ONGC ने अरब सागर में दिखाया दम, शुरू किया गैस उत्‍पादन

April 1, 2026 9:00 PM
ONGC

नई दिल्‍ली। ऐसे मुश्किल वक्‍त में जब देश बाहर से आने वाले कच्‍चे और गैस की कमी से जूझ रहा है, तब ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ONGC) ने दिखा दिया कि ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने करने में उसकी क्षमताएं क्‍या हैं।  

पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी आपूर्ति बाधाओं के बीच भारत को घरेलू ऊर्जा उत्पादन में एक महत्वपूर्ण सफलता मिली है। ONGC ने अरब सागर में अपने दमन अपसाइड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट (DUDP) से गैस के व्यावसायिक उत्पादन की शुरुआत कर दी है। 29 मार्च को प्लेटफॉर्म B-12-24P से गैस की सप्‍लाई शुरू हुई, जिसे सीधे गुजरात के हजीरा प्लांट भेजा जा रहा है।

ONGC ने अपनी एक्‍स पोस्‍ट में बताया है कि यह प्रोजेक्ट मुंबई से लगभग 180 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम और पिपावाव (गुजरात) से करीब 80 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है। ONGC के अनुसार, इसकी कुल लागत लगभग 1 अरब अमेरिकी डॉलर (करीब 8,000 करोड़ रुपये) है और इसमें चार नए वेलहेड प्लेटफॉर्म तथा 140 किलोमीटर पाइपलाइन शामिल हैं।

प्रोजेक्ट को कॉन्ट्रैक्ट अवार्ड मिलने के महज दो साल के अंदर पूरा कर लिया गया, जो ONGC की परियोजना निष्पादन क्षमता में सुधार को दर्शाता है। कंपनी ने Drill-Deck जैसी नवीन तकनीक और ड्रिलिंग-प्रोडक्शन टीमों के बेहतर प्रदर्शन का श्रेय इस तेजी को दिया है।

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क्षमता और लक्ष्य

यह उपलब्धि ONGC के समुद्री क्षेत्र में विस्तार की व्यापक योजना का हिस्सा है। कंपनी अगले कुछ वर्षों में गैस उत्पादन को और बढ़ाने पर जोर दे रही है। DUDP की सफल शुरुआत न केवल ऊर्जा आपूर्ति को मजबूत करेगी, बल्कि उर्वरक, बिजली और औद्योगिक क्षेत्रों को स्थिर सप्लाई सुनिश्चित करने में भी सहायक साबित होगी।

ONGC के इस कदम से भारत की ऊर्जा सुरक्षा को एक ठोस बढ़ावा मिला है, खासकर जब वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन में अनिश्चितता बनी हुई है। आगे उत्पादन बढ़ने के साथ यह प्रोजेक्ट देश की ऊर्जा जरूरतों को घरेलू स्तर पर पूरा करने में और अधिक योगदान देगा।

DUDP का लक्ष्य कुल 21.5 बिलियन क्यूबिक मीटर गैस उत्पादन करना है। अपनी उच्‍च क्षमता पर यह प्रोजेक्ट प्रतिदिन लगभग 5 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर गैस का उत्पादन कर सकता है। फिलहाल उत्पादन की शुरुआत हुई है और सभी कुओं से आउटपुट को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया जाएगा। ONGC ने वर्तमान फ्लो रेट की सटीक जानकारी नहीं दी है, लेकिन यह कदम कंपनी की समुद्री गैस उत्पादन को मजबूत करने की दिशा में है।

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी अनिश्चितताओं ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित किया है। भारत अपनी प्राकृतिक गैस की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है, जिसमें कतर से आने वाली LNG महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। हाल के घटनाक्रमों में कतर की कुछ उत्पादन सुविधाओं पर असर पड़ा है, जिससे भारत में औद्योगिक क्षेत्रों को गैस सप्लाई घटानी पड़ी है। ऐसे में घरेलू स्रोतों से उत्पादन बढ़ाना ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से रणनीतिक रूप से अहम है।

भारत विश्व का चौथा सबसे बड़ा LNG आयातक है और कतर से उसकी निर्भरता काफी अधिक रही है। क्षेत्रीय तनाव के चलते tanker दरें बढ़ी हैं और वैकल्पिक स्रोतों की तलाश तेज हो गई है। DUDP जैसी परियोजनाएं भारत को आयात पर निर्भरता कम करने और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने में मदद करेंगी।

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