“यह फैसला गरीब और मध्यम वर्ग के लिए आर्थिक बोझ बढ़ाने वाला है। सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोग दैनिक जरूरतों के लिए भारत-नेपाल व्यापार पर निर्भर हैं, ऐसे में इस तरह का टैक्स उनके जीवन पर सीधा असर डाल रहा है। आम लोगों को भी काफी परेशानी हो रही है।” बिहार सुपौल जिला स्थित कुनौली के रहने वाले अनुराग शुभम बताते हैं।
“सरकार जानबूझकर सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों को परेशान कर रही है, इससे आम जनता के बीच सरकार के प्रति गंभीर असंतोष बढ़ेगा। यह फैसला मधेश क्षेत्र के लोगों के जीवन की असलियत को नजरअंदाज करता है।” नेपाल के बारा जिला मुख्यालय के शिवम कुमार बताते हैं।
नेपाल के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री बालेन शाह ने एक नियम लागू किया है। इस नियम के मुताबिक भारत से 100 नेपाली रुपये (63 भारतीय रुपये) से अधिक की खरीदारी पर नेपाल जाने वालों को अब भंसार यानी कस्टम शुल्क देना अनिवार्य है। नियम का उल्लंघन करने पर सामान जब्त कर लिया जाएगा। नया नियम मंगलवार यानी 14 अप्रैल से लागू भी कर दिया गया है। खास कर रक्सौल, जोगबनी बॉर्डर पर इसे सख्ती से लागू कर दिया गया है। यहां सामानों पर 5 फीसदी से 80 फीसदी तक टैक्स वसूला जा रहा है। सुरक्षा कर्मियों के अनुसार नियम लागू होने के महज 24 घंटे के भीतर 15 लाख रुपए से अधिक के कपड़ों की जब्ती की गई है।
100 रुपये से अधिक मूल्य के सामान पर अनिवार्य ड्यूटी लागू होने से सीमावर्ती जनजीवन और स्थानीय व्यापार काफी प्रभावित हुआ है। सरकार के इस फैसले के बाद भारत से ज्यादा नेपाल के लोग गुस्से में हैं। धारचूला से दार्जिलिंग तक सीमावर्ती बाजारों में नेपाली नागरिकों की आवाजाही इस नियम के कारण काफी घटी है। यह सख्ती न केवल नेपाल के लोगों को प्रभावित कर रही है, बल्कि भारतीय व्यापारियों को भी भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। विरोध में नेपाल भर में जगह-जगह प्रदर्शन शुरू हो चुके हैं।
बेटी-रोटी के संबंध को बालेन पीएम क्यों खराब करना चाह रहे हैं?
एक आदमी बाइक से कुछ केले लेकर नेपाल जा रहा था। नेपाली सुरक्षा कर्मियों ने चेकिंग के लिए रोक लिया। बेचारा गुस्से में केला जमीन पर रखकर पैर से कुचल दिया। सोशल मीडिया पर यह वीडियो काफी वायरल हो रहा है। बॉर्डर पर इस नियम को कड़ाई से लागू भी किया जा रहा है, जिससे रोज नेपाल से भारत आने-जाने वालों के लिए मुश्किल खड़ी हो गई है। बॉर्डर पर नेपाल के सुरक्षाकर्मी लाउड स्पीकर पर यह घोषणा कर रहे हैं कि आम नागरिकों, सरकारी कर्मचारियों या NGO कार्यकर्ताओं किसी को भी इन नियमों में छूट नहीं मिलेगी। नेपाल और बिहार में रोटी-बेटी का संबंध है। कई लोग प्रतिदिन नेपाल आते-जाते हैं। सरकार के फैसले के बाद उन्हें भी कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
बहुजन लेखक क्रांति कुमार बताते हैं कि “लंबे समय से नेपाली नागरिक और व्यापारी सस्ते और अच्छी क्वालिटी के सामान खरीदने के लिए भारत के सीमावर्ती इलाकों में आते हैं। बालेन शाह का ये नियम डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ की तरह देखा जा रहा है। इससे दोनों देशों के सीमा क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचेगा। क्या जमाना आ गया नन्हा मुन्ना देश भी अब भारत को आंखें दिखाने लगे हैं। नेपाल का ये एक तरफा फैसला बिहार के सीमावर्ती व्यापारियों के लिए वाकई मुश्किल पैदा कर रहा है, छोटी खरीदारी पर भी टैक्स लगने से रोजाना का व्यापार ठप हो गया है।”
