सुप्रीम कोर्ट द्वारा छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जजों पर तल्ख़ टिप्पणी, बताया दयनीय

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट पर कड़ी टिप्पणी की और सवाल उठाया कि अगर जजों को क्रिमिनल लॉ के बुनियादी सिद्धांत ही नहीं समझ आते, तो वे सबूतों का सही मूल्यांकन कैसे कर सकते हैं।

न्यूज वेबसाइट बार एंड बेंच के अनुसार न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की बेंच ने नवंबर 2024 के छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए ये टिप्पणियां कीं।हाई कोर्ट के आदेश में एक व्यक्ति की हत्या की सजा को रद्द कर उसे अनजाने में की गई हत्या का दोषी ठहराया गया था और उम्रकैद की जगह 10 साल की सजा सुनाई गई थी।

कोर्ट ने कहा:“बस हाई कोर्ट की दयनीय हालत देखिए। जजों को पता ही नहीं कि IPC की धारा 304 पार्ट एक जिसमें मौत का इरादा या जानलेवा चोट पहुंचाने का इरादा हो और धारा 304 पार्ट दो जिसमें आरोपी जानता है कि इस काम से मौत हो सकती है लेकिन इरादा नहीं क्या है! और आप उम्मीद करते हैं कि ये जज सबूतों का सही मूल्यांकन करेंगे!”

बेंच ने आगे कहा कि हाई कोर्ट बार-बार बेसिक कानूनी सिद्धांतों को समझने में नाकाम रहा है।“यह पहला फैसला नहीं है जिस पर हम आ रहे हैं। ये सभी सिद्धांत कानून के स्कूलों में पहले साल में पढ़ाए जाते हैं।मामला फरवरी 2021 में एक महिला की मौत से जुड़ा था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी उसके घर उसके बेटे को ढूंढने आया और महिला को खून के गड्ढे में पड़ा पाया गया। मरने से पहले उसने अपने पति को बताया कि आरोपी ने उस पर हमला किया।

पोस्टमार्टम में सिर और चेहरे पर चोटें पाई गईं और मौत का कारण सिर की चोट बताई गई।ट्रायल कोर्ट ने सितंबर 2022 में आरोपी को IPC की धारा 302 (हत्या) के तहत दोषी ठहराया और उम्रकैद की सजा सुनाई।
इसके बाद नवंबर 2024 में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की बेंच तब के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रजनी दुबे ने सजा को धारा 304 पार्ट II में बदल दिया। कोर्ट ने माना कि हमला अचानक झगड़े के दौरान हुआ और आरोपी का इरादा महिला को मारने का नहीं था, इसलिए 10 साल की सजा दी।अब आरोपी सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है।सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि उसने अपराध की परिस्थितियों की सही जांच नहीं की।

अपने आदेश में कोर्ट ने लिखा:“हाई कोर्ट ने हमेशा की तरह बहुत लापरवाही से और कानून की समझ के बिना अपील को आंशिक रूप से स्वीकार कर धारा 302 को धारा 304 पार्ट II में बदल दिया। लगता है हाई कोर्ट ने चोटों की प्रकृति, इस्तेमाल किए गए हथियार और घटना की उत्पत्ति को नजरअंदाज कर दिया।”
बेंच ने आरोपी से जवाब मांगा कि हाई कोर्ट का फैसला क्यों न रद्द किया जाए।“आरोपी को नोटिस जारी किया जाए और उससे पूछा जाए कि हाई कोर्ट का आदेश क्यों न रद्द किया जाए और उसे हत्या का दोषी मानने वाला फैसला क्यों न बहाल किया जाए। हम मामले के मेरिट्स के आधार पर इस हिस्से पर फिर विचार करेंगे।”कोर्ट ने छत्तीसगढ़ राज्य से भी जवाब मांगा है।

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