हां मेरा दादा अंग्रेजों से आर्थिक मदद लेता था, बोले सावरकर के पोते

नई दिल्ली | (Satyaki Savarkar)ने पुणे की स्पेशल एमपी एमएलए कोर्ट में अपनी नवीनतम गवाही में कहा कि उनके परदादा और दक्षिणपंथी विचारक विनायक सावरकर को कुछ वर्गों द्वारा माफीवीर या ब्रिटिश एजेंट क्यों कहा जाता है, यह उन्हें ठीक से पता नहीं है यह सच है कि वो अंग्रेजों से आर्थिक मदद लेते थे। चूंकि यह एक विवादास्पद विषय है, इसलिए उन्होंने इन शब्दों का इस्तेमाल करने वाले किसी के खिलाफ मानहानि का केस नहीं दायर किया है।सत्यकी पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई गई है, जिसमें आरोप है कि उन्होंने लंदन में दिए भाषण से सावरकर को बदनाम किया।

सावरकर को माफीवीर कहे जाने के कारणों से जताई अनभिज्ञता

गांधी की ओर से वकील मिलिंद पवार सत्यकी से क्रॉस-एक्जामिनेशन कर रहे हैं। यह एग्जामिनेशन स्पेशल जज अमोल शिंदे के सामने हो रहा है।मंगलवार को सत्यकी ने स्पेशल कोर्ट को बताया कि वे नहीं जानते कि इतिहासकार सावरकर को ‘माफीवीर’ या ‘ब्रिटिश एजेंट’ क्यों कहते है? मुझे नहीं मालूम ऐसा ऐतिहासिक घटनाओं के आधार पर या सिर्फ राजनीतिक विरोध के कारण कहा जाता है।

ब्रिटिश एजेंट कहे जाने की वजहों से जताई अनभिज्ञता
सत्यकी ने लगभग छह पृष्ठों की गवाही में कहा कि वे अनिश्चित हैं कि इतिहासकारों ने उनके परदादा को ‘माफीवीर’ और ‘ब्रिटिश एजेंट’ व्यंग्यात्मक रूप से कहा जाता है या उनके ‘बार-बार’ माफी याचिकाएं दायर करने के आधार पर। उन्होंने कहा यह सही है कि सावरकर को स्वतंत्रता आंदोलन में उनके बड़े योगदान के बावजूद ‘माफीवीर’ और ‘ब्रिटिश एजेंट’ कहा जाता रहा है।

लेकिन ये मुद्दे विवाद का विषय हो सकते हैं। इसलिए मैंने किसी के खिलाफ शिकायत नहीं की। मैं नहीं जानता कि इन विवादित बिंदुओं को कुछ इतिहासकार माफी याचिका जोड़ते हैं। मैं नहीं जानता कि ‘माफीवीर’ का आरोप ऐतिहासिक घटनाओं की परिभाषा पर मतभेद से आता है। मैं यह नहीं कह सकता कि ‘ब्रिटिश एजेंट’ होने का आरोप सावरकर की राजनीतिक स्थिति या ब्रिटिश शासन से उनके संबंध पर आधारित आलोचना है।

करते समझौता तो बनते पीएम

सत्यकी ने कहा कि मैं नहीं कह सकता कि माफी याचिकाओं के माध्यम से सावरकर ने हिंसक रास्ता छोड़ने की तैयारी दिखाई और सावरकर को रिहा करने के लिए ब्रिटिश सरकार से कई पत्राचार हुए। उन्होंने कहा कि अगर सावरकर ब्रिटिश सरकार से समझौता करते तो 1946 में उन्हें भारत का प्रधानमंत्री बना दिया जाता। मैं नहीं कह सकता कि सावरकर ब्रिटिश एजेंट थे, यह निर्विवाद ऐतिहासिक तथ्य है। बल्कि यह एक विवादास्पद राजनीतिक या ऐतिहासिक राय है।”

