महाराष्ट्र निकाय चुनाव : मुंबई से नागपुर तक भाजपा नेतृत्व वाली महायुति का दबदबा, शहरी राजनीति में 27 साल बाद बड़ा बदलाव

January 16, 2026 10:36 PM
Maharashtra municipal body election

मुंबई। महाराष्ट्र के नगरीय निकाय चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की शहरी राजनीति की दिशा और दशा दोनों बदल दी है। बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) समेत राज्य के प्रमुख नगर निगमों में भाजपा-नेतृत्व वाली महायुति ने स्पष्ट बढ़त बनाते हुए लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक समीकरणों को ध्वस्त कर दिया है।

खास तौर पर मुंबई में यह परिणाम इसलिए ऐतिहासिक माने जा रहे हैं, क्योंकि करीब 27 साल बाद ठाकरे परिवार के वर्चस्व को गंभीर चुनौती मिली है।

बृहन्मुंबई महानगरपालिका के मतगणना रुझानों में बीजेपी-शिवसेना (शिंदे गुट) की अगुवाई वाली महायुति को स्पष्ट बहुमत मिलता दिख रहा है। दशकों से बीएमसी पर शिवसेना (ठाकरे गुट) का दबदबा रहा है, लेकिन इस बार शहरी मतदाता ने रुख बदलते हुए महायुति को निर्णायक बढ़त दिलाई है। इसे राज्य की राजनीति में एक बड़े टर्निंग पॉइंट के रूप में देखा जा रहा है। 227 सीटों वाले बीएमसी में भाजपा-शिवसेना के 118 पार्षद जीत रहे हैं।

राज्य के अन्य बड़े नगर निगमों में भी महायुति का प्रदर्शन प्रभावशाली रहा है।

ठाणे नगर निगम के 131 सीटों में से बीजेपी-शिवसेना गठबंधन लगभग 49 सीटों पर आगे चल रहा है। ठाणे में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के प्रभाव और भाजपा के संगठनात्मक ढांचे का असर साफ नजर आया।

151 सीटों वाले नागपुर नगर निगममें बीजेपी 113 से अधिक सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। इसे महायुति की शहरी पकड़ और केंद्रीय नेतृत्व के प्रभाव के रूप में देखा जा रहा है।

मिरा-भायंदर नगर निगम में भी महायुति उम्मीदवारों ने 51 सीटों में मजबूत बढ़त हासिल की है, जिससे मुंबई महानगर क्षेत्र में गठबंधन की स्थिति और मजबूत हुई है।

राज्य के अधिकांश शहरी क्षेत्रों में महायुति का दबदबा है, लेकिन वासई-वीरार नगर निगममें बहुजन विकास आघाड़ी (BVA) ने भाजपा को कड़ी चुनौती देते हुए अग्रणी रुझान दिखाया है। यह इलाका स्थानीय दलों के प्रभाव का उदाहरण बनकर उभरा है।

अन्य बड़े शहरों में भी महायुति आगेचल रही है। पुणे, नासिक और पिंपरी-चिंचवड़ जैसे अहम औद्योगिक और शैक्षणिक केंद्रों में भी भाजपा या महायुति गठबंधन स्पष्ट रूप से आगे चल रहा है। इन नतीजों ने संकेत दिया है कि शहरी मतदाता विकास, बुनियादी सुविधाओं और स्थिर नेतृत्व के मुद्दों पर एकजुट नजर आया।

राज्य के कुल 29 नगर निगमों में से अधिकांश में महायुति का पलड़ा भारी रहा है। भाजपा, शिंदे शिवसेना और सहयोगी दलों से बने इस गठबंधन ने शुरुआती मतगणना रुझानों में कई नगर निगमों में बहुमत की ओर मजबूत कदम बढ़ाए हैं।

यह रुझान विपक्ष के लिए चिंता का विषय बन गया है। महा विकास अघाड़ी (MVA) जिसमें कांग्रेस, शिवसेना (UBT) और एनसीपी (शरद पवार गुट) शामिल हैं, कई नगर निगमों में संघर्ष करती नजर आई। लेकिन बड़े शहरी निकायों में उसे उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिल पाई। कुछ स्थानों पर कांटे की टक्कर जरूर देखने को मिली, लेकिन कुल मिलाकर एमवीए का प्रदर्शन कमजोर माना जा रहा है।

वासई-वीरार जैसे कुछ क्षेत्रों में स्थानीय दलों ने यह साबित किया कि क्षेत्रीय मुद्दे और मजबूत स्थानीय नेतृत्व अब भी निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि, राज्यव्यापी स्तर पर यह प्रभाव सीमित ही रहा।

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दानिश अनवर

दानिश अनवर, द लेंस में जर्नलिस्‍ट के तौर पर काम कर रहे हैं। उन्हें पत्रकारिता में करीब 14 वर्षों का अनुभव है। 2022 से दैनिक भास्‍कर में इन्‍वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग टीम में सीनियर रिपोर्टर के तौर पर काम किया है। इस दौरान स्‍पेशल इन्‍वेस्टिगेशन खबरें लिखीं। दैनिक भास्‍कर से पहले नवभारत, नईदुनिया, पत्रिका अखबार में 10 साल काम किया। इन सभी अखबारों में दानिश अनवर ने विभिन्न विषयों जैसे- क्राइम, पॉलिटिकल, एजुकेशन, स्‍पोर्ट्स, कल्‍चरल और स्‍पेशल इन्‍वेस्टिगेशन स्‍टोरीज कवर की हैं। दानिश को प्रिंट का अच्‍छा अनुभव है। वह सेंट्रल इंडिया के कई शहरों में काम कर चुके हैं।

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