The Lens Expose : CGMSC के टेंडर में दो PSU कंपनियों का झूठा शपथपत्र, CBI केस छुपाए जाने का आरोप

जिस कंपनी पर CBI की जांच चल रही हो, क्या उसे सरकारी दवा खरीद का ठेका मिलना चाहिए? और अगर कंपनी ने शपथ-पत्र में सच नहीं बताया, तो उसका जिम्मेदार कौन होगा? यही सवाल आज छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉरपोरेशन (CGMSCL) के एक टेंडर को लेकर उठ रहा है। दो सरकारी कंपनियां HLL Lifecare और कर्नाटक एंटीबायोटिक्स एंड फार्मास्युटिकल्स (KAPL) शिकायत के घेरे में हैं। आरोप है कि दोनों ने अपने खिलाफ चल रहे CBI मामलों को छुपाकर शपथ-पत्र दिए। द लेंस के पास ये सभी दस्तावेज हैं।

टेंडर क्या था?

छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन राज्य सरकार का मेडिकल प्रोक्योरमेंट आर्म है। इसका काम पूरे राज्य के सरकारी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों, पीएचसी और सीएचसी में दवाएं, सर्जिकल सामान और लैब जांच की खरीद पारदर्शी टेंडर से करना है।

हालिया टेंडर आयुर्वेदिक दवाओं की खरीद का था। 22 जून 2026 को जारी टेंडर क्रमांक 12/Ayur-Classical/CGMSCL/Drugs/PSU/2026-27 (NIT No. 193887) नेशनल आयुष मिशन के तहत था। इसमें केंद्र सरकार के फंड से दवाएं केंद्र के सार्वजनिक उपक्रम (PSU) से ही खरीदना अनिवार्य था। इसलिए सिर्फ PSU कंपनियां ही मैदान में थीं। टेंडर में तीन कंपनियों ने हिस्सा लिया, जिनमें HLL Lifecare और KAPL शामिल हैं।

टेंडर की शर्त और झूठ क्या बोला गया?

टेंडर की शर्त साफ है – कंपनी या उसके किसी डायरेक्टर के खिलाफ कोई भी CBI Enquiry pending नहीं होनी चाहिए। अगर है, तो कंपनी अयोग्य है।
HLL Lifecare ने 22 जून 2026 के टेंडर में एक Affidavit दिया। कंपनी ने लिखा – कंपनी किसी भी आपराधिक मामले में दोषसिद्ध नहीं है, और किसी भी सरकार ने हमें ब्लैकलिस्ट नहीं किया है। अगर जानकारी गलत निकली तो EMD या सिक्योरिटी डिपॉजिट जब्त करके 5 साल ब्लैकलिस्ट कर देना। KAPL ने भी ऐसा ही Affidavit दिया और लिखा कि उनके खिलाफ कोई केस नहीं है।

इस रिपोर्ट को आप वीडियो में देख सकतें हैं –

दो FIR जो सब पोल खोलती हैं

HLL Lifecare का मामला

शिकायत के अनुसार HLL से जुड़ा एक मामला CBI, ACB चंडीगढ़ में 18 दिसंबर 2025 को दर्ज है। यह PGIMER चंडीगढ़ के प्राइवेट ग्रांट सेल में गरीब मरीजों के इलाज के लिए मिले अनुदान के कथित दुरुपयोग का मामला है। FIR में IPC की धारा 120-B, 406, 409, 420, 471 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(a) सहित 13(2) लगी हैं।

दस्तावेजों में HLL पर दर्ज आरोप

राष्ट्रीय आरोग्य निधि और अन्य एजेंसियों से दुर्लभ बीमारियों के मरीजों के लिए मिले ₹61.75 लाख रुपये में से ₹38 लाख रुपये कथित तौर पर R. Kumar Medicos, HLL Lifecare और Kumar & Company जैसी फर्मों के खातों में गए। आरोप है कि संबंधित मामलों में इलाज करने वाले डॉक्टर की पर्ची नहीं थी। इनमें पांच में से दो मरीजों की मृत्यु हो चुकी थी, फिर भी फर्मों को ₹27,66,355 रुपये का भुगतान जारी हुआ। 2017 से अक्टूबर 2021 की जांच में 70 अतिरिक्त वित्तीय अनियमितताएं मिलीं। इनमें से 17 मामलों में HLL के original bills में कथित हेरफेर कर double payment लेने का उल्लेख है।

सरल शब्दों में, HLL पर आरोप यह है कि मरीजों का पैसा इलाज की जगह कागजी हेरफेर के रास्ते निजी खातों तक पहुंचा और उस भुगतान में HLL के बिल भी जांच के दायरे में हैं। इसके अलावा शिकायत में AIIMS भोपाल में अधिक दरों पर कथित अनियमित खरीद और मानकों में हेरफेर का भी आरोप है।

सवाल यह है – जब 18 दिसंबर 2025 को ही HLL के खिलाफ CBI केस दर्ज हो चुका था, तो 22 जून 2026 के टेंडर में कंपनी ने कैसे लिख दिया कि हमारे खिलाफ कोई केस नहीं है? ये झूठा शपथपत्र नहीं तो क्या है?

