नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने गुरुवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से 48 घंटे के अंदर इस्तीफा मांग लिया है। पार्टी ने चेतावनी दी कि अगर इस्तीफा नहीं दिया गया तो देशभर में आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा और दिल्ली में भी प्रदर्शन होगा।
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि ज्ञानेश कुमार देश के सबसे बड़े गद्दार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के जरिए 13 करोड़ से ज्यादा वोटरों के नाम काट दिए गए हैं। इससे लोगों का वोट देने का अधिकार छीना जा रहा है।
दीपके ने कहा, ‘लोकतंत्र का मतलब है कि जनता अपनी सरकार चुने। लेकिन जब से ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त बने हैं, तब से यह तय हो रहा है कि कौन वोट करेगा और कौन नहीं।’
दीपके के चार बड़े आरोप
2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को बहुमत नहीं मिला। इसके बाद क्षेत्रीय पार्टियों को कमजोर करने की कोशिश शुरू हुई। उद्धव ठाकरे, अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी समेत कई विपक्षी नेताओं को एक-एक कर निशाना बनाया गया।
विपक्ष को पूरी तरह खत्म करने की कोशिश की जा रही है। ममता बनर्जी और केजरीवाल की सीटों पर खास तौर पर वोट डिलीट हुए।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट और चुनाव आयोग का जवाब
बुधवार को इंडियन एक्सप्रेस ने रिपोर्ट छापी थी कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के फैसलों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज की। इनमें वोटर लिस्ट, नए वोटर जोड़ने और डेटाबेस से जुड़े मुद्दे शामिल थे। ये आपत्तियां मुख्य चुनाव आयुक्त को भी भेजी गईं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
चुनाव आयोग ने इसका जवाब देते हुए कहा कि बहुसदस्यीय संस्था में अलग-अलग राय आना सामान्य बात है। आयोग के अनुसार पिछले एक साल में लिए गए सभी अंतिम फैसले सर्वसम्मति से हुए हैं। SIR समेत करीब 40 सुधार और नई पहल की गई हैं।
आयोग ने साफ किया कि वोटर रजिस्ट्रेशन और नाम हटाने का काम कानूनी अधिकारियों द्वारा किया जाता है। डिजिटल सिस्टम में सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू हैं।
SIR की वर्तमान स्थिति
SIR के पहले और दूसरे चरण में 10 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश पूरे हो चुके हैं। तीसरा चरण दिल्ली, महाराष्ट्र समेत 16 राज्यों में चल रहा है। इसमें करीब 36.73 करोड़ वोटरों का सत्यापन हो रहा है। CJP ने कहा कि अगर 48 घंटे में इस्तीफा नहीं मिला तो आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा। पार्टी का आरोप है कि लोकतंत्र कमजोर किया जा रहा है, जबकि चुनाव आयोग कह रहा है कि सभी प्रक्रियाएं कानून के अनुसार और सर्वसम्मति से चलाई जा रही हैं।







