बाल विवाह जैसी कुरीति रोकने के लिए जन जागरण जरूरी : डॉ. दिनेश मिश्र

नई दिल्ली। अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ. दिनेश मिश्र (Dr. Dinesh Mishra) ने बाल विवाह जैसी घातक सामाजिक कुरीति के पूर्ण उन्मूलन के लिए समाज के सभी वर्गों में जन जागरण की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा की कमी, जागरूकता का अभाव और पुरानी परंपराओं के नाम पर होने वाले बाल विवाह समाज के लिए अभिशाप बन गए हैं। डॉ. मिश्र ने सभी जागरूक नागरिकों से अपील की कि वे बाल विवाह को रोकने में सक्रिय भूमिका निभाएं।

डॉ. मिश्र ने बताया कि साल भर बाल विवाह होते रहते हैं लेकिन रामनवमी से अक्षय तृतीया के बीच इनकी संख्या सबसे ज्यादा हो जाती है। कई मामलों में वर-वधू इतने छोटे होते हैं कि वे अंगूठा चूसते हुए अपनी माँ की गोद में बैठे रहते हैं, जबकि कुछ मामलों में 10-11 वर्ष की बालिकाओं की शादी कर दी जाती है। इस उम्र में बच्चे न तो शारीरिक और न ही मानसिक रूप से विवाह जैसी जिम्मेदारी निभाने के योग्य होते हैं।

बाल विवाह से बालिकाओं की पढ़ाई छूट जाती है और उन्हें कम उम्र में ही मातृत्व का बोझ उठाना पड़ता है जिसके लिए वे शारीरिक व मानसिक रूप से तैयार नहीं होतीं। डॉ. दिनेश मिश्र ने स्पष्ट किया कि बाल विवाह न तो किसी धर्म में स्वीकार्य है और न ही प्राचीन भारतीय व्यवस्था में इसे उचित माना गया है।

प्राचीन काल में शिक्षा पूरी करने के बाद युवावस्था में विवाह को उचित बताया गया था। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि यदि उनके आसपास कहीं भी नाबालिग बच्चों की शादी हो रही हो तो तुरंत पुलिस प्रशासन या अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति को सूचना दें ताकि समय रहते रोकथाम की जा सके और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।

डॉ. मिश्र ने कहा कि बाल विवाह न केवल बालिकाओं की सेहत और भविष्य को खतरे में डालता है, बल्कि प्रसूति के समय अल्पवयस्क बालिकाओं की मृत्यु का खतरा भी बढ़ा देता है। समाज को इस कुरीति को जड़ से खत्म करने के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे।

यह भी पढ़ें: क्या सिजिमाली का संघर्ष भी नियमगिरि की तरह इतिहास बनाएगा?

पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 6 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, हेल्थ, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Related Stories