ज्ञानेश के खिलाफ कांग्रेस, दमदार दिल्ली–हल्ला

नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR में कथित गड़बड़ियों और वोट चोरी के आरोपों को लेकर विपक्षी इंडिया गठबंधन ने दिल्ली में प्रदर्शन किया। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की अगुवाई में विपक्षी नेताओं ने बाराखंभा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला। इस दौरान कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा, मल्लिकार्जुन खड़गे, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव समेत कई विपक्षी नेता मौजूद रहे।

विपक्ष ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आरोप उठाए गए हैं। विपक्ष की प्रमुख मांगों में SIR की प्रक्रिया पर रोक लगाने, मतदाता सूची की निष्पक्ष जांच कराने और कथित वोट चोरी के मामले में मुख्य निर्वाचन आयुक्त की जवाबदेही तय करने की मांग शामिल है।

कांग्रेस ने इस प्रदर्शन को ‘चलो दिल्ली-लोकतंत्र के लिए मार्च’ नाम दिया। विपक्षी नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा केवल राजनीतिक दलों का नहीं, बल्कि देश के लोकतंत्र और नागरिकों के मतदान के अधिकार से जुड़ा है।

राहुल गांधी, प्रियंका और अखिलेश समेत कई नेता मार्च में शामिल

विपक्ष के इस मार्च में इंडिया गठबंधन के कई घटक दलों के नेता शामिल हुए। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव और अन्य विपक्षी नेता सुप्रीम कोर्ट की ओर बढ़े। मार्च में कुछ नेता बस और वाहनों से पहुंचे, जबकि कई नेता पैदल आगे बढ़े।

प्रदर्शन में नेताओं के अलावा वकीलों, वामपंथी संगठनों और छात्र संगठनों से जुड़े लोगों ने भी हिस्सा लिया। हालांकि, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) इस प्रदर्शन में शामिल नहीं रही। इससे पहले CJP ने दिल्ली में अलग से विरोध प्रदर्शन किया था।

मार्च से पहले राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विपक्ष के आंदोलन का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि विपक्ष लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेगा। उन्होंने प्रदर्शन को व्यापक भागीदारी वाला आंदोलन बताते हुए कहा कि इसमें अलग-अलग राजनीतिक दलों, नागरिक संगठनों और युवाओं के शामिल होने की गुंजाइश है।

CJI सूर्यकांत से मिलने का समय मांगा लेकिन नहीं मिली मुलाकात

सुप्रीम कोर्ट तक मार्च से पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को पत्र लिखकर मुलाकात का समय मांगा था। विपक्षी नेता उन्हें ज्ञापन सौंपना चाहते थे, ताकि SIR और मतदाता सूची से जुड़ी कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर अपनी चिंताएं रख सकें।

हालांकि, CJI ने विपक्षी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात करने से इनकार कर दिया। उन्होंने अपने जवाब में मुलाकात नहीं कर पाने के कारणों का उल्लेख किया और कहा कि लंबित मामलों पर चर्चा करना उचित नहीं होगा। उन्होंने विपक्षी नेताओं को अदालत में व्यक्तिगत रूप से या ऑनलाइन याचिका दाखिल करने को कहा। इसके बाद विपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने और कानूनी प्रक्रिया के जरिए अपनी मांगें रखने का फैसला किया।

CJI ने कहा- सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सभी के लिए खुले

समय नहीं है CJI के इस बयान के काफी विरोध के बाद cji सूर्यकांत ने कहा कि देश के हर नागरिक को न्याय के लिए अदालत जाने का अधिकार है। उनके मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे आम नागरिकों और निर्वाचित प्रतिनिधियों सभी के लिए खुले हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी नागरिक या निर्वाचित प्रतिनिधि की याचिका का स्वागत है। CJI के इस बयान के बाद विपक्ष के लिए याचिका दाखिल करने का कानूनी रास्ता खुला रहा। हालांकि, विपक्षी नेता उनसे सीधे मिलकर ज्ञापन सौंपना चाहते थे, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी।

SIR में गड़बड़ी को लेकर क्या हैं विपक्ष के आरोप?

विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने और अन्य अनियमितताओं की आशंका है। विपक्षी दलों का कहना है कि यदि मतदाता सूची में गलत तरीके से नाम हटाए जाते हैं या पात्र मतदाता मतदान से वंचित होते हैं, तो इससे चुनाव की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है।

इसी आधार पर विपक्ष ने SIR की प्रक्रिया पर रोक लगाने और कथित वोट चोरी के आरोपों की जांच कराने की मांग की है। विपक्ष मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर भी सवाल उठा रहा है और उनके इस्तीफे की मांग कर रहा है।

सुप्रीम कोर्ट में किसने दाखिल की याचिका?

SIR से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर दाखिल याचिका में विपक्ष के 10 राजनीतिक दलों के 11 नेताओं को याचिकाकर्ता बताया गया है। इनमें कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल और वामपंथी दलों समेत कई विपक्षी दलों के नेता शामिल हैं।

याचिकाकर्ताओं की सूची इस प्रकार है:

  1. राहुल गांधी — भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
  2. मल्लिकार्जुन खड़गे — भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
  3. सौगत राय — तृणमूल कांग्रेस
  4. अखिलेश यादव — समाजवादी पार्टी
  5. तेजस्वी प्रसाद यादव — राष्ट्रीय जनता दल
  6. संजय राउत — शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे)
  7. एम. ए. बेबी — भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी)
  8. डी. राजा — भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी
  9. महुआ माझी — झारखंड मुक्ति मोर्चा
  10. सुप्रिया सुले — राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार)
  11. ई. टी. मोहम्मद बशीर — इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग

याचिका में चुनाव आयोग और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पक्षकार बनाया गया है।

राहुल गांधी की लीगल टीम भी पहुंची सुप्रीम कोर्ट

प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी की कानूनी टीम सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री पहुंची। टीम की ओर से याचिका दाखिल करने से जुड़ी प्रक्रिया पूरी करने के लिए समय बढ़ाने का अनुरोध किए जाने की जानकारी सामने आई।

सुप्रीम कोर्ट की ओर से कांग्रेस के सीमित प्रतिनिधिमंडल को परिसर के भीतर फाइलिंग काउंटर तक जाने की अनुमति दिए जाने की बात भी सामने आई। वहीं, सुरक्षा व्यवस्था के कारण मार्च में शामिल बाकी नेताओं और कार्यकर्ताओं की आवाजाही नियंत्रित रही।

इस घटनाक्रम से साफ है कि विपक्ष ने राजनीतिक विरोध के साथ-साथ कानूनी रास्ते से भी अपनी मांगें उठाने की कोशिश की है।

दिल्ली में सुरक्षा बढ़ाई गई, कई मेट्रो स्टेशन बंद

विपक्ष के मार्च को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। सुप्रीम कोर्ट और उसके आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों और सुरक्षा बलों को तैनात किया गया।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद दिल्ली मेट्रो के कई स्टेशनों पर भी सेवाएं अस्थायी रूप से बंद किए जाने की खबर आती रही। इनमें राजीव चौक, पटेल चौक, केंद्रीय सचिवालय, मंडी हाउस और बाराखंभा रोड जैसे स्टेशन शामिल बताए गए। राहुल गांधी ने प्रदर्शन से पहले आरोप लगाया कि दिल्ली को किले में तब्दील कर दिया गया है और लोगों को राजधानी पहुंचने से रोका जा रहा है। उन्होंने बसों और ट्रेनों से लोगों को उतारे जाने का भी आरोप लगाया

विपक्ष ने SIR की प्रक्रिया पर रोक लगाने, कथित वोट चोरी की जांच कराने और मुख्य निर्वाचन आयुक्त की जवाबदेही तय करने की मांग के साथ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।

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