रायपुर। निर्वाचन आयोग की बैठक में गुरुवार को मतदाता सूची में गड़बड़ी, फॉर्म-7 (Form-7) के दुरुपयोग और शिक्षकों की चुनावी ड्यूटी को लेकर कई सवाल उठाए गए। बैठक में शामिल एक प्रतिनिधि के मुताबिक, विपक्षी दलों ने पहले की शिकायतों पर अब तक हुई कार्रवाई का हिसाब मांगा। साथ ही निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर सीधे कलेक्टर के साथ बैठक करने की मांग रखी। प्रतिनिधि ने यह भी दावा किया कि बैठक में मौजूद विपक्षी दलों ने उनकी उपस्थिति पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया।
फॉर्म-7 की शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई?
बैठक में सबसे प्रमुख मुद्दा फॉर्म-7 से जुड़ी शिकायतों का रहा। प्रतिनिधि के अनुसार, पहले निर्वाचन अधिकारियों को कुछ फॉर्म-7 सौंपकर जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 31 और 32 के तहत कार्रवाई की मांग की गई थी। बैठक में विपक्षी दलों ने पूछा कि इन शिकायतों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई है। फॉर्म-7 का इस्तेमाल मतदाता सूची में किसी नाम को हटाने या उस पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए किया जाता है। ऐसे में गलत जानकारी देकर नाम कटवाने की शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होने से चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।
अधिकारियों के बजाय कलेक्टर से बैठक की मांग
प्रतिनिधि ने बताया कि विपक्षी दलों ने निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर सीधे कलेक्टर के साथ बैठक करने की मांग की है। उनका कहना था कि इन मामलों में दूसरे अधिकारियों के साथ बैठक करने के बजाय जिम्मेदार अधिकारी से जवाब लिया जाना चाहिए। विपक्षी दलों ने निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता और शिकायतों पर ठोस कार्रवाई की जरूरत बताई।
शिक्षकों की ड्यूटी से पढ़ाई पर असर, जवाब मांगा
बैठक में शिक्षकों को लगातार गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाए जाने का मुद्दा भी उठाया गया। प्रतिनिधि ने सवाल किया कि मतदाता सूची पुनरीक्षण और जनगणना जैसे कामों में शिक्षकों की ड्यूटी लगाने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, इसकी भरपाई कैसे होगी? उन्होंने आरोप लगाया कि पहले भी अलग-अलग सरकारी गतिविधियों के कारण स्कूलों की पढ़ाई प्रभावित हुई है। अब दोबारा मतदाता सूची पुनरीक्षण और आने वाले समय में जनगणना के काम से शिक्षकों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी बढ़ेगी। ऐसे में नियमित कक्षाएं कैसे चलेंगी, इसका जवाब प्रशासन को देना चाहिए।
शिकायतों का जवाब और पढ़ाई की व्यवस्था जरूरी
बैठक में उठे सवाल केवल मतदाता सूची तक सीमित नहीं रहे। विपक्षी दलों ने चुनावी कामकाज में जवाबदेही और सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई। फॉर्म-7 से जुड़ी शिकायतों पर कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट करना निर्वाचन अधिकारियों की जिम्मेदारी है। वहीं, शिक्षकों की चुनावी ड्यूटी के दौरान बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए भी ठोस व्यवस्था जरूरी है। फिलहाल बैठक में उठाए गए सवालों पर निर्वाचन अधिकारियों की ओर से क्या जवाब दिया गया, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है।









