पटना। बिहार के सीएम नीतीश कुमार के राज्यसभा के लिए नामांकन करते ही उनकी सियासी पारी पर सवाल खड़े होने लगे। साथ ही यह भी बिहार का अगला सीएम बीजेपी से होगा या जेडीयू से। इसी बीच जेडीयू वरिष्ठ नेता के.सी. त्यागी के बयान कि “नीतीश युग का कभी अंत नहीं हो सकता”, ने सियासी सरगर्मी को और बढ़ा दिया है।
नीतीश कुमार ने राज्यसभा में जाने का औपचारिक ऐलान 5 मार्च को अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए किया था। होली के मौके पर शुरू हुई इस चर्चा ने जेडीयू कार्यकर्ताओं और नेताओं को भी स्तब्ध कर दिया है, क्योंकि कई लोग इसे बिहार की सत्ता से उनके सीधे जुड़ाव के कम होने के रूप में देख रहे हैं।
जदयू के वरिष्ठ नेता के.सी. त्यागी ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए मजबूती से कहा कि ‘नीतीश युग’ का कभी अंत नहीं हो सकता। उन्होंने नीतीश कुमार को बिहार के विकास का नायक बताया और कहा कि उन्होंने राज्य को एक नया रूप दिया है। त्यागी ने तुलना करते हुए कहा कि जैसे कर्पूरी ठाकुर और चौधरी चरण सिंह आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं, वैसे ही नीतीश कुमार का नाम भी आने वाली पीढ़ियां युगों तक याद रखेंगी।
त्यागी ने आगे कहा कि नीतीश कुमार राज्यसभा में जाने से उच्च सदन की गरिमा और भी बढ़ेगी। उन्होंने याद दिलाया कि 2001 में अपनी बौद्धिक क्षमता और काम के कारण नीतीश को सर्वश्रेष्ठ सांसद का सम्मान भी मिल चुका है।
नीतीश कुमार के इस कदम से पहले कई दिनों से अटकलें लग रही थीं, लेकिन उन्होंने खुद पोस्ट करके सस्पेंस खत्म किया। जेडीयू के अन्य नेताओं ने कहा कि अंतिम फैसला नीतीश कुमार ही लेंगे और पार्टी उनके निर्णय का सम्मान करती है।
हालांकि इस खबर से बिहार में मुख्यमंत्री पद को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं और कई लोग इसे राजनीतिक उत्तराधिकार की दिशा में कदम मान रहे हैं।
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