-40 अंक वाले भी बनेंगे स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स ? NEET PG काउन्सलिंग पर SC ने कटऑफ पर जताई हैरानी, सरकार को नोटिस

February 6, 2026 5:10 PM

सुप्रीम कोर्ट ने NEET PG 2025-26 की कटऑफ में बड़ी कटौती पर सख्त रुख अपनाया है। केंद्र सरकार और संबंधित पक्षों से इस फैसले पर विस्तृत जवाब मांगा गया है। दरअसल नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) ने जनवरी 2026 में एक नोटिस जारी किया था। इसमें NEET PG 2025 के तीसरे राउंड काउंसलिंग के लिए क्वालिफाइंग कटऑफ पर्सेंटाइल को काफी कम कर दिया गया।

सामान्य श्रेणी के लिए 50वें पर्सेंटाइल (लगभग 276 अंक) से घटाकर 7वें पर्सेंटाइल (लगभग 103 अंक) कर दिया गया। आरक्षित श्रेणी (SC/ST/OBC) के लिए 40वें पर्सेंटाइल (लगभग 235 अंक) से घटाकर 0 पर्सेंटाइल कर दिया गया, जिसके कारण -40 अंक वाले उम्मीदवार भी काउंसलिंग में शामिल हो सकते हैं। इस बदलाव का मकसद PG मेडिकल सीटों को खाली न रहने देना था, क्योंकि कई सीटें खाली रह गई थीं।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और टिप्पणियां

जनहित याचिका (PIL) में इस फैसले को चुनौती दी गई। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह फैसला मनमाना है, संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन करता है। साथ ही मेडिकल शिक्षा के उच्च मानकों से समझौता करता है जो मरीजों की सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने सुनवाई में कहा ‘हम हैरान हैं कि PG एग्जाम में डॉक्टरों का प्रदर्शन इतना खराब कैसे रहा?’ कटऑफ इतनी कम करने का फैसला भी आश्चर्यजनक है। यह मामला मानकों से जुड़ा है। क्या उन मानकों से समझौता किया जा रहा है?’

कोर्ट ने केंद्र सरकार, NBEMS और अन्य पक्षों से विस्तृत हलफनामा (एफिडेविट) दाखिल करने को कहा है। कोर्ट ने साफ कहा कि उनका अंतःकरण संतुष्ट होना चाहिए कि कोई गलत मंशा नहीं है। अगली सुनवाई की तारीख भी तय की गई है।

याचिकाकर्ताओं के मुख्य तर्क

पोस्टग्रेजुएट स्तर पर योग्यता के मानक बहुत ऊंचे होने चाहिए।
कटऑफ में इतनी बड़ी छूट (खासकर नेगेटिव स्कोर तक) मेरिट को खत्म करती है।
इससे कम क्षमता वाले डॉक्टर PG में आ सकते हैं, जो मरीजों के लिए जोखिम बढ़ा सकता है।
सामान्यतः ऐसी छूट सिर्फ 5-6 पर्सेंटाइल तक ही होनी चाहिए, न कि इतनी ज्यादा।

क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?

NEET PG देश का सबसे बड़ा मेडिकल पोस्टग्रेजुएट एंट्रेंस एग्जाम है। लाखों डॉक्टर हर साल तैयारी करते हैं। अचानक कटऑफ बदलने से उम्मीदवारों की मेहनत पर असर पड़ता है और चयन प्रक्रिया की निष्पादकता पर सवाल उठते हैं।कोर्ट का अंतिम फैसला मेडिकल शिक्षा के मानकों, सीटों की उपलब्धता और योग्यता के बीच संतुलन तय करेगा। फिलहाल काउंसलिंग प्रक्रिया पर इसकी नजर बनी हुई है।

पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 5 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

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