कोलकाता। पश्चिम बंगाल में Mamata Banerjee की तृणमूल कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। राज्य की कई नगरपालिकाओं में टीएमसी के 100 से ज्यादा पार्षदों ने इस्तीफा दे दिया है, जबकि कई नेताओं के भाजपा के संपर्क में होने की चर्चा तेज हो गई है। इस घटनाक्रम के बाद पूर्व मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी ने पार्टी नेताओं और पार्षदों की आपात बैठक बुलाई है।
इंडिया टुडे के अनुसार, सबसे बड़ा असर उत्तर 24 परगना और आसपास के नगरपालिका क्षेत्रों में देखा गया है। भाटपाड़ा नगरपालिका में 35 में से 30 पार्षदों ने इस्तीफा दिया। हलिशहर में 23 में से 16, कांचरापाड़ा में 14, गरुलिया में 18 और नॉर्थ बैरकपुर में 15 पार्षदों के पद छोड़ने की खबर सामने आई है। कांथी और डायमंड हार्बर में भी कई पार्षदों ने इस्तीफा दिया है।
विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि विधानसभा चुनाव में हार के बाद टीएमसी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है और कई वरिष्ठ नेता भी पार्टी नेतृत्व से नाराज़ बताए जा रहे हैं।
इसी बीच द मिंट ने खबर दी है कि टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की प्रशासनिक बैठक में शामिल हुई हैं। यह भी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसे पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी का संकेत माना जा रहा है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ममता बनर्जी ने पार्टी नेताओं से एकजुट रहने की अपील की है। स्थानीय अखबारों के मुताबिक उन्होंने नेताओं से कहा कि ‘कठिन समय में पार्टी को साथ लेकर चलना होगा।’
वहीं भाजपा इस घटनाक्रम को टीएमसी के ‘तेजी से टूटते संगठन’ का संकेत बता रही है। भाजपा नेताओं का दावा है कि आने वाले दिनों में और भी कई स्थानीय नेता पार्टी छोड़ सकते हैं।
माना जा रहा है कि अगर नगर निकायों में यह टूट जारी रहती है, तो आगामी कोलकाता नगर निगम और अन्य स्थानीय निकाय चुनावों में इसका बड़ा असर दिखाई दे सकता है।










