नई दिल्ली। बंगाल और बिहार (Bihar and Bengal) की भाजपा सरकारों ने कहा है कि ऐसे लोग राज्य की सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले पाएंगे।हालांकि, बंगाल में जिन लोगों के मामले ट्रिब्यूनल में विचाराधीन हैं, उन्हें अपना मामला तय होने तक योजनाओं का लाभ मिलता रहेगा।
पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार ने सोमवार को अपना पहला कैबिनेट बैठक की। इसमें घोषणा की गई कि पिछली सरकारों की सभी सामाजिक योजनाएं जारी रहेंगी, साथ ही तृणमूल कांग्रेस शासन के दौरान रोकी गई केंद्र की योजनाएं अब उपलब्ध होंगी।एसआईआर अभियान के तहत मतदाता सूची से नाम कटने वाले लोगों में नई चिंता पैदा हो गई है।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ‘सरकार की सभी सामाजिक योजनाएं, चाहे वे 30 साल या 10 साल पहले शुरू हुई हों, जारी रहेंगी। लेकिन अब ये योजनाएं पारदर्शी तरीके से चलेंगी। मृत व्यक्ति, अवैध घुसपैठिए या गैर-भारतीय व्यक्ति को राज्य के नागरिकों के लिए बनी योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा।’
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने द इंडियन एक्सप्रेस से कहा, ‘बिहार की मतदाता सूची से जिन लोगों के नाम कट गए हैं, उन्हें राशन और अन्य कल्याणकारी योजनाओं सहित किसी भी सरकारी लाभ का हक नहीं होगा।’ उन्होंने आगे कहा कि ‘ऐसे लोगों की बैंक पासबुक भी समय के साथ रद्द कर दी जाएगी।’ बिहार के खाद्य और उपभोक्ता संरक्षण मंत्री अशोक चौधरी ने बताया, ‘एसआईआर के बाद राज्य में राशन कार्ड धारकों में से करीब पांच लाख नाम हटा दिए गए हैं।’
बंगाल के खाद्य और आपूर्ति मंत्री अशोक किर्तनिया ने स्पष्ट किया, ‘जिन नामों की जांच ट्रिब्यूनल में चल रही है, वे सरकारी योजनाओं का लाभ ले सकेंगे। सीएए (नागरिकता संशोधन अधिनियम) के तहत नागरिकता के लिए आवेदन करने वालों को भी सभी योजनाओं का लाभ मिलेगा। लेकिन SIR के तहत जिनके नाम कट गए हैं, उन्हें योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा।’ उन्होंने कहा कि राशन कार्डों की जांच के लिए विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक हो चुकी है। कई राशन कार्ड मृत व्यक्तियों या गैर-भारतीयों के नाम पर हैं।
शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कहा, ‘हम विश्लेषण करेंगे… जिनके नाम कटे हैं, वे देश के नागरिक नहीं हैं या मृत हैं।उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल सकता।’ एसआईआर के पहले बंगाल में 7.66 करोड़ मतदाता थे। एसआईआर के बाद शुरू में 58.20 लाख नाम कटे, जो बाद में करीब 91 लाख हो गए। बिहार में करीब 68 लाख नाम कटे। ट्रिब्यूनल में 34 लाख से ज्यादा अपील दाखिल हुई हैं।
कई प्रभावित लोग चिंतित हैं कि इससे उनका राशन, लक्ष्मी भंडार, कृषक बंधु जैसी योजनाओं का लाभ छिन जाएगा। विपक्षी दलों ने इसे गैर-नागरिक घोषित करने की कोशिश बताया है।









