आतंकी संगठन ISIS तक इंटरनेट की पहुंच बनाने वाली विदेशी कंपनियों से जियो और एयरटेल का करार

नई दिल्ली। सीरिया में अपने कारकुनों की भर्ती करने और अपने आतंकी संगठन का प्रचार करने के मामले में इस्लामिक स्टेट ISIS जितना सफल तरीक़े से इंटरनेट का इस्तेमाल कोई और आतंकी संगठन नहीं करता। लेकिन यह संगठन ऐसा कैसे कर पाता है, जबकि यह ऐसे क्षेत्र में काम करता है जहां दूरसंचार बुनियादी ढांचा काफी हद तक नष्ट हो चुका है? यह एक बड़ा सवाल है।
सवाल यह भी है कि क्या भारत में ऑपरेट कर रहे इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर ने अपनी सैटेलाइट सेवाओं के लिए ऐसी विदेशी कंपनियों से जाने अनजाने में संपर्क साधा है जिनके सेटेलाइट डिश की पहुंच आतंकी संगठनों तक रही हैं? तो इसका जवाब हाँ है।यह बात काबिलेगौर है कि विदेशी कंपनियां इस बड़े खतरे को लेकर जिम्मेदारियों से बचती रही हैं।

स्पीगल ऑनलाइन के इनेटिगेशन से हुआ था खुलासा

सुप्रसिद्ध जर्मन न्यूज आउटलेट “स्पीगल ऑनलाइन” द्वारा 2015 में जारी किए दस्तावेजों से पता चलता है कि यूरोपीय कंपनियां ही सीरिया में ऑपरेट कर रहे आतंकवादियों को उन प्लेटफॉर्म तक पहुंच मुहैया कराती रही हैं जिनका इस्तेमाल वे अपना दुष्प्रचार फैलाने के लिए करते हैं।जिन दो कंपनियों का नाम इन्वेटिगेशन रिपोर्ट में सामने आया है। उन कंपनियों ने भारत में एयरटेल और जियो के साथ अनुबंध किए हैं और सरकार के अनुमोदन की प्रतीक्षा कर रही हैं।

महत्वपूर्ण है कि भारत सरकार का गृह मंत्रालय इंटरनेट क्षमताओं के विस्तार और लाइसेंसिंग में बार बार राष्ट्रीय सुरक्षा को मुद्दा बनाता रहा है और इन्ही वजहों से एलन मस्क की स्टारलिंक को अब तक हरी झंडी ना मिलने के बड़े कारणों में से एक बताया जाता है।

तुर्की को निर्यातित सैटेलाइट डिश पहुंच गए सीरिया

SPIEGEL ONLINE ने खुलासा किया था कि कि अकेले 2013 और 2014 के दौरान सैट इंटरनेट सर्विसेज नाम की जर्मन कंपनी ने तुर्की को 6,000 से अधिक सैटेलाइट डिश निर्यात किए जिसका इस्तेमाल इंटरनेट सेवाओं में किया जाने लगा। यह संभावना है कि इनमें से अधिकांश सैटेलाइट डिश तुर्की से निकल सीरिया पहुंच गए और ISIS के द्वारा इस्तेमाल किए जाने लगे।
सीरियाई में इंटरनेट का कोई वैकल्पिक साधन उपलब्ध नहीं है, जिसका अर्थ है कि कीमतें बहुत अधिक निर्धारित की जा सकती हैं। इस पूरे गड़बड़ी में जिन कंपनियों का नाम आया उनमें लखमबर्ग की SES फ्रांस की Eutelsat और ब्रिटेन की Avanti Communications का नाम था जिनके सैटेलाइट का इस्तेमाल आतंकी संगठन ISIS द्वारा किया जा रहा था।