KAPL का मामला

15 जुलाई 2026 को CBI, ACB भोपाल ने KAPL पर FIR दर्ज की। आरोप है कि इस कंपनी के MD ने फरवरी से जून 2026 की बिक्री के कमीशन का 60 प्रतिशत रिश्वत मांगा और धमकी दी कि रिश्वत न मिली तो सर्विस एजेंट एग्रीमेंट का नवीनीकरण नहीं होगा।

CBI के सत्यापन में 14 जुलाई को आरोप सही पाए जाने और ₹5 लाख रुपये की आंशिक रिश्वत पर सहमति का उल्लेख है। बाद की मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक MD की गिरफ्तारी हुई और कई ठिकानों पर तलाशी में नकदी, विदेशी मुद्रा और सोना जब्त होने की बात सामने आई।

तारीखों पर गौर करें – 15 जुलाई 2026 को FIR दर्ज हुई, और सिर्फ 13 दिन बाद 28 जुलाई 2026 को KAPL ने CGMSC टेंडर में शपथपत्र दे दिया कि उनके खिलाफ कोई CBI/Vigilance केस pending नहीं है। ये सीधा-सीधा झूठा हलफनामा है।

घोस्ट बिडिंग का खेल

इन कंपनियों पर एक और आरोप है – Ghost Bidding। KAPL ने टेंडर में 10 उत्पादों पर बोली लगाई। लेकिन शिकायत में आरोप है कि उनमें से 8 प्रमुख औषधियों का पिछले तीन वित्तीय वर्षों 2023-24, 2024-25, 2025-26 में धारवाड़ इकाई में कोई उत्पादन ही नहीं हुआ। कंपनी ने खुद लिखा है ‘NOT MFD’—Not Manufactured। फिर बोली क्यों लगाई? और मार्केट स्टैंडिंग का दावा कैसे किया?

HLL पर भी आरोप है कि उसने AIIMS भोपाल में अत्यधिक दरों पर सप्लाई की और शास्त्रीय मानकों – चूर्ण के स्थान पर अन्य स्वरूप का उल्लंघन किया।

शिकायत कहाँ-कहाँ गई और CGMSC ने क्या किया?

इस पूरे मामले की शिकायत दो जगह से हुई है।
एक – अधिवक्ता गौतम सिंह यादव ने CGMSC के MD को Legal Notice भेजा है। प्रतिलिपि मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और मुख्य सचिव को भी। मांग है टेंडर रद्द करो, EMD जब्त करो, 3 से 5 साल ब्लैकलिस्ट करो, FIR दर्ज करो, Vigilance जांच कराओ। 15 दिन में कार्रवाई नहीं हुई तो हाईकोर्ट, CVC, लोकायुक्त और ED में जाएंगे।
दूसरा – अधिवक्ता नीलम सिंह यादव ने दोनों कंपनियों के CVO को—HLL के CVO तिरुवनंतपुरम और KAPL के CVO बेंगलुरु को शिकायत भेजी है।

CGMSC ने टेंडर को रद्द करके दोबारा टेंडर बुला लिया है। लेकिन शिकायतकर्ता का सवाल है—टेंडर रद्द करना सजा नहीं है। जिन कंपनियों ने झूठा शपथपत्र दिया, उनके खिलाफ EMD जब्त करने, ब्लैकलिस्ट करने और आपराधिक कार्रवाई की शर्त टेंडर में ही लिखी है, तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

HLL को हुए भुगतान और बिलों की भूमिका जांच के दायरे में बताई गई है। HLL पर लगे आरोप शिकायत और जांच दस्तावेजों पर आधारित हैं।

CGMSCL की प्रतिक्रिया

इस मामले पर द लेंस ने CGMSCL के प्रबंध संचालक (MD) रितेश कुमार अग्रवाल से बात की। उनका कहना था कि मुझे इस मामले की जानकारी नहीं है। अगर ये दस्तावेज और तथ्य सही हैं तो वे इसकी जांच कराएंगे। उन्होंने यह भी बताया कि फिलहाल इन कंपनियों को आयुर्वेदिक दवाओं की खरीद का टेंडर नहीं दिया गया है। लेकिन उनसे बात करने के ठीक उसी दिन ही CGMSC ने 27 अक्टूबर को इन्हीं कंपनियों को कुछ दवाओं को छोड़कर वापस से टेंडर दे दिया। यानी जिस कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया जाना था, उसे ही टेंडर दे दिया गया।

गदाधर पंडा, जो CGMSC के टेंडर प्रक्रिया के खरीद में टेक्निकल मामलों को देखते हैं, उनसे संपर्क करने पर उन्होंने द लेंस को जवाब दिया कि वो इस वक्त बाहर हैं, आप 1 हफ्ते रुक जाइये उसके बाद बात करते हैं और 2 दिनों के अंदर ही इन्हीं कंपनियों को रिटेंडर दे दिया गया।

जनता का पैसा और मरीजों की दवा, दोनों दांव पर हैं। इसलिए जवाब कागज पर नहीं, कार्रवाई में होनी चाहिए। ये सिर्फ एक टेंडर नहीं, ये छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पतालों में जाने वाली दवाओं की गुणवत्ता, ईमानदारी और सिस्टम की नीयत का सवाल है। द लेंस इस मामले पर नजर बनाए रखेगा। जैसे ही इस मुद्दे पर और कोई प्रतिक्रिया या कार्रवाई सामने आएगी, हम आप तक अपडेट पहुंचाएंगे।

पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 6 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, हेल्थ, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

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