भोपाल। मध्य प्रदेश में तेंदुओं के लिए कब्रगाह बन चुका है। तेंदुओं की मौत को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) में तेंदुओं के मौत से जुड़े कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। इसके मुताबिक मात्र 14 महीनों में प्रदेश में 149 तेंदुओं की मौत हो गई है, जिनमें सड़क हादसे और करंट सबसे बड़े कारण हैं।
तेंदुओं की मौत के पीछे की मुख्य वजह यह भी सामने आती है कि सड़कों का विकास हो रहा है और जंगलों से सड़कें गुजर रहीं है, लेकिन, जानवरों के लिए कोई सुरक्षित रास्ता नहीं बनाया जा रहा है।
हाईवे और इंसानी दखल

RTI एक्टिविस्ट अजय दुबे द्वारा तेंदुओं की मौत से जुड़े मामले में सूचना का अधिकार का उपयोग किया गया था। इसमें तेंदुओं की मौत से जुड़े कारणों और संख्या की जानकारी मांगी गई थी।
RTI कार्यकर्ता अजय दुबे को विभाग द्वारा दिए गए आंकड़ों से पता चलता है कि इन मौतों का सबसे बड़ा कारण जंगल के बीच से गुजरने वाले हाईवे और इंसानी दखल है। इनमें सबसे ज्यादा 31 प्रतिशत से ज्यादा मौतें सड़क और हाईवे हादसों की वजह से हुईं। मुख्यतः सिवनी-नागपुर हाईवे और भोपाल-रायसेन इलाके में तेंदुओं ने अपनी जान गंवाई है।
तेंदुओं के लिए बिजली की तार और रेलवे लाइन संकट

तेंदुओं की 5% मौतें खेतों में अवैध बिजली के तारों की चपेट में आने से हुईं हैं। इनमें सिवनी, नर्मदापुरम (सतपुड़ा लैंडस्केप) और रातापानी अभयारण्य के आसपास के इलाके तेंदुओं के लिए सबसे खतरनाक साबित हो रहे हैं। इसके अलावा रेलवे लाइन में चलती ट्रेन की चपेट में आ जाने से भी तेंदुओं की जाने गईं हैं।
14 महीने में 149 मौतें
मिली जानकारी के अनुसार, जनवरी 2025 से 14 महीनों में राज्य में 149 तेंदुओं की मौत दर्ज की गई है. डेटा के मुताबिक, सबसे ज्यादा 31 प्रतिशत मौतें सड़क हादसों में हुईं। इनमें से 19 तेंदुओं की जान हाईवे पर गई। RTI अर्जी दाखिल करने वाले एक्टिविस्ट अजय दुबे के अनुसार ये आंकड़े एक गंभीर सच्चाई दिखाते हैं, वहीं वन विभाग ने कहा कि मौतों को कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं विभाग ने यह भी कहा कि चार प्रतिशत की मृत्यु दर तेंदुए के लिए स्वीकार्य सीमा के भीतर ही है।
मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा तेंदुए
वन विभाग द्वारा जारी जानकारी के अनुसार फरवरी 2024 में भारत में तेंदुओं की स्थिति 2022 रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश में देश में तेंदुओं की आबादी सबसे ज्यादा है जो 3907 है। इसके बाद महाराष्ट्र और कर्नाटक का नंबर आता है राज्य में 2018 में 3421 तेंदुओं की गिनती की गई थी।
मध्य प्रदेश तेंदुआ मृत्यु दर चार्ट (14 माह)
- सड़क व रेल दुर्घटना 46 यानि 31% मरे, जिसमें सबसे अधिक सिवनी, रायसेन, होशंगाबाद (NH-44 और रातापानी क्षेत्र)।
- प्राकृतिक मृत्यु– 36 यानि 24%। ये मौते कान्हा बांधवगढ़ और पेंच टाइगर रिजर्व में हुई।
- आपसी संघर्ष– 31 मौत, जिसमें बांधवगढ़, पन्ना और उमरिया।
- शिकार और प्रतिशोध– 21 मरे, जिसमें छिंदवाड़ा, सागर और दमोह के वन क्षेत्र।
- अज्ञात / अन्य कारण 13 मरे– इनमें मुरैना, ग्वालियर और शिवपुरीमें सबसे अधिक करंट लगना।10 तेंदुए की मौत सिवनी, इंदौर और शहडोल (खेतों के किनारे) हुई।
- जाल / फंदे – 2 मरे वह भी बांधवगढ़ बफर जोन और उमरिया।