क्रांतिकारियों से अलग होने का दावा गलत

अपनी आगे की गवाही में सत्यकी ने कहा कि वे नहीं जानते कि इतिहासकारों द्वारा सावरकर पर लगाए गए आरोप उस समय की ब्रिटिश सरकार के साथ उनकी सहयोग पर आधारित थे या नहीं। उन्होंने कहा कि सिर्फ माफी याचिकाएं दायर करने और सजा में कुछ छूट मिलने के कारण सावरकर की भूमिका अन्य क्रांतिकारियों से अलग नहीं कही जा सकती। हालांकि, उन्होंने यह स्वीकार किया कि सावरकर ने ब्रिटिश से वित्तीय सहायता मांगी थी।

मुंबई यूनिवर्सिटी ने ले ली थी डिग्री वापस

सत्यकी ने अपनी बात में जोड़ा कि यह सही है कि इतिहास में दर्ज है कि रत्नागिरी में रहते हुए सावरकर ने ब्रिटिश सरकार को वित्तीय सहायता के लिए पत्राचार किया। सावरकर ने रत्नागिरी में रहते हुए ब्रिटिश सरकार द्वारा बनाए गए नियमों के अनुसार निर्वाह भत्ता पाने के लिए याचिकाएं भेजीं। ब्रिटिश सरकार ने ऐसी याचिकाओं की अनुमति दी थी।

महात्मा गांधी, सरदार वल्लभभाई पटेल और शरदचंद्र बोस भी ऐसे निर्वाह भत्ते लेते थे। मुंबई विश्वविद्यालय ने सावरकर की बी.ए. डिग्री वापस ले ली थी और ब्रिटिश सरकार ने उन्हें कानून प्रैक्टिस का प्रमाणपत्र देने से इनकार कर दिया था। मैं नहीं जानता कि कुछ इतिहासकारों ने इन वित्तीय पत्राचारों के आधार पर सावरकर को ब्रिटिश एजेंट कहा।”

किस बात का चल रहा मुकदमा

शिकायत में आरोप है कि राहुल गांधी ने पिछले कई वर्षों में सावरकर को बार-बार बदनाम किया है। एक खास घटना 5 मार्च 2023 की है, जब गांधी ने ब्रिटेन में ओवरसीज कांग्रेस को संबोधित किया था।शिकायतकर्ता सत्यकी सावरकर का दावा है कि गांधी जानबूझकर सावरकर के खिलाफ झूठे आरोप लगाते रहे, जिनका मकसद सावरकर की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना और शिकायतकर्ता व उनके परिवार को मानसिक पीड़ा देना था।

उन्होंने कहा कि बदनाम करने वाला भाषण इंग्लैंड में दिया गया, लेकिन इसका असर पुणे में महसूस हुआ क्योंकि इसे पूरे भारत में प्रकाशित और प्रसारित किया गया।

सत्यकी ने अपनी शिकायत में कई समाचार रिपोर्ट्स और गांधी के लंदन भाषण का यूट्यूब लिंक सबूत के रूप में पेश किए। उन्होंने दावा किया कि गांधी ने झूठा आरोप लगाया कि सावरकर ने एक किताब लिखी जिसमें मुस्लिम व्यक्ति को पीटने का वर्णन है, जबकि सावरकर ने ऐसी कोई किताब नहीं लिखी और न ही ऐसा कोई घटना हुई।

सत्यकी ने तर्क दिया कि गांधी ने ये झूठे, दुर्भावनापूर्ण और बेबुनियाद आरोप सावरकर को बदनाम करने और उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के खास मकसद से लगाए।आपराधिक मानहानि की अर्जी में सत्यकी ने IPC की धारा 500 (मानहानि की सजा) के तहत गांधी को अधिकतम सजा और CrPC की धारा 357 के तहत अधिकतम मुआवजा देने की मांग की है।

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