखी है।
‘दोस्तों के लिए लिए पूरे कृषि बाजार खोल देंगे मोदी’
राहुल गांधी ने चेतावनी दी कि मक्का, कपास, सोयाबीन और फल सिर्फ शुरुआत हैं। मोदी सरकार जल्द ही अपने खास दोस्तों जैसे अडानी-अंबानी और विदेशी शक्तियों के लिए पूरे कृषि बाजार के दरवाजे खोल देगी। पूरे देश और किसानों को पता है कि मोदी किसान-विरोधी हैं। वे सिर्फ अपने करीबियों का भला करते हैं। अमेरिकी किसानों के पास विशाल खेत हैं और उन्हें भारी सरकारी मदद मिलती है, जबकि हमारे किसान छोटे-छोटे टुकड़ों पर काम करते हैं, उन्हें उचित समर्थन नहीं मिलता। यहां एमएसपी जैसी कोई गारंटी नहीं, मशीनीकरण की कोई बात नहीं।











