लेंस रिपोर्ट। छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh)में धान खरीदी को लेकर फिर सियासत गरमा गई है। भाजपा सरकार ने 15 नवंबर 2026 से ₹3100 प्रति क्विंटल और अधिकतम 21 क्विंटल प्रति एकड़ की दर से खरीदी का ऐलान किया है। कांग्रेस ने इसे धोखा बताया और 1 नवंबर से खरीदी शुरू करने तथा ₹3358 प्रति क्विंटल देने की मांग की है। सरकार वादा निभाने का दावा कर रही है, जबकि कांग्रेस आरोप लगा रही है कि हर साल आदान सहायता यानी बोनस घटाकर किसानों को ₹5418 प्रति एकड़ का नुकसान हो रहा है।
सरकार का फैसला
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की कैबिनेट ने 19 प्रस्तावों को मंजूरी दी। कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने 28 अक्टूबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि इस साल 15 नवंबर से 27.50 लाख से अधिक किसानों से ₹3100 प्रति क्विंटल की दर से, अधिकतम 21 क्विंटल प्रति एकड़ के हिसाब से धान खरीदा जाएगा। 360 नए उपार्जन केंद्र खोले गए हैं। अब कुल 3100 केंद्रों पर खरीदी होगी।
इस बार एग्रीस्टैक आईडी लागू होगी। पिछले साल पंजीकृत किसानों को दोबारा पंजीयन या ऋण पुस्तिका समिति में जाने की जरूरत नहीं। डिजिटल क्रॉप सर्वे से रकबा तय होगा और बायोमेट्रिक से खरीदी होगी ताकि फर्जीवाड़ा रुके। सरकार ने जनवरी से गरीबों को सुपर फाइन चावल देने और धान के बदले दूसरी फसल लेने पर ₹15 हजार प्रति एकड़ सहायता का भी ऐलान किया है।
कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा, “हम अपने वादे के अनुसार 3100 रुपए की दर से 21 क्विंटल प्रति एकड़ खरीदी करेंगे। कांग्रेस बरसाती मेंढक की तरह हल्ला कर रही है, किसानों को भ्रमित होने की जरूरत नहीं है।”
कांग्रेस का आरोप और हिसाब
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि छत्तीसगढ़ बनने के बाद से राज्योत्सव यानी 1 नवंबर से धान खरीदी की परंपरा रही है। साय सरकार पिछले दो साल से 15 दिन लेट कर रही है ताकि कम धान खरीदना पड़े। उन्होंने दीपावली से पहले खरीदी शुरू करने या कम से कम एक एकड़ का अग्रिम भुगतान देने की मांग की।
कांग्रेस का आंकड़ों वाला गणित इस प्रकार है:
2023-24: MSP ₹2183, आदान सहायता ₹917 प्रति क्विंटल
2024-25: MSP ₹2300, सहायता ₹800
2025-26: MSP ₹2369, सहायता ₹731
2026-27: MSP ₹2441, सहायता घटाकर ₹659
2023-24 से अब तक आदान सहायता में ₹258 प्रति क्विंटल की कटौती हुई है। 21 क्विंटल के हिसाब से यह ₹5418 प्रति एकड़ बैठता है। कांग्रेस इसे किसानों के हक में डकैती बता रही है।
इसी आधार पर कांग्रेस की मांग है कि केंद्र द्वारा बढ़ाए गए MSP ₹258 को जोड़कर ₹3100 + 258 = ₹3358 प्रति क्विंटल एकमुश्त भुगतान किया जाए। इससे पहले कांग्रेस ₹3550 की मांग कर चुकी है।
दीपक बैज ने कहा, “3100 का वादा क्विंटल में था, एकड़ में क्यों बदल रहे हो? जब कांग्रेस सरकार थी, MSP 1750 था तो भी हमने 2500 दिया। MSP बढ़ा तो 2640 दिया। अब वादा 3100 का था, उसमें 258 जोड़कर 3358 दो। रकबा समर्पण और फर्जी गिरदावरी बंद करो।”
कांग्रेस की पांच मांगें
₹3358 प्रति क्विंटल एकमुश्त भुगतान हो, आदान सहायता का खेल बंद हो।
हर ग्राम पंचायत में नगद भुगतान केंद्र खोलो, धान बेचते ही पैसा दो।
पंजीकृत किसानों से पूरे रकबे की 21 क्विंटल के हिसाब से खरीदी हो, जबरिया रकबा समर्पण बंद हो।
दीपावली से पहले अग्रिम भुगतान दो।
पिछला बकाया ₹6066 करोड़ (170 + 4366 MSP वृद्धि) दीपावली से पहले दो।
सरकार कह रही है कि वह ₹3100 दे रही है और नए केंद्र खोल रही है। कांग्रेस का आरोप है कि 3100 का नाम लेकर साल-दर-साल आदान सहायता घटाई जा रही है। सवाल यह है कि धान की कीमत क्विंटल से तय होगी या एकड़ के गणित से घटेगी? 1 नवंबर की परंपरा तोड़कर 15 नवंबर करने से क्या सरकार कम धान खरीदने का लक्ष्य पूरा कर रही है? और दीपावली से पहले किसानों को पैसा मिलेगा या सिर्फ वादे? दोनों पक्ष अपने तर्क दे रहे हैं। अंतिम फैसला किसान करेंगे।











