लेंस डेस्क। चक्रवात अर्नब के असर से आंध्र प्रदेश और ओडिशा में भारी नुकसान हुआ है। कई इलाकों में पेड़ उखड़ गए, सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं। मौसम विभाग के मुताबिक, तूफान कमजोर होकर डीप डिप्रेशन में बदल गया है। इसके बावजूद कई राज्यों में भारी बारिश और तेज हवाओं का खतरा बना हुआ है। छत्तीसगढ़ के 12 और ओडिशा के 16 जिलों में गुरुवार को स्कूल बंद रखा गया है।
बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवाती तूफान अर्नब ने आंध्र प्रदेश और ओडिशा के कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित कर दिया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, दोनों राज्यों में अब तक पांच लोगों की मौत हो चुकी है। तेज हवाओं और भारी बारिश के कारण कई जगह पेड़ गिर गए, जबकि सड़क और पुल भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। समुद्र का पानी तटीय इलाकों में घुसने से कुछ जगह बाढ़ जैसे हालात बन गए।
चक्रवात का असर अब आंध्र प्रदेश और ओडिशा तक सीमित नहीं है। मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड समेत कई राज्यों में बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के अनुसार, कुछ इलाकों में अगले दो दिनों तक बारिश और गरज-चमक का दौर जारी रह सकता है।
कमजोर होकर डीप डिप्रेशन में बदला चक्रवात
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, चक्रवात अर्नब ने आंध्र प्रदेश के तट को पार करते समय काफी तेज हवाओं के साथ भारी बारिश की। उस दौरान हवा की रफ्तार 125 से 135 किलोमीटर प्रति घंटे के बीच थी, जबकि हवा के झोंके 150 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचे।
मौसम विभाग के अनुसार, तट पार करने के बाद तूफान कमजोर पड़ने लगा। बाद में यह डीप डिप्रेशन में बदल गया। इसके आगे और कमजोर होकर डिप्रेशन तथा फिर कम दबाव वाले क्षेत्र में बदलने का अनुमान जताया गया है।
हालांकि, तूफान की ताकत कम होने के बावजूद इसके प्रभाव वाले इलाकों में भारी बारिश, तेज हवाओं और जलभराव का खतरा बना रह सकता है। इसलिए तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।
आंध्र प्रदेश और ओडिशा में भारी बारिश से नुकसान
चक्रवात के कारण आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में भारी बारिश हुई। कई स्थानों पर समुद्र का पानी बस्तियों और सड़कों तक पहुंच गया। तेज हवाओं के कारण पेड़ गिरने और यातायात प्रभावित होने की खबरें भी सामने आईं।
ओडिशा के दक्षिणी हिस्सों में भी भारी से बहुत भारी बारिश की आशंका जताई गई थी। राज्य के 16 जिलों में स्कूल बंद रखने की जानकारी दी गई है। इसके अलावा, करीब 30 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। मौसम विभाग ने तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को समुद्र के पास जाने से बचने और प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है।
यनम में राहत शिविरों में जाने से कतरा रहे लोग
चक्रवात के खतरे को देखते हुए पुडुचेरी के यनम क्षेत्र में राहत और बचाव की तैयारियां की गई थीं। यहां करीब पांच हजार लोगों के लिए 20 राहत शिविर बनाए गए। हालांकि, अधिकारियों के मुताबिक, शुरुआती जानकारी के समय तक लगभग दो हजार लोग ही शिविरों में पहुंचे थे। यनम के क्षेत्रीय प्रशासक शिवराज मीणा ने बताया कि कई लोग बार-बार चेतावनी देने के बावजूद घर छोड़कर राहत शिविरों में जाने को तैयार नहीं थे। ऐसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और स्थानीय पुलिस की मदद ली गई।
