नई दिल्ली। आज सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में दिल्ली प्रोटेस्ट और SIR संबंधित याचिकाओं की सुनवाई में होने वाली बहस सुनने लायक़ थी। बाहर मौसम बदली का था भीतर शोरगुल भरा। ऐसे दृश्य कम देखने को मिलते हैं। जस्टिस श्रीमान बागची जी की बार बार याचिकाकर्ताओं के वकीलों पे आक्रामक होने की मंशा ने कोर्ट रूम के ताप को बढ़ा के रखा।
जैसे ही उन्होंने जंतर मन्त्र की जगह और किसी ग्राउंड को अलॉट करने की मंशा जतायी कोर्ट रूम सभी वकीलों की एक स्वर “नो माइलॉर्ड“ से गूंज गया और ऐसा कई बार हुआ।
सीजेआई के तमाम रक्षात्मक कोशिशों के बाद भी सीनियर वकील कपिल सिब्बल, गोपाल सुब्रमण्यम स्वामी, इंदिरा जयसिंह ने चुनाव में पारदर्शिता, प्रोटेस्ट में हुए पुलिसिया हिंसा व जंतर मंतर तक आंदोलनकारियों को पहुँचने देने को लेकर जमकर बहस की।
वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने इस उम्र में भी जोरदार आवाज में बहस की जब वो बहस कर रही थी सभी मंत्रमुग्ध होकर उनको सुन रहे थे। वो लगातार महिला पत्रकारों की बात कर रही थी। यह उनके आवाज का ओज था कि विपक्षी वकील गौरव भाटिया भी उसके जवाब में कुछ न कह पाए और उनकी तमाम दलीलें पीछे छूट गई।
कोर्ट परिसर में बड़े पैमाने पर युवा वकीलों का आज जमावड़ा लगा था। इस शोरगुल में कई बार दोनों जजों को लोगों को शांत रहने को कहना लड़ा। जब अधिवक्ता हरिहरन ने वकीलों को लगी चोट बात कही नेपथ्य से आवाज आने लगी कि वकीलों के साथ अच्छा व्यवहार नहीं हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट में राहुल गांधी एवं अन्य विपक्षी नेताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े मुद्दे उठाए। आज कोर्ट उनको भी बहुत ध्यान से सुन रहा था। उनकी दलीलों पर सहमति दर्ज करा रहा था।
उन्होंने फॉर्म 6 और फॉर्म 7 के इस्तेमाल से जुड़े मुद्दे भी उठाए फॉर्म 6 मतदाता सूची में नाम शामिल कराने तथा फॉर्म 7 किसी नाम को शामिल करने पर आपत्ति या नाम हटाने का अनुरोध करने से संबंधित है।
सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने मामले में नोटिस जारी करने का अनुरोध किया। उनकी मांग तुरंत स्वीकार कर लो गई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने निर्वाचन आयोग, मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों को नोटिस जारी किया तथा याचिका को SIR से संबंधित लंबित मामलों के साथ जोड़ने का निर्देश दिया।

वकील, सुप्रीम कोर्ट