मैथिली भाषा के लेखक और रिटायर्ड अधिकारी अरुण कुमार झा बताते हैं कि “’रोटी-बेटी’ के सामाजिक और सांस्कृतिक संबंधों को जानबूझकर बिगाड़ने की साजिश रची जा रही है। पारंपरिक रिश्तों को कमजोर करने की कोशिश बालेन सरकार ने की है।”
नेपाल-भारत खुली सीमा संवाद समूह ने आगाह किया है कि वर्तमान नियम सीमावर्ती इलाकों के निवासियों पर अनुचित भार डाल रहे हैं। संगठन के जारी बयान में नेपाल व भारत के बीच सदियों से चले आ रहे सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक बंधनों का उल्लेख करते हुए दोनों देशों की सरकारों से व्यावहारिक व जनकल्याणकारी कदम उठाने का अनुरोध किया गया है, जिससे सीमा पार यात्रा सहज बने और लोगों के आपसी संबंध और सशक्त हों।
वहीं जनता समाजवादी पार्टी के संरक्षक महन्थ ठाकुर ने विज्ञप्ति जारी कर इस नीति को नेपाल-भारत के बीच ऐतिहासिक आर्थिक और सामाजिक संबंधों पर प्रहार बताया है और पुरानी सहज व्यवस्था बहाल करने की मांग की है।
इस नीति का सीधा असर सीमा व्यापार पर पड़ रहा है। जो सामान आसानी से और कम कीमत पर नेपाली जनता को मिलता था और भारत के छोटे व्यापारी लाभान्वित होते थे। भारत-नेपाल के ‘रोटी-बेटी’ संबंधों के कारण यह मुद्दा ज्यादा संवेदनशील हो गया है।
फैसले के विरोध में प्रदर्शन
फैसले के विरोध में विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शन किए जा रहे हैं और लोगों में नाराजगी बढ़ती नजर आ रही है। नेपाल के बारा जिला मुख्यालय के कलैया भरत चौक पर 19 अप्रैल 2026 को बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा होकर प्रदर्शन किए। इसके अलावा वीरगंज, जनकपुर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में प्रदर्शन किया गया है। कुछ स्थानों पर बाजार बंद कराने की कोशिश भी की गई है, जिससे स्थिति तनावपूर्ण होती जा रही है।
“आदमी के काम आने वाली छोटी सी छोटी जरूरी सामान हम भारत से लाते हैं। यहां तक कि खेती के लिए खाद भी भारत से लाते हैं, जिसे नेपाल सरकार कई बार समय पर उपलब्ध नहीं करा पाती है। पहले सीमा पर कड़ा पहरा नहीं था और बॉर्डर क्रॉस करने के लिए पहले से अनुमति लेने की जरूरत नहीं पड़ती थी।”
“यह फैसला मधेश क्षेत्र के लोगों के जीवन की असलियत को नजरअंदाज करता है। आम नागरिकों की परेशानियों को नजरअंदाज कर नीतियां लागू करना उचित नहीं है।” प्रदर्शन में शामिल लोग कहते हैं।
राष्ट्रीय मुक्ति पार्टी के महासचिव अनिल महासेठ ने कहा कि “नेपाल और भारत के बीच खुली सीमा का निर्धारण काठमांडू या दिल्ली में एयर कंडीशनर में बैठे लोग नहीं कर सकते। विराटनगर से लेकर मिथिला तक के निवासियों की चिंताओं को समझे बिना मनमाने ढंग से नीतियां थोपना पूरी तरह से गलत है।”
नेपाल की विपक्षी पार्टियों ने इस फैसले को अघोषित नाकाबंदी बताया है। वहीं सत्ताधारी पार्टी के एक नेता ने भी इसे अव्यावहारिक कहा है। नेपाली कांग्रेस ने भी इसे जन-विरोधी और असंवेदनशील कहा है।
नेपाल सरकार के मुताबिक यह कदम अपने घरेलू उत्पादों की बिक्री को प्रोत्साहित करने एवं तस्करी पर नियंत्रण के लिए उठाया गया है।
वहीं नेपाल सरकार के फैसले के बाद भारतीय अधिकारी नेपाल जाने वाले और वहां से आने वाले लोगों की सख्ती से जांच कर रहे हैं। सभी लोगों के लिए पहचान पत्र दिखाना अनिवार्य कर दिया गया है।
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