क्षेत्र में एनडीआरएफ के करीब 100 जवान तैनात किए गए। नुकसान कम करने के लिए सड़कों के किनारे लगे पेड़ों की छंटाई भी की गई, ताकि तेज हवाओं के दौरान पेड़ गिरने से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।
बाढ़ में फंसे लोगों को पुलिस ने बचाया
चक्रवात के कारण आंध्र प्रदेश के काकीनाडा जिले में भी हालात बिगड़ गए। भारी बारिश और समुद्र का पानी भरने से बॉम्बे कट्टा इलाके के पास चार लोग बाढ़ के पानी में फंस गए थे। पुलिस ने अभियान चलाकर उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला और घर पहुंचाया।
जानकारी के मुताबिक, ये लोग सुबह काम पर पहुंचे थे, लेकिन पानी भरने के कारण रात तक वहां फंसे रहे। बाढ़ के पानी ने उनके बाहर निकलने का रास्ता बंद कर दिया था। इसके बाद उन्होंने पुलिस से संपर्क किया।
काकीनाडा एंकरिज पोर्ट के पास स्थित सीडब्ल्यूसी के गोदामों में भी तीन लोगों के फंसे होने की खबर सामने आई। भारी बारिश और परिसर में पानी घुसने के कारण वहां मुश्किल हालात बन गए थे। बिजली आपूर्ति भी बाधित हो गई थी।
पुलिस ने लोगों से अपील की कि बेहद जरूरी होने पर ही घरों से बाहर निकलें और जलभराव वाले इलाकों से दूर रहें।
उड़ानें रद्द, तटीय सड़कों पर यातायात प्रभावित
चक्रवात के असर से हवाई और सड़क यातायात पर भी प्रभाव पड़ा। विजयवाड़ा और विशाखापत्तनम में एयरलाइंस ने कम से कम 21 उड़ानें रद्द कर दीं। विजयवाड़ा हवाई अड्डे से हैदराबाद, चेन्नई, बेंगलुरु, विशाखापत्तनम और कडप्पा जाने वाली उड़ानें भी प्रभावित हुईं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बुधवार को विजयवाड़ा हवाई अड्डे से सभी उड़ानें रद्द कर दी गई थीं।
तमिलनाडु के चेन्नई के उत्तरी हिस्सों और तिरुवल्लूर जिले में भी तटीय सड़कों पर यातायात प्रभावित हुआ। एन्नोर एक्सप्रेसवे समेत कुछ इलाकों में ऊंची समुद्री लहरें जमीन तक पहुंचती दिखाई दीं।
छत्तीसगढ़ समेत 15 राज्यों में बारिश का अनुमान
चक्रवात के प्रभाव से देश के कई हिस्सों में मौसम बदलने की संभावना है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, ओडिशा, तेलंगाना और विदर्भ समेत कई क्षेत्रों में बारिश हो सकती है।
पूर्वी मध्य प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी गई थी। पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी गरज-चमक और तेज हवाओं का अनुमान जताया गया। दिल्ली में 29 अक्टूबर को बादल छाए रहने और मध्यम बारिश की संभावना बताई गई थी, जबकि 30 अक्टूबर को गरज के साथ बारिश हो सकती है।
बारिश के दौरान निचले इलाकों में जलभराव, पेड़ गिरने और यातायात बाधित होने की आशंका रहती है। ऐसे में लोगों को मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों पर ध्यान देना चाहिए।
चक्रवात का नाम अर्नब कैसे पड़ा?
चक्रवात अर्नब का नाम बांग्लादेश ने प्रस्तावित किया था। ‘अर्नब’ बंगाली भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ महासागर या समुद्र होता है। उत्तर हिंद महासागर में आने वाले उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के नाम तय करने के लिए एक क्षेत्रीय व्यवस्था है। इसके तहत 13 देशों ने नामों की सूची तैयार की है। इन देशों में बांग्लादेश, भारत, ईरान, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, श्रीलंका, थाईलैंड, संयुक्त अरब अमीरात और यमन शामिल हैं।
चक्रवात अर्नब कमजोर जरूर हुआ है, लेकिन इसके असर से कई क्षेत्रों में बारिश और जलभराव की स्थिति बन सकती है। तटीय इलाकों में समुद्र के पास जाने से बचना चाहिए। बाढ़ के पानी से भरी सड़कों को पार करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए और बिजली के खंभों या टूटे तारों से दूर रहना चाहिए।









