लेंस डेस्क। होर्मुज स्ट्रेट में तीन बड़े कार्गो जहाजों पर बुधवार को हमले हुए। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इन पर गोली चलाई और दो जहाजों को कब्जे में ले लिया। यह घटना तब हुई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कल ही ईरान के साथ सीजफायर की समय सीमा बढ़ा दी थी।
यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस सेंटर और ईरानी मीडिया के मुताबिक, सबसे पहले एपामिनोडास नाम के जहाज पर आईआरजीसी के गनबोट ने गोलीबारी की। इस जहाज का ब्रिज (कंट्रोल रूम) बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। इसके बाद यूफोरिया नाम के दूसरे जहाज को निशाना बनाया गया, जो अब ईरान के तट के पास खड़ा है। तीसरे जहाज एमएससी फ्रांसेस्का को भी गोली मारी गई। आईआरजीसी ने इसे कब्जे में ले लिया और दोनों जहाजों एपामिनोडास और एमएससी फ्रांसेस्का को ईरान के तट की ओर मोड़ दिया।
आईआरजीसी की नेवी ने कहा कि ये जहाज जरूरी परमिट के बिना चल रहे थे और नेविगेशन सिस्टम में छेड़छाड़ कर रहे थे। उन्होंने कहा, ‘होर्मुज स्ट्रेट में व्यवस्था बिगाड़ना हमारी लाल रेखा है।‘ फार्स न्यूज एजेंसी जो आईआरजीसी से जुड़ी है, ने भी पुष्टि की कि तीनों जहाजों को टारगेट किया गया।
US Iran Ceasefire: ट्रंप ने क्यों बढ़ाया सीजफायर?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कल यानी मंगलवार को घोषणा की कि दो हफ्ते का सीजफायर, जो 8 अप्रैल से शुरू हुआ था अब समाप्त नहीं होगा। उन्होंने कहा कि ईरान की सरकार गंभीर रूप से आंतरिक मतभेदों से जूझ रही है। पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अनुरोध किया था कि हमला रोक दिया जाए, ताकि ईरान के नेता एक साथ बैठकर प्रस्ताव तैयार कर सकें। हालांकि ट्रंप ने साफ कहा कि अमेरिका ईरान के बंदरगाहों पर आर्थिक नाकाबंदी जारी रखेगा।
दूसरे दौर की शांति वार्ता पर संकट
अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की शांति वार्ता के 21 और 22 अप्रैल को इस्लामाबाद में होने के प्रबल संकेत थे। पाकिस्तान मध्यस्थता कर रहा था। इस बैठक में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विशेष दूत विटकॉफ और कुशनर जाने वाले थे। लेकिन ट्रंप के सीजफायर बढ़ाने के तुरंत बाद अमेरिका ने यात्रा रद्द कर दी।
ईरान ने साफ कहा कि वह दूसरे दौर में शामिल नहीं होगा। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माइल बगई ने कहा कि हम धमकी के साए में बातचीत नहीं करेंगे। नाकाबंदी उठाए बिना इस्लामाबाद नहीं जाएंगे। पाकिस्तान अभी भी उम्मीद जता रहा है कि बातचीत आगे बढ़ेगी, लेकिन दोनों तरफ से आरोप-प्रत्यारोप जारी है।
इससे पहले पहले दौर की वार्ता में इस्लामाबाद में 21 घंटे तक लंबी बातचीत हो चुकी है। अमेरिकी टीम का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने किया था। उनके साथ ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर भी थे। ईरानी टीम में विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद स्पीकर मोहम्मद बागेर घालिबाफ शामिल थे। इस बैठक में कोई समझौता नहीं हुआ था। वेंस ने कहा था कि ईरान ने हमारे शर्तें मंजूर नहीं कीं। खासकर परमाणु हथियार न बनाने की बात। ईरान ने आरोप लगाया था कि अमेरिका अधिकतम मांगें कर रहा है, लक्ष्य बदल रहा है और नाकाबंदी जारी रख रहा है।
मौजूदा समय में होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिका का नौसैनिक ब्लॉकेड जारी है। ईरान का कहना है कि वह अपने देश की रक्षा के लिए तैयार है। दोनों देश अभी भी एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं कि सीजफायर का उल्लंघन हो रहा है।










