अमेरिका-ईरान के बीच पाकिस्तान में फिर शुरू हो सकती है बातचीत

April 25, 2026 11:21 AM

US-Iran talks: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को कम करने के प्रयासों में पाकिस्तान एक बार फिर मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची शुक्रवार रात इस्लामाबाद पहुंच गए हैं। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और दामाद जेरेड कुशनर को पाकिस्तान भेजने का फैसला किया है। दोनों आज शनिवार को इस्लामाबाद पहुंचने वाले हैं। पहले दौर की बातचीत अप्रैल के 11-12 तारीख को इस्लामाबाद में हुई थी, जो 21 घंटे तक चली लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। अब दूसरे दौर की कोशिश हो रही है ।

ईरान की तरफ से साफ इनकार

ईरानी विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट कहा है कि अब्बास अराघची का दौरा द्विपक्षीय मुद्दों पर पाकिस्तान के साथ चर्चा के लिए है। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल से उनकी कोई सीधी बैठक तय नहीं है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ईरान अपने विचार पाकिस्तान के अधिकारियों के जरिए अमेरिका तक पहुंचाएगा। यानी अगर बातचीत होती भी है तो आमने-सामने नहीं, बल्कि पाकिस्तान के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के बयान में भी अमेरिका-ईरान बैठक का कोई जिक्र नहीं किया गया है।

अमेरिकी पक्ष की तैयारी

व्हाइट हाउस ने कहा है कि अमेरिकी डेलिगेशन पाकिस्तान में ईरान के साथ शांति वार्ता करेगा। राष्ट्रपति ट्रंप ने रॉयटर्स को बताया कि ईरान की तरफ से एक ऑफर आया है हालांकि उन्हें इसकी पूरी डिटेल नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि वे उन लोगों से बात कर रहे हैं जो अभी सत्ता में हैं। ट्रंप ने यह भी बताया कि अगले हफ्ते ब्रिटेन के किंग चार्ल्स के अमेरिका दौरे के दौरान ईरान मुद्दे पर चर्चा करेंगे। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को इस बार स्टैंडबाय पर रखा गया है। जरूरत पड़ने पर वे इस्लामाबाद जा सकते हैं। पहली बार की बातचीत में वे प्रमुख भूमिका में थे।

पहले दौर की बातचीत क्यों नाकाम रही?

पहले दौर में मुख्य मुद्दे थे:
होर्मुज स्ट्रेट: अमेरिका चाहता है कि यहां जहाजों की आवाजाही पूरी तरह खुली और सुरक्षित रहे, ताकि तेल की सप्लाई बाधित न हो। ईरान इस इलाके पर अपना प्रभाव बनाए रखना चाहता है।
परमाणु कार्यक्रम: अमेरिका ईरान से अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम को सीमित करने की मांग कर रहा है, ताकि परमाणु हथियार न बन सकें। ईरान कहता है कि उसका कार्यक्रम सिर्फ शांतिपूर्ण उद्देश्यों (जैसे बिजली उत्पादन) के लिए है।

अमेरिकी नौसेना ने हाल ही में होर्मुज स्ट्रेट के पास ईरानी जहाजों को रोका है। CENTCOM के अनुसार, 13 अप्रैल से अब तक कम से कम 33 जहाजों को रास्ता बदलने पर मजबूर किया गया है। ईरान में आंतरिक मतभेदईरान की बातचीत टीम में दरार दिख रही है। संसद स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ, जो पहली बैठक में डेलिगेशन के प्रमुख थे, अब शामिल नहीं हैं। खबर है कि वे परमाणु मुद्दे पर बातचीत के लिए तैयार थे, लेकिन कट्टरपंथी गुट ने इसका विरोध किया। उनकी जगह सईद जलीली जैसे सख्त रुख वाले नेता को लाया जा सकता है। जलीली IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) में प्रभावशाली माने जाते हैं और परमाणु मुद्दे पर आक्रामक रुख रखते हैं। यह संकेत देता है कि ईरान में दो गुट हैं एक जो बातचीत में कुछ लचीलापन दिखाना चाहता है और दूसरा जो सख्त रुख पर अड़ा है।

पांच हफ्ते की जंग और युद्धविराम

ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच पांच हफ्ते तक चली जंग के बाद दो हफ्ते का युद्धविराम हुआ था, जिसे ट्रंप ने बढ़ा दिया है। दोनों पक्ष अभी भी होर्मुज स्ट्रेट और परमाणु कार्यक्रम को लेकर सहमत नहीं हो पाए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान की मध्यस्थता में यह कोशिश क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच गहरे मतभेद और ईरान के अंदरूनी विवाद इसे चुनौतीपूर्ण बना रहे हैं।

पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 5 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

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