बिहार में वोटर लिस्ट रिवीजन पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई कल, ADR ने उठाए सवाल

July 27, 2025 12:32 PM
SC ON BIHAR SIR

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट 28 जुलाई को बिहार में वोटर लिस्ट के लिए चल रही विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करेगा। असोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए शनिवार को सुप्रीम कोर्ट में काउंटर हलफनामा दाखिल किया। ADR का कहना है कि चुनाव आयोग की यह प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के पहले के फैसलों का उल्लंघन करती है और मतदाताओं के साथ धोखा है। SC ON BIHAR SIR

ADR ने कोर्ट को बताया कि जिन मतदाताओं ने नामांकन फॉर्म और जरूरी दस्तावेज जमा नहीं किए हैं, उनके नाम 1 अगस्त को प्रकाशित होने वाली मसौदा वोटर लिस्ट से हटाए जा सकते हैं। अगर मतदाता बाद में दावा दायर करते हैं तो इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) उनकी पात्रता की जांच कर सकता है और नाम हटाने के लिए नोटिस जारी कर सकता है। ADR का आरोप है कि एक ERO को 3 लाख से ज्यादा फॉर्मों की जांच का जिम्मा दिया गया है जो इतनी बड़ी संख्या में सही तरीके से जांच करना लगभग असंभव है।

सबसे गंभीर आरोप यह है कि मतदाताओं की सहमति के बिना उनके नामांकन फॉर्म ऑनलाइन अपलोड किए जा रहे हैं। ADR के मुताबिक कई मामलों में मतदाताओं को फोन पर रसीद मिल रही है जबकि उन्होंने न तो कोई फॉर्म भरा और न ही बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) से मुलाकात की। यह सब चुनाव आयोग के अवास्तविक लक्ष्यों को पूरा करने के लिए किया जा रहा है। ADR ने इस प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने की मांग की है ताकि मतदाताओं के अधिकारों का हनन न हो।

पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 5 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

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