बिलासपुर का एक डेंटल कॉलेज चर्चा में क्यों है? यह कैसा इंस्पेक्शन?

लेंस रिपोर्ट, बिलासपुर। Bilaspur का एक डेंटल कॉलेज इन दिनों चर्चा में है। सोशल मीडिया में किसी तथाकथित इंस्पेक्शन की खबरें हैं। यूनिवर्सिटी से किसी जांच टीम के आने से पहले भारी तैयारियां चल रही हैं। डीन ने सभी स्टूडेंट्स को एक खास दिन हाजिर रहने का निर्देश दिया है। ज्यादातर स्टूडेंट्स आम तौर पर अनुपस्थित रहते हैं। फर्जी फैकेल्टी, फर्जी स्टाफ के बूते कॉलेज चल रहा है। स्टूडेंट्स के बीच चर्चा है कि पहले से जानकारी मिलने के कारण टीम के सामने हर व्यवस्था दिखा दी जाएगी।

सोशल मीडिया में एक स्टूडेंट ने लिखा कि यह इंस्पेक्शन ड्रामा अब तो हर गली-मोहल्ले वाले कॉलेज का बिजनेस मॉडल बन चुका है। सामान्य दिनों में कॉलेज जाओ तो भूत बंगला लगता है। क्लासरूम में ताले, लै में धूल। टीचर और स्टाफ नदारद। स्टूडेंट? वो तो नाम के ही हैं। कोई दिल्ली में UPSC की कोचिंग कर रहा है। कोई घर बैठे कोडिंग सीख रहा है। कोई नौकरी बजा रहा है। कॉलेज बस फीस की रसीद और डिग्री के लिए चाहिए।

लेकिन जब इंस्पेक्शन का दिन आता है, तो एक दिन पहले रात को पूरा कॉलेज जाग जाता है। मैसेज फॉरवर्ड होते हैं – “बुधवार पंद्रह तारीख सुबह 9 बजे फॉर्मल में आना, 500 रुपये + फुल अटेंडेंस मिलेगी।” सुबह होते-होते कॉलेज हाउसफुल। किराए के स्टूडेंट बेंच भर देते हैं। प्रोफेसर जो साल भर दिखे नहीं, वो अचानक न्यूटन का लॉ समझाने लगते हैं।

लाइब्रेरियन नई किताबों की सील तोड़ता है। प्रिंसिपल साहब टाई लगाकर लैब दिखाते हैं जिसकी मशीनें दो साल से चालू ही नहीं हुईं। इंस्पेक्टर आते हैं। रजिस्टर चेक करते हैं – वाह, 90% अटेंडेंस। प्रोजेक्ट देखते हैं – वाह, इनोवेशन। फोटो खिंचती है, रिपोर्ट में “एक्सीलेंट” लिखा जाता है, और सब निकल लेते हैं।

एक अन्य स्टूडेंट के अनुसार सरकार को मान्यता देने के लिए मोटी फाइल चाहिए। बिल्डिंग है? हाँ। टीचर की लिस्ट है? हाँ। स्टूडेंट एनरोल्ड हैं? हाँ। बस। कोई ये नहीं पूछता कि पढ़ाई होती है या नहीं। कुछ स्टूडेंट को भी डिग्री चाहिए बिना कॉलेज गए। कॉलेज को फीस चाहिए बिना पढ़ाए। इंस्पेक्टर को लिफाफा और इज्जत चाहिए बिना जांचे।

फिलहाल सबकी निगाहें एक तथाकथित इंस्पेक्शन टीम पर टिकी हैं।

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