रायपुर। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे एसईसीआर (SECR)की ओर से माल ढुलाई से सालाना 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक की कमाई किए जाने के बावजूद यात्री सुविधाओं की अनदेखी का आरोप लगाते हुए अधिवक्ता एवं कांग्रेस नेता मनोज सिंह ठाकुर ने रेलवे प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत मिली जानकारी का हवाला देते हुए कहा कि रेलवे की प्राथमिकता माल ढुलाई से राजस्व बढ़ाना है, जबकि लगातार ट्रेनें रद्द होने से दैनिक यात्रियों, नौकरीपेशा लोगों, विद्यार्थियों और मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ठाकुर के मुताबिक, एसईसीआर के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022-23 में माल ढुलाई से 26,581.30 करोड़ रुपये, 2023-24 में 27,794.61 करोड़ रुपये, 2024-25 में 29,372.43 करोड़ रुपये और 2025-26 में 30,410.30 करोड़ रुपये की कमाई हुई। इसके मुकाबले यात्री किराये से इन वर्षों में क्रमशः 1,131.92 करोड़, 1,280.73 करोड़, 1,330.70 करोड़ और 1,417.95 करोड़ रुपये का राजस्व मिला। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026-27 में अगस्त 2026 तक माल ढुलाई से 13,105.74 करोड़ रुपये की कमाई दर्ज की गई है।

ठाकुर ने सवाल उठाया कि जब एसईसीआर माल ढुलाई से इतना अधिक राजस्व अर्जित कर रहा है, तो इस क्षेत्र के यात्रियों को नियमित और सुविधाजनक रेल सेवा क्यों नहीं मिल रही है। उन्होंने कहा कि रेलवे की कमाई का लाभ आम यात्रियों को भी मिलना चाहिए और मालगाड़ियों को प्राथमिकता देने के नाम पर यात्री सेवाओं की लगातार अनदेखी नहीं की जा सकती।
दैनिक यात्रियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था नहीं
ठाकुर ने आरटीआई के जवाब का हवाला देते हुए कहा कि रद्द ट्रेनों से प्रभावित दैनिक यात्रियों के लिए वैकल्पिक यात्रा व्यवस्था के संबंध में पूछे गए सवाल पर रेलवे ने स्पष्ट किया कि ऐसी कोई अलग व्यवस्था उपलब्ध नहीं कराई जाती है। जवाब में कहा गया है, “No separate alternative travel arrangements are provided for affected daily commuters.”
उन्होंने कहा कि पैसेंजर और मेमू ट्रेनों के अचानक रद्द होने से रोजाना यात्रा करने वाले लोगों को निजी बसों और टैक्सियों का सहारा लेना पड़ता है। इससे उनका समय और पैसा दोनों खर्च होते हैं। ठाकुर ने सवाल किया कि जब रेलवे बड़े पैमाने पर राजस्व अर्जित कर रहा है, तो प्रभावित यात्रियों के लिए वैकल्पिक परिवहन की व्यवस्था क्यों नहीं की जा सकती।
ट्रेनों के निरस्तीकरण के आंकड़ों पर भी सवाल
ठाकुर ने आरोप लगाया कि वर्ष 2023 से 2026 के बीच रद्द की गई ट्रेनों की कुल संख्या और निरस्तीकरण के कारणों की जानकारी मांगने पर रेलवे के वाणिज्य विभाग ने मामले को परिचालन विभाग के जिम्मे बता दिया। उनके अनुसार, इससे यात्रियों को प्रभावित करने वाले फैसलों की पूरी जानकारी सामने नहीं आ पा रही है। उन्होंने कहा कि रेलवे को ट्रेनों के निरस्तीकरण और उसके कारणों से जुड़ी जानकारी पारदर्शी तरीके से उपलब्ध करानी चाहिए।
ठाकुर ने रेलवे प्रशासन से मांग की कि लोकल और पैसेंजर ट्रेनों को रद्द करने या उनमें देरी की समस्या पर तत्काल रोक लगाई जाए तथा सभी प्रभावित सेवाओं को बहाल किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक नियमित रेल सेवाएं बहाल नहीं होतीं, तब तक प्रभावित दैनिक यात्रियों के लिए रेलवे अपने खर्च पर वैकल्पिक परिवहन की व्यवस्था करे।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यात्री सुविधाओं को लेकर उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो वे दैनिक यात्रियों को लामबंद कर आंदोलन करेंगे। जरूरत पड़ने पर इस मामले को लेकर उच्च न्यायालय में जनहित याचिका भी दायर की जाएगी।










