नेशनल ब्यूरो। नई दिल्ली
लोकसभा में विपक्ष की ओर से लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव ध्वनि मत के जरिए अस्वीकार कर दिया गया। इस प्रस्ताव को लेकर सदन में दो दिनों तक चर्चा चली। बहस के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पीकर का समर्थन करते हुए विपक्ष की आलोचना की। अंत में मतदान के दौरान प्रस्ताव को ध्वनि मत से खारिज कर दिया गया। इसके साथ ही ओम बिरला लोकसभा अध्यक्ष के पद पर बने रहेंगे।
ध्वनि मत से पहले अमित शाह ने कहा कि मैं विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश नहीं कर रहा विपक्ष की आवाज तब दबाई गई थी जब 1975 में समूचा विपक्ष जेल में बंद कर दिया गया था। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को लेकर कहा कि जब बोलना होता है आप जर्मनी होते हैं विदेश होते हैं। अमित शाह द्वारा राहुल पर सदन में आंख मारने की टिप्पणी पर विपक्ष आगबबूला हो गया और सदन में अमित शाह माफी मांगों के नारे लगाने लगा।
अमित शाह ने याद दिलाया कि कांग्रेस के शासनकाल में स्पीकर के खिलाफ लाए गए पिछले अविश्वास प्रस्तावों में, स्पीकर केवल बहस के दौरान ही अध्यक्षता नहीं करते थे, लेकिन बिरला ने नैतिक आधार पर प्रस्ताव के निपटारे तक पूरी कार्यवाही में भाग न लेने का विकल्प चुना था।
अमित शाह ने विपक्ष को कहा कि आपके लिए कोई विशेष अधिकार नहीं, कोई आपातकाल नहीं है। शाह ने कहा कि विपक्ष चाहता है कि उनके द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली भाषा को बरकरार रखा जाए, शाह ने राहुल पर निशाना साधा मैं समझता हूं कि किसी के सलाहकार कार्यकर्ता हो सकते हैं, लेकिन उन्हें यहां सदन की प्रक्रिया का पालन करना होगा।
अमित शाह ने कहा कि महिला सांसद प्रधानमंत्री की कुर्सी के पास भी नहीं जा सकतीं। विपक्षी नेताओं द्वारा कही गई बातों को रिकॉर्ड से हटाए जाने की शिकायतों के संबंध में शाह ने कहा कि असंसदीय शब्दों को रिकॉर्ड से हटाना ही पड़ता है। लेकिन यहां वे चाहते हैं कि उनके द्वारा इस्तेमाल की गई हर भाषा को बरकरार रखा जाए। सदन इस तरह से काम नहीं करता, उन्होंने जोर देकर कहा।
यह अविश्वास प्रस्ताव कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने पेश किया था और इसे 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिला, जिसके बाद सदन में इस पर औपचारिक रूप से चर्चा शुरू हो गई। अध्यक्ष के खिलाफ लाए गए इस प्रस्ताव को विपक्ष का भी भरपूर समर्थन प्राप्त था।
118 विपक्षी सांसदों ने इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए थे। जिसमें आरोप लगाया गया है कि ओम बिरला ने “पक्षपातपूर्ण व्यवहार” किया और अध्यक्ष पद से अपेक्षित निष्पक्षता बनाए रखने में विफल रहे।
सदन की अध्यक्षता कर रही भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया और बहस के लिए 10 घंटे का समय आवंटित किया। उन्होंने सदस्यों से प्रस्ताव पर ध्यान केंद्रित रखने का आग्रह किया।
मंगलवार को विपक्ष और सत्ताधारी भाजपा के बीच तीखी नोकझोंक के बीच बहस शुरू हुई। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि प्रस्ताव का उद्देश्य संसद की गरिमा की रक्षा करना है, न कि बिरला को व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाना। वहीं संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने अध्यक्ष का बचाव किया और राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं की आलोचना की।
यह भी पढ़ें : मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग लाने का प्रस्ताव











