हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय में महिला प्रोफेसर पर उत्पीड़न के आरोप, तीन संगठनों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री और आयोगों को सौंपा ज्ञापन

देहरादून। उत्तराखंड के हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय (HNBGU), श्रीनगर में एक महिला सहायक प्रोफेसर डॉ. अमिता के साथ मानसिक उत्पीड़न, प्रशासनिक प्रताड़ना और POSH एक्ट (यौन उत्पीड़न निवारण कानून) के कथित उल्लंघन के गंभीर आरोप लगे हैं। क्रांतिकारी सांस्कृतिक मंच (RCF), अखिल भारतीय क्रांतिकारी महिला संगठन (AIRWO) और अखिल भारतीय क्रांतिकारी विद्यार्थी संगठन (AIRSO) ने इस मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री, राष्ट्रीय महिला आयोग, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC), राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग और राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग को विस्तृत ज्ञापन सौंपा है।

प्रोफेसर डॉ. अमिता एक लेखिका और शिक्षिका हैं। वे पहले छत्तीसगढ़ के बिलासपुर केंद्रीय विश्वविद्यालय में कार्यरत थीं। सितंबर 2024 में उन्होंने हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार केंद्र (Centre for Journalism and Mass Communication) में Associate Professor के पद पर जॉइन किया।

संगठनों के अनुसार, डॉ. अमिता सितंबर 2024 से लगातार मानसिक उत्पीड़न, अपमान और प्रशासनिक दबाव का सामना कर रही हैं। मुख्य आरोप विभाग के तत्कालीन निदेशक डॉ. सुधांशु जायसवाल पर हैं। संगठनों का कहना है कि डॉ. जायसवाल और कुछ अन्य लोगों ने मिलकर ऐसा माहौल बनाया जिसमें डॉ. अमिता को लगातार मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है। जो भी शिक्षक या कर्मचारी डॉ. अमिता का साथ देते थे उन्हें नौकरी से निकालने की धमकियाँ दी जाती थीं। एक महिला कैमरा पर्सन के साथ अभद्र व्यवहार और उन्हें सीढ़ियों से धक्का देने की भी घटना बताई गई है। शिकायत करने पर उल्टा डॉ. अमिता को ही और परेशान किया जा रहा है।

विभाग में कार्यरत एक महिला सहायक प्रोफेसर (जो गर्भवती हैं और डॉ. सुधांशु जायसवाल के करीबी बताई जाती हैं) उन्होंने डॉ. अमिता पर आरोप लगाया कि उन्होंने उनकी प्रेग्नेंसी की चर्चा की। इस शिकायत को Internal Complaints Committee (ICC) में भेज दिया गया। संगठन इसे POSH एक्ट का दुरुपयोग बताते हैं और कहते हैं कि यह डॉ. अमिता को प्रताड़ित करने की एक रणनीति है।

क्रांतिकारी सांस्कृतिक मंच (RCF), अखिल भारतीय क्रांतिकारी महिला संगठन (AIRWO) और अखिल भारतीय क्रांतिकारी विद्यार्थी संगठन (AIRSO) तीनों संगठनों ने ज्ञापन में कहा कि यह मामला केवल एक महिला शिक्षिका की व्यक्तिगत समस्या नहीं है। यह उच्च शिक्षा संस्थानों में महिलाओं की सुरक्षा, शिकायत करने वाले व्यक्तियों को मिलने वाली प्रताड़ना और संस्थागत जवाबदेही का बड़ा सवाल उठाता है।

उन्होंने मुख्य मांगें रखी हैं –

पूरे मामले की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराई जाए।
दोषी अधिकारियों और उन्हें संरक्षण देने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो।
विश्वविद्यालय में POSH एक्ट और ICC की कार्यप्रणाली की स्वतंत्र समीक्षा हो।
पीड़ित डॉ. अमिता को सुरक्षित और सम्मानजनक कार्य वातावरण उपलब्ध कराया जाए।
भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मंत्रालय स्तर पर सख्त निगरानी रखी जाए।

संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों में महिलाएं सुरक्षित महसूस नहीं करेंगी और शिकायत करने पर उन्हें ही सजा मिलेगी तो यह पूरे शिक्षा तंत्र और संवैधानिक मूल्यों की हार होगी।

पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 6 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, हेल्थ, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

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