रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा स्थित शासकीय गांधी मेमोरियल अस्पताल (GMH) में प्रसव के दौरान 25 वर्षीय गर्भवती महिला कल्पना मिश्रा और उसके नवजात बच्चे की मौत का मामला सामने आया है। घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ पर गंभीर लापरवाही और पैसों की मांग के आरोप लगाए हैं। वहीं अस्पताल प्रबंधन ने इन आरोपों से अलग महिला की गंभीर स्वास्थ्य स्थिति को मौत की वजह बताया है।
25 अगस्त को अस्पताल में भर्ती हुई थीं कल्पना
बैकुंठपुर थाना क्षेत्र के हटवा गांव की रहने वाली कल्पना मिश्रा को लेबर पेन होने के बाद 25 अगस्त को शासकीय गांधी मेमोरियल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों के मुताबिक, कल्पना की यह पहली डिलीवरी थी। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में डिलीवरी के लिए उनसे 30 हजार रुपये की मांग की गई। उनका यह भी आरोप है कि पैसे नहीं देने पर महिला को अस्पताल से ले जाने के लिए कहा गया।
डिलीवरी वार्ड से रोते हुए बाहर आईं महिला
परिजनों के अनुसार, प्रसव के लिए कल्पना को लेबर रूम ले जाया गया। कुछ देर बाद वह रोते हुए बाहर आईं और अपने पिता को आवाज लगाते हुए कहा, “पापा मुझे बचा लो, ये लोग मुझे मार डालेंगे।” परिवार का दावा है कि कल्पना ने अस्पताल में मौजूद स्टाफ को लेकर डर जताया था। इसके बाद उन्हें दोबारा लेबर रूम ले जाया गया, जहां प्रसव कराया गया। प्रसव के बाद नवजात बच्चे की मौत हो गई। इसके बाद कल्पना की भी मौत हो गई।
पिता का आरोप- नर्स ने जहर का इंजेक्शन देने की बात कही
कल्पना के पिता रामशिरोमणि मिश्रा ने अस्पताल के स्टाफ पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि डिलीवरी के लिए 30 हजार रुपये की मांग की गई थी। रामशिरोमणि मिश्रा का आरोप है कि अस्पताल में मौजूद एक नर्स ने पैसे नहीं होने पर कथित तौर पर कहा था कि महिला को जहर का इंजेक्शन दे दिया जाएगा। पिता ने आरोप लगाया कि डॉक्टरों और नर्सों की लापरवाही के कारण उनकी बेटी और नवजात की मौत हुई। हालांकि, नर्स द्वारा कथित तौर पर कही गई इस बात की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
पिता ने डॉक्टर पर भी लगाए आरोप
मृतका के पिता के मुताबिक, 25 अगस्त को शाम करीब चार बजे तक कल्पना की स्थिति ठीक थी। इसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ने लगी और उसे लेबर रूम ले जाया गया।पिता का आरोप है कि लेबर रूम से बाहर आने के बाद कल्पना ने खुद को खतरा बताते हुए मदद की गुहार लगाई थी। बाद में उन्हें फिर अंदर ले जाया गया। प्रसव के बाद बच्चे की मौत हो गई और कुछ समय बाद कल्पना ने भी दम तोड़ दिया। रामशिरोमणि मिश्रा ने आरोप लगाया कि ऑपरेशन के बाद संबंधित डॉक्टर और स्टाफ मौके पर मौजूद नहीं थे और अस्पताल प्रबंधन लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों को बचाने का प्रयास कर रहा है।
अस्पताल अधीक्षक ने परिजनों के आरोपों से अलग बताई वजह
मामले पर शासकीय गांधी मेमोरियल अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा ने कहा कि घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने परिजनों द्वारा लगाए गए लापरवाही के आरोपों से अलग महिला की स्वास्थ्य स्थिति को गंभीर बताया। अधीक्षक के मुताबिक, अस्पताल के रिकॉर्ड की जांच में सामने आया कि गर्भावस्था के दौरान कल्पना की आवश्यक जांचें पर्याप्त संख्या में नहीं हुई थीं। उन्होंने बताया कि महिला की जांच कम संख्या में हुई थी और उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार उनमें से जांचें निजी अस्पताल में कराई गई थीं। डॉ. राहुल मिश्रा ने यह भी कहा कि महिला को गर्भावस्था के दौरान मस्तिष्क से जुड़ी समस्या थी, जिसके कारण उसकी स्थिति बिगड़ने पर रक्तचाप और हृदय गति बढ़ गई थी।
अस्पताल का दावा- महिला की हालत गंभीर थी
अस्पताल अधीक्षक ने बताया कि महिला की स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों और स्टाफ ने उसे संभालने और समझाने का प्रयास किया। उनके अनुसार, स्वास्थ्य संबंधी समस्या के कारण कल्पना घबराई हुई थीं और उनका व्यवहार असामान्य हो गया था।अधीक्षक का कहना है कि अस्पताल पहुंचने के बाद जांच की प्रक्रिया पूरी की गई और महिला की स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास किए गए। इसके बाद प्रसव कराया गया, लेकिन डॉक्टर मां और बच्चे दोनों को बचाने में सफल नहीं हो सके।
मौत के बाद उठे कई सवाल
कल्पना और उनके नवजात की मौत के बाद परिवार ने अस्पताल में इलाज के दौरान कथित लापरवाही और पैसों की मांग के आरोप लगाए हैं। दूसरी ओर, अस्पताल प्रशासन ने महिला की गंभीर स्वास्थ्य स्थिति और गर्भावस्था के दौरान पर्याप्त जांच नहीं होने को मामले का महत्वपूर्ण पहलू बताया है। फिलहाल, महिला की मौत के कारणों और परिजनों की ओर से लगाए गए आरोपों की पुष्टि संबंधित जांच और उपलब्ध चिकित्सकीय रिकॉर्ड के आधार पर ही हो सकेगी।









