व्यवस्था की आंखों में मोतियाबिंद !

New Rajesh Hitech Hospital Gorakhpur

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ के गृह क्षेत्र गोरखपुर में मोतियाबिंद ऑपरेशन के एक कैंप में संक्रमण की वजह से नौ लोगों की आँखें निकालने की घटना बेहद दर्दनाक होने के साथ ही आपराधिक लापरवाही का नतीजा है। पता चला है कि गोरखपुर के न्यू राजेश हाईटेक हॉस्पिटल में एक फरवरी को इस कैंप का आयोजन किया गया था, जिसमें फैले संक्रमण के कारण दस अन्य लोगों की आंखों की रोशनी भी चली गई है।

इस अस्पताल में मोदी सरकार की बहुप्रचारित आयुष्मान योजना के तहत 30 मरीजों की आंखों के मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया गया था। आयुष्मान योजना की आड़ में अस्पतालों की मिलीभगत और गड़बड़ियों पर तो अलग से बात हो सकती है। लेकिन ताजा मामले में देखा जा सकता है कि किस हद तक लापरवाही बरती गई है कि लोगों की आंखें तक निकालनी पड़ गईं। यह बताने की जरूरत नहीं है कि इससे पीड़ित वे लोग हैं, जिनकी पहुंच से महंगा इलाज बहुत दूर है।

यह पीड़ादायक खबर ऐसे समय आई है, जब देश की राजधानी में एआई समिट में प्रोद्योगिकी के विकास के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं और बताया जा रहा है कि मेडिकल साइंस में एआई चमत्कार ला देगा। दूसरी ओर मोतियाबिंद के ऑपरेशन के दौरान फैले संक्रमण से लोगों की आंखें चली जा रही हैं।

वास्तविकता यह है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इसी महीने आई प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल लैंसेट की एक रिपोर्ट के हवाले से कहा है कि दुनियाभर में 9.4 करोड़ लोग मोतियाबिंद से ग्रस्त हैं, और उनमें से अधिकांश लोग इलाज से दूर हैं। यह कितनी बड़ी चुनौती है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 2030 तक मोतियाबिंद के ऑपरेशन की रफ्तार में 30 फीसदी बढ़ोतरी करने का लक्ष्य है।

दो साल पहले सरकार ने संसद में बताया था कि देश में मोतियाबिंद के 83.4 लाख ऑपरेशन किए गए थे। जाहिर है, भारत में भी यह एक आम बीमारी है। पर सवाल यही है कि इससे निपटने के तरीके क्या हैं और हमारे पास कैसे संसाधन हैं?

गोरखपुर में हुई यह घटना कोई पहली घटना नहीं। पिछले साल मध्य प्रदेश के ग्वालियर इलाके में मोतियाबिंद ऑपरेशन के एक ऐसे ही कैंप में फैले संक्रमण से कई लोगों की आंखों की रोशनी चली गई थी। छत्तीसगढ़ के सुदूर आदिवासी जिले बीजापुर में भी मोतियाबिंद ऑपरेशन में संक्रमण के कारण कई लोग गंभीर रूप से बीमार हो गए थे।

दरअसल सवाल यह भी है कि यह आम सी लगनी वाली बीमारी सरकार की स्वास्थ्य प्राथमिकताओं और उसकी नीतियों में कहा हैं? अभी तो सबसे पहले यही जरूरी है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को मोतियाबिंद के ऑपरेशन के शिविरों के लिए कड़े मानदंड तैयार करने चाहिए और ध्यान रहे उन पर कड़ाई से पालन भी हो।

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