अवैध उपयोग से कंपनियों ने नहीं किया था इनकार

इस खुलासे पर लक्ज़मबर्ग स्थित SES के अधिकारियों ने उस दौरान कहा था कि वे अपनी सेवाएं केवल समीक्षा किए गए प्रमुख डीलरों को ही बेचते हैं और अंतिम ग्राहकों को लेकर वो ज़िम्मेदार नहीं हैं. वहीं फ्रांस की EUTELSAT के अधिकारियों ने अधिक सतर्क टिप्पणी करते हुए कहा कि आधुनिक सैटेलाइट टर्मिनल बहुत छोटे, कॉम्पैक्ट और पोर्टेबल होते हैं, इसलिए वे किसी भी संभावित अवैध उपयोग से इनकार नहीं कर सकते।
यूटेलसैट के अधिकारियों का कहना था कि सीरिया में कंपनी के अपने कोई सेवा प्रदाता नहीं हैं और अंतिम ग्राहकों से उसका कोई सीधा संपर्क नहीं है। SES ने कहा था कि उसे ISIS क्षेत्रों में उपयोग की जानकारी नहीं, और पुष्टि होने पर सेवा रोकेगा।

अब जियो और एयरटेल ने कर लिये करार

आगे की कहानी चौंकाने वाली है। भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं के लिए दौड़ में शामिल अंबानी के जियो और मित्तल ग्रुप के एयरटेल ने देश में सैटेलाइट सेवाओं के लिए जिन कंपनियों से करार किए दुर्भाग्य से वो दोनों कंपनियाँ SES और EUTELSAT हैं।भारत की अग्रणी डिजिटल सेवा प्रदाता जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड और वैश्विक स्तर पर उपग्रह आधारित कंटेंट कनेक्टिविटी समाधान प्रदाता एसईएस ने आज एक संयुक्त उद्यम – जियो स्पेस टेक्नोलॉजी लिमिटेड – के गठन की घोषणा की है। इसका उद्देश्य उपग्रह प्रौद्योगिकी का लाभ उठाते हुए भारत में अगली पीढ़ी की स्केलेबल और किफायती ब्रॉडबैंड सेवाएं प्रदान करना है।

भारतीय ऑप्रेटरों का इंटरनेशनल खेल

जियो और एसईएस की संयुक्त उद्यम में क्रमशः 51 और 49% इक्विटी हिस्सेदारी होगी वहीं एयरटेल ने पहले ONEWEB में निवेश किया और यह कंपनी 2023 में EUTELSAT के साथ विलय कर ली और संयुक्त परियोजना का नाम EUTELSAT ONEWEB रखा गया है। एलन मस्क द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए कि उनकी सैटेलाइट संचार कंपनी स्टारलिंक को भारत में अवरुद्ध किया जा रहा है, भारती एयरटेल के अध्यक्ष सुनील भारती मित्तल ने आज ही कहा है कि उनकी सैटेलाइट संचार कंपनी, यूटेलसैट वनवेब भी परिचालन शुरू करने के लिए अनुमोदन की प्रतीक्षा कर रही है।

दरअसल EUTELSAT ने पूर्व में स्वीकार किया है कि उनकी सैटेलाइट डिश किट में जीपीएस ट्रैकिंग नहीं है हांलाकि आज के वक्त में जियो ब्लॉकिंग और सिग्नल बीम शेपिंग का इस्तेमाल हो रहा है जिससे यह पता चलता है कि उपभोक्ता इंटरनेट का इस्तेमाल कहाँ से कर रहा है।यह स्पष्ट नहीं है कि यह कंपनियाँ इन चीजों का इस्तेमाल कर रही हैं या नहीं? द लेंस ने इन सूचनाओं को लेकर एयरटेल, जियो, EUTELSAT और SES को विस्तृत प्रश्नावली भेजी है। जिसमे उनसे पूछा गया है कि क्या उन्हें इस बात का खुलासा भारतीय कंपनियों से अनुबंध में किया था? जवाब आने पर ख़बर को अपडेट किया जाएगा।

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