सेप्टिक टैंक में मौतः जिम्मेदार कौन?

March 18, 2026 9:17 PM
Raipur Septic Tank Accident

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के निजी अस्पताल रामकृष्ण केयर में मंगलवार रात सेप्टिक टैंक में दम घुटने से हुई तीन मजदूरों की मौत सिर्फ एक हादसा नहीं है, बल्कि इसे सांस्थानिक तरीके से हुई हत्या कहा जाना चाहिए!

इस खबर के दो दिन पहले ही केंद्र सरकार ने लोकसभा को बताया था कि 2017 से पिछले नौ सालों में पूरे देश में 622 सफाई कर्मचारियों की सीवर या सेप्टिक टैंक की सफाई करते समय मौत हो गई। इनमें से 52 परिवारों को कोई मुआवजा तक नहीं मिला है!

यह तब है, जब 12 साल पहले प्रधानमंत्री मोदी ने 2 अक्टूबर, 2014 को बड़े जोर-शोर से स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत की थी। बेशक खुले में शौच और कुछ हद तक सिर पर मैला ढोने की प्रथा पर रोक लगी है, लेकिन सीवेज और सेप्टिक टैंक में होने वाली मौतों को रोकने में पूरा तंत्र नाकाम है।

जिन बदतर हालात और जान को जोखिम में डालकर इन सफाई कर्मियों को सीवर और सेप्टिक टैंक में उतर कर काम करना पड़ता है, उसका तो बहुत से लोगों को अंदाजा भी नहीं होगा। रायपुर की ही घटना को देखें, तो वहां इन तीनों मजदूरों को पचास फीट गहरे सेप्टिक टैंक में उतरना पड़ा और वह भी बिना किसी सुरक्षा उपकरण के!

अस्पताल ने मृतकों के परिजनों के लिए मुआवजे का एलान किया है और यह कहते अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है कि उसने तो यह काम ठेके पर देखा रखा।

मगर असल सवाल तो यही है कि आखिर आज भी मैन्युअल तरीके से सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई क्यों की जा रही है और इसके लिए जिम्मेदार कौन है?

संविधान की सातवीं अनुसूची के मुताबिक स्वच्छता और सफाई राज्य का विषय है, लेकिन केंद्र सरकार अपनी नीतिगत विफलता से बच नहीं सकती।

गजब यह है कि योजनाओं के नामों को हिंदी और अंग्रेजी के साथ घालमेल कर कोई आकर्षक संक्षेप बनाने में माहिर सरकार ने सीवर और सेप्टिक टैंकों में जोखिम के साथ सफाई करने वाले कर्मियों को इससे मुक्ति दिलाने के लिए एक नाम ढूंढ रखा है।

सामाजिक न्याय और सबलीकरण विभाग ने आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के साथ मिलकर 2023-24 में सीवर और सेप्टिक टैंकों की जोखिम भरी सफाई से मुक्ति के लिए एक योजना की शुरुआत की थी, जिसे नेशनल एक्शन फॉर मेकेनाइज्ड सैनिटेसन इकोसिस्टम (NAMASTE यानी नमस्ते) नाम से जाना जाता है।

क्या यह याद दिलाने की जरूरत है कि केंद्र की मोदी सरकार ने इसी ‘नमस्ते’ योजना के तहत 2023 के बजट में सभी शहरों और कस्बों में सेप्टिक टैंकों और सीवरों की सौ फीसदी मेकेनिकल तरीके से सफाई करने का वादा किया था!

और सच्चाई? हम सबके सामने है। खुद सरकार ने माना है कि सेप्टिक टैंक और सीवरों में जहरीली गैसों से होने वाली मौतें थमी नहीं हैं।

रायपुर की ही बात करें, तो यहां दो साल पहले एक नामी फुड चेन अशोका बिरयानी के एक आउटलेट में सीवेज टैंक साफ करते समय दो सफाई कर्मचारियों की मौत हो गई थी।

बात सिर्फ जोखिम की नहीं, बल्कि सामाजिक बहिष्करण की भी है, जिसके दंश से ये सफाई कर्मचारी बचे नहीं हैं। जाहिर है, इस पूरे मामले में समग्रता से विचार करने की जरूरत है। ऐसी हर घटना नगर निकाय से लेकर राज्य सरकार और केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा करती है।

यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि इस आपराधिक लापरवाही के लिए जो भी जिम्मेदार हों उन्हें बख्शा न जाए।

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