Parliament Session 2026 : संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण का पहला दिन हंगामे से शुरू हुआ। लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में विपक्ष ने अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध पर तुरंत चर्चा की मांग की जबकि सरकार ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के जरिए स्थिति पर विस्तार से जानकारी दी। विपक्ष ने सदन में नारेबाजी की और राज्यसभा में वॉकआउट तक कर दिया।
विपक्षी सांसदों ने ‘We Want Discussion’ के नारे लगाए और विदेश मंत्री को बोलने नहीं दिया। लोकसभा में पीठासीन अधिकारी जगदंबिका पाल ने विपक्ष से शांति बनाए रखने की अपील की, लेकिन हंगामा जारी रहा। राज्यसभा में विपक्ष ने वॉकआउट किया। विपक्ष के नेता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने संसद के मकर द्वार पर विरोध प्रदर्शन भी किया। खड़गे ने कहा कि पश्चिम एशिया में बदलते हालात भारत को प्रभावित कर रहे हैं। भारत अपनी 55% ऊर्जा जरूरतें वहां से पूरी करता है और वहां करीब 1 करोड़ भारतीय काम करते हैं। हालात खराब होने से कई भारतीयों की जान गई और कई लापता हैं।
विदेश मंत्री जयशंकर ने बताई तीन मुख्य प्राथमिकताएं
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने राज्यसभा और लोकसभा दोनों में स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि भारत की नीति तीन मुख्य सिद्धांतों पर टिकी है, भारत शांति का समर्थन करता है और संवाद, कूटनीति, तनाव कम करने, संयम और नागरिकों की सुरक्षा की अपील करता है। क्षेत्र में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा और कल्याण सर्वोच्च प्राथमिकता है। भारत के राष्ट्रीय हित, खासकर ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार, सबसे महत्वपूर्ण रहेंगे।
जयशंकर ने जोर दिया कि भारतीय उपभोक्ता के हित सर्वोपरि हैं। भारत हमेशा बाजार की वास्तविकता और राष्ट्रीय जरूरतों के आधार पर ऊर्जा नीति बनाएगा ताकि 1.4 अरब लोगों को सस्ती और सुरक्षित ऊर्जा मिलती रहे। विदेश मंत्री ने बताया कि ‘8 मार्च तक करीब 67,000 भारतीय अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पार कर चुके हैं। खाड़ी देशों में 1 करोड़ भारतीय काम करते हैं और ईरान में भी कुछ हजार छात्र और कामगार हैं। सरकार लगातार गल्फ देशों और ईरान के संपर्क में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद गल्फ नेताओं से बात की है। सभी मंत्रालय समन्वय कर रहे हैं और जरूरतमंदों की मदद के लिए तैयार हैं।’
जयशंकर ने दुख जताया कि संघर्ष में दो भारतीय नाविकों की जान गई और एक अभी लापता है। 14 जनवरी को शिपिंग डायरेक्टरेट जनरल ने भारतीय नाविकों को एम्बेसी की एडवाइजरी मानने और अनावश्यक रूप से किनारे पर न आने की सलाह दी थी। उन्होंने कहा कि ईरान की लीडरशिप से संपर्क मुश्किल है, लेकिन भारत बातचीत के पक्ष में है। ईरान के विदेश मंत्री ने भारतीय बंदरगाह पर ईरानी युद्धपोत को डॉक करने की अनुमति देने के लिए धन्यवाद दिया है।
विदेश मंत्री ने कहा कि 28 फरवरी से मध्य पूर्व में तनाव बढ़ा है। खाड़ी देशों में हालात तनावपूर्ण हैं और लड़ाई कुछ अन्य देशों में भी फैल गई है। इंफ्रास्ट्रक्चर तबाह हुआ है और कई नेताओं की मौत हुई है। CCS (कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी) की बैठक में भारतीयों की सुरक्षा पर चर्चा हुई। सरकार सभी विभागों को जरूरी निर्देश दे चुकी है।











