नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र (Monsoon Session) का आखिरी दिन भी हंगामे और सियासी खींचतान के बीच खत्म हो गया। गुरुवार को लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पहुंचे। सदन की कार्यवाही शुरू होने के बाद ‘वंदे मातरम्’ का गायन हुआ और इसके कुछ ही देर बाद लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। वहीं राज्यसभा में कार्यवाही चल रही है।
इससे पहले पूरे सत्र के दौरान NEET पेपर लीक और छात्रों के प्रदर्शन का मुद्दा विपक्ष के निशाने पर रहा। विपक्ष लगातार इस मामले पर सरकार से चर्चा और जवाब की मांग करता रहा। सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध के चलते कई मौकों पर सदन की कार्यवाही बाधित हुई।
आखिरी दिन से पहले अमित शाह ने लिखी थी चिट्ठी
सत्र के आखिरी दिन से ठीक एक दिन पहले, 12 अगस्त को गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर NEET से जुड़े छात्र आंदोलन और उससे जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए समय तय करने का आग्रह किया था। शाह ने कहा था कि सरकार इस मुद्दे पर उठाए जाने वाले सभी सवालों का जवाब देने के लिए तैयार है।
शाह के इस पत्र के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई थी कि आखिरी दिन सरकार और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर सदन में चर्चा हो सकती है। लेकिन गुरुवार को लोकसभा की कार्यवाही कुछ ही मिनट में समाप्त हो गई।
हंगामे के बीच पूरा हुआ 25 दिन का सत्र
संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त 2026 तक चलना तय था। कुल 25 दिनों के इस सत्र में 19 बैठकें निर्धारित थीं।
सत्र की शुरुआत से ही NEET पेपर लीक, छात्रों के प्रदर्शन, परीक्षा व्यवस्था और अन्य मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष में टकराव देखने को मिला। विपक्ष ने शिक्षा मंत्री और सरकार की जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठाए।
अब आखिरी दिन भी जिस तरह सदन की कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही मिनट बाद समाप्त हो गई, उससे अमित शाह के एक दिन पहले दिए गए चर्चा के प्रस्ताव पर बहस नहीं हो पाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
यानी जिस मुद्दे पर पूरे सत्र में सियासत गर्म रही, आखिरी दिन उस पर चर्चा की उम्मीद बनी और फिर सदन कुछ ही मिनट में अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया।









