नई दिल्ली। नेशनल पीपुल्स कमिटी मणिपुर (NPCM) द्वारा 19 अक्टूबर की मध्यरात्रि से बुलाए गए 48 घंटे के राज्यव्यापी बंद ने मणिपुर भर में सामान्य जीवन को गंभीर रूप से बाधित कर दिया है। यह बंद खोंगबल तांगखुल क्षेत्र में हुए हमले के लिए जिम्मेदार सशस्त्र समूहों के खिलाफ निर्णायक सुरक्षा कार्रवाई की मांग कर रहा है, जिसमें तीन मैतेई (Meitei citizens)लोगों की मौत हुई और कई अन्य घायल हुए।
बंद ने पहाड़ी और घाटी दोनों जिलों को प्रभावित किया, और सरकार द्वारा समिति की मांगों को संबोधित करने के लिए विश्वसनीय कदम उठाने तक विरोध प्रदर्शन जारी रहे। स्वास्थ्य सेवाओं, धार्मिक गतिविधियों और कुछ आवश्यक सेवाओं को बंद से छूट दी गई थी।
दुकानें, बाजार, व्यावसायिक प्रतिष्ठान, बैंक, निजी कार्यालय और शैक्षणिक संस्थान—जिनमें स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय शामिल हैं बंद रहे। पुलिस और सरकारी वाहनों को छोड़कर सार्वजनिक और निजी परिवहन सेवाएं निलंबित रहीं। मनोरंजन स्थल और अन्य वाणिज्यिक गतिविधियां पूरी तरह ठप हो गईं, और सरकारी कार्यालय न्यूनतम उपस्थिति के साथ संचालित हुए।
घाटी और पहाड़ी दोनों जिलों में प्रमुख सड़कें सुनसान रहीं, केवल आवश्यक सेवा वाहन ही आवाजाही करते देखे गए। प्रदर्शनकारियों ने सड़कों के बीच में लकड़ी के लट्ठे रख दिए, और महिला प्रदर्शनकारियों ने सड़कों के किनारे बैठकर रास्ता रोक दिया।
अंतरराज्यीय सड़क परिवहन निलंबित हो गया, जिससे मणिपुर और भारत के अन्य हिस्सों के बीच कनेक्टिविटी प्रभावित हुई। हालांकि, एयरलाइन सेवाएं सामान्य रूप से चलती रहीं। चिकित्सा आपात स्थितियां, अग्निशमन सेवाएं, जल आपूर्ति, मीडिया संचालन और धार्मिक कार्य जैसे आवश्यक सेवाओं को बंद से छूट दी गई थी।
बंद का प्रभाव पहाड़ी जिलों की तुलना में घाटी क्षेत्रों में अधिक महत्वपूर्ण बताया गया, जबकि सरकार से कार्रवाई की मांग में विरोध प्रदर्शन जारी है
तीन मौतेई नागरिकों की हत्या के बाद मणिपुर में भारी तनाव
🗓️ Published: October 21, 2026 12:53 pm | 🔄 Updated: October 21, 2026 1:17 pm











