नई दिल्ली। दिल्ली शराब नीति मामले में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा (Justice Swarana Kanta Sharma) को हटाने की मांग वाली याचिका खारिज होने के बाद अरविंद केजरीवाल ने इस पर कोई भी टिप्पणी करने से फिलहाल इनकार कर दिया है।
आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को चेन्नई में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि वह तमिलनाडु में व्यस्त कार्यक्रम के चलते वे अभी अदालत का आदेश नहीं पढ़ पाए हैं।
वह तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के समर्थन में प्रचार कर रहे हैं।
केजरीवाल ने याचिका में आरोप लगाया था कि जज के बच्चों की केंद्र सरकार के वकील के रूप में नियुक्ति हितों के टकराव की स्थिति पैदा करती है और इससे निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं।
हालांकि, जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने मामले की सुनवाई से खुद को अलग करने से साफ इनकार कर दिया था। उन्होंने कहा कि एक न्यायाधीश के रूप में उनकी शपथ उन्हें निष्पक्ष रहकर निर्णय लेने के लिए बाध्य करती है और वे किसी भी दबाव में नहीं आएंगी। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायाधीशों पर व्यक्तिगत आरोप दरअसल पूरी न्यायपालिका पर हमला होते हैं, जिसका असर लंबे समय तक रहता है।
जस्टिस शर्मा ने इस स्थिति को दुविधापूर्ण बताते हुए कहा कि अगर वे खुद को मामले से अलग करती हैं तो इससे यह संदेश जाएगा कि आरोप सही थे, जबकि अलग न होने पर भविष्य में किसी भी फैसले को पक्षपातपूर्ण कहा जा सकता है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि इस तरह के आधार पर जज हटने लगें, तो इससे राजनेताओं को अपनी पसंद की अदालत चुनने का रास्ता मिल सकता है।
इसी बीच दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में आगे की सुनवाई के लिए 29 और 30 अप्रैल के साथ-साथ मई के पहले सप्ताह की तारीखें तय की हैं, जिनमें शराब नीति मामले में आरोप-मुक्ति के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर बहस होगी।









