रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग ने एक महत्वपूर्ण मामले में सनसनीखेज खुलासा किया है। आयोग की जांच में पता चला कि जिस मामले को पुलिस ने आत्महत्या बताया था वह दरअसल हत्या (murder) का मामला है। आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक की अध्यक्षता में आज जनसुनवाई के दौरान एक मामले में फॉरेंसिक एक्सपर्ट डॉ. सुनंदा की रिपोर्ट पेश की गई।
रिपोर्ट में साफ हुआ कि मां और उसकी 6 वर्षीय बेटी की मौत आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या थी। आवेदिका ने अपनी बहन और भांजी की हत्या की शिकायत की थी। पुलिस ने दोनों की मौत को पेड़ की डाल से रस्सी से लटके होने के आधार पर आत्महत्या बताया था, जबकि दोनों के पैर जमीन पर टिके हुए थे। आयोग ने इस मामले में सभी आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की है।
बच्ची को मिलेगा माता-पिता का प्यार
एक अन्य मामले में आयोग की काउंसलिंग से अच्छा नतीजा निकला। दो साल से अलग रह रहे पति-पत्नी आयोग की समझाइश के बाद फिर साथ रहने को तैयार हो गए। उनकी डेढ़ साल की बेटी को अब मां-बाप दोनों का प्यार मिल सकेगा। पति आईडीएफसी बैंक दुर्ग में कार्यरत हैं। दोनों पक्ष दुर्ग में साथ रहने पर सहमत हो गए जिसके बाद प्रकरण बंद कर दिया गया।

दो सरकारी कर्मचारियों पर बड़ी कार्रवाई की सिफारिश
आयोग ने एक बड़े मामले में दो सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की है। एक व्यक्ति ने अपनी पहली पत्नी के साथ तलाक लिए बिना दूसरी शादी कर ली और उससे एक बेटी भी है। दोनों ही सरकारी सेवा में कार्यरत हैं। आयोग ने स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखकर दोनों कर्मचारियों के निलंबन की अनुशंसा की है।
एक अन्य मामले में आवेदिका को 5 एकड़ जमीन और बेटी के नाम पर 65 लाख रुपये का बीमा मिल चुका है। आयोग ने इस मामले को भी बंद कर दिया।आयोग की बैठक में कुल 395 मामले सुनाए गए, जिनमें रायपुर जिले के 184 मामले शामिल थे।











