रायपुर। छत्तीसगढ़ में एमबीबीएस(MBBS) डॉक्टरों को बड़ी राहत देने की तैयारी की जा रही है। राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में अनिवार्य सेवा की व्यवस्था खत्म करने की दिशा में कदम उठा रही है। इसके तहत डॉक्टरों से 25 लाख रुपये का जुर्माना वसूलने और डिग्री रोकने जैसी शर्तों को हटाने की योजना है। नई व्यवस्था लागू होने पर डॉक्टर अपनी इच्छा से ग्रामीण अस्पतालों में सेवाएं दे सकेंगे।
25 लाख के बॉन्ड और डिग्री रोकने की शर्त होगी खत्म
मौजूदा व्यवस्था में एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने वाले डॉक्टरों के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा देने की अनिवार्यता और निर्धारित शर्तों का पालन करना जरूरी होता है। इन शर्तों के तहत सेवा नहीं देने पर 25 लाख रुपये तक का जुर्माना और डिग्री रोके जाने जैसी कार्रवाई का प्रावधान है। सरकार अब इस व्यवस्था में बदलाव की तैयारी कर रही है, ताकि डॉक्टरों को राहत मिल सके और चिकित्सा क्षेत्र में उनकी भागीदारी बढ़ाई जा सके।
डॉक्टरों की भर्ती पर भी सरकार का जोर
छत्तीसगढ़ में सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी दूर करना सरकार के सामने बड़ी चुनौती है। प्रदेश में चिकित्सा विशेषज्ञों के 1,464 पद खाली हैं, जबकि मेडिकल ऑफिसर के 327 पदों पर भी भर्ती की जरूरत है। इन रिक्त पदों को भरने के लिए नियमित भर्ती की तैयारी की जा रही है।
सरकार का जोर केवल बॉन्ड व्यवस्था खत्म करने तक सीमित नहीं है, बल्कि अस्पतालों में डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी है। खाली पदों पर भर्ती होने से ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी दूर करने की तैयारी
ग्रामीण अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए सरकार नई नीति तैयार कर रही है। इसका उद्देश्य डॉक्टरों को ग्रामीण क्षेत्रों में स्वेच्छा से सेवा देने के लिए प्रोत्साहित करना और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार करना है।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत डॉक्टरों पर अनिवार्य ग्रामीण सेवा का दबाव कम किया जा सकता है। वहीं, रिक्त पदों पर नियमित भर्ती और नई नीति के जरिए ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की कोशिश होगी